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Blog / 31 Aug 2026

‘वन नेशन, वन टाइम’: भारत की समय-संप्रभुता की दिशा में कदम

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्र सरकार ने देश में भारतीय मानक समय (Indian Standard Time-IST) को एक समान और विश्वसनीय राष्ट्रीय समय-संदर्भ के रूप में स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस पहल कोवन नेशन, वन टाइमके रूप में देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल देशभर की घड़ियों को एक समय पर लाना नहीं, बल्कि बैंकिंग, दूरसंचार, डिजिटल भुगतान, विद्युत ग्रिड, रेलवे, शेयर बाजार और अन्य महत्त्वपूर्ण प्रणालियों को एक सटीक एवं विश्वसनीय समय-स्रोत से सिंक्रनाइज़ करना है।

वन नेशन, वन टाइमक्या है?

      • भारत में पहले से ही एक ही आधिकारिक समय क्षेत्र है और IST, UTC से 5 घंटे 30 मिनट आगे है। इसलिए इस पहल का उद्देश्य कोई नया Time Zone लागू करना नहीं है।
      • इसके तहत IST को देश में आधिकारिक एवं कानूनी कार्यों के लिए एकमात्र संदर्भ समय बनाने तथा इसके प्रसार की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
      • आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में समय एक महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना (Critical Digital Infrastructure) बन चुका है। इसलिए अलग-अलग प्रणालियों द्वारा अलग-अलग समय-स्रोतों पर निर्भरता को कम करना आवश्यक है।

One Nation, One Time: Indian Standard Time to become legal time reference  across India

यह कैसे काम करेगा?

      • भारत का आधिकारिक समय सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (CSIR-NPL) द्वारा अत्यधिक सटीक एटॉमिक क्लॉक की सहायता से निर्धारित और बनाए रखा जाता है।
      • इस समय को देशभर में उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक प्रिसिजन टाइम प्रोटोकॉल (PTP) और व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी (WRT) जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
      • व्हाइट रैबिट टेक्नोलॉजी (WRT) मुख्यतः फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क के माध्यम से अत्यंत उच्च सटीकता के साथ अलग-अलग प्रणालियों को एक ही समय-स्रोत से सिंक्रनाइज़ करने में सहायता करती है।
      • इसके साथ ही, भारत अपनी स्वदेशी उपग्रह-आधारित क्षमताओं, विशेषकर नाविक (NavIC), का उपयोग करके बाहरी समय-स्रोतों पर निर्भरता को कम कर सकता है।

भारत के लिए इसकी आवश्यकता क्यों है?

      • डिजिटल अर्थव्यवस्था की विश्वसनीयता: डिजिटल भुगतान, बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन में प्रत्येक लेन-देन (Transaction) का सटीक टाइमस्टाम्प आवश्यक होता है। समय में मामूली अंतर भी लेनदेन के क्रम को प्रभावित कर सकता है।
      • वित्तीय बाजारों की दक्षता: शेयर बाजार और हाई-फ़्रीक्वेंसी ट्रेडिंग में अत्यंत छोटे समय-अंतराल में हजारों लेनदेन होते हैं। एक समान और सटीक समय-संदर्भ पारदर्शिता एवं निष्पक्षता बढ़ा सकता है।
      • महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का सिंक्रोनाइज़ेशन: विद्युत ग्रिड, दूरसंचार नेटवर्क, रेलवे सिग्नलिंग और विमानन जैसी प्रणालियों में विभिन्न उपकरणों के बीच सटीक समय-सामंजस्य आवश्यक है।
      • साइबर सुरक्षा: साइबर घटनाओं की जाँच में विभिन्न सर्वरों और नेटवर्क उपकरणों के लॉग्स के टाइमस्टाम्प को आपस में मिलाना पड़ता है। सटीक समय-संदर्भ Digital Forensics को अधिक प्रभावी बनाता है।
      • रणनीतिक स्वायत्तता: वर्तमान में कई प्रणालियाँ ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) से प्राप्त समय-संकेतों पर निर्भर हैं। बाहरी प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता से सिग्नल व्यवधान, स्पूफिंग और हेरफेर का जोखिम पैदा हो सकता है। इसलिए स्वदेशी और सुरक्षित समय-संदर्भ विकसित करना डिजिटल संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण है।

प्रमुख चुनौतियाँ:

      • देशभर में उच्च-सटीकता वाले समय प्रसार नेटवर्क (Time Dissemination Network) का विस्तार।
      • पुराने डिजिटल एवं औद्योगिक उपकरणों को नए मानकों के अनुरूप बनाना।
      • विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों के बीच समन्वय।
      • छोटे संस्थानों के लिए तकनीकी उन्नयन की लागत।
      • GNSS आधारित प्रणालियों से राष्ट्रीय समय-स्रोत की ओर संक्रमण।
      • टाइम सिंक्रोनाइज़ेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना।

आगे की राह:

      • भारत को एक बहु-स्तरीय और सुरक्षित राष्ट्रीय समय प्रसारण नेटवर्क विकसित करना चाहिए। इसके लिए फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क, एटॉमिक क्लॉक, उपग्रह-आधारित प्रणालियों और NavIC जैसी स्वदेशी क्षमताओं का एकीकृत उपयोग किया जा सकता है।
      • इसके साथ क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बैकअप टाइम सोर्स, रेगुलर कैलिब्रेशन और मजबूत साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल विकसित करना जरूरी है।

निष्कर्ष:

वन नेशन, वन टाइमभारत में समय की एकरूपता से कहीं अधिक व्यापक पहल है। यह डिजिटल अर्थव्यवस्था, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है। भविष्य की डेटा-संचालित अर्थव्यवस्था में सटीक समय केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि डिजिटल शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा की आधारभूत अवसंरचना बन जाएगा। 

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