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Blog / 22 Jun 2026

प्रधानमंत्री मोदी ने ₹25,000 करोड़ की कोयला गैसीकरण परियोजना की आधारशिला रखी

संदर्भ:

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लखनपुर में ₹25,000 करोड़ की कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट परियोजना की वर्चुअल आधारशिला रखी। इस परियोजना का विकास भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (BCGCL) द्वारा किया जा रहा है, जो कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) का संयुक्त उपक्रम है। इसे भारत की पहली बड़े पैमाने की औद्योगिक कोयला गैसीकरण आधारित रासायनिक परियोजना माना जा रहा है।

परियोजना के बारे में:

      • यह एक वाणिज्यिक कोयला गैसीकरण संयंत्र है, जो घरेलू कोयले को अमोनियम नाइट्रेट में परिवर्तित करेगा। अमोनियम नाइट्रेट एक महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायन है, जिसका मुख्य रूप से उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाता है:
        • खनन विस्फोटकों के निर्माण में
        • अवसंरचना विकास में
        • सिविल इंजीनियरिंग गतिविधियों में
      • यह संयंत्र प्रतिदिन लगभग 2,000 टन (TPD) अमोनियम नाइट्रेट का उत्पादन करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 6.6 लाख टन होगी।
      • इस परियोजना में बीएचईएल द्वारा विकसित स्वदेशी प्रेशराइज्ड फ्लूडाइज्ड बेड गैसीफिकेशन (PFBG) प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा, जो घरेलू तकनीकी क्षमता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

PM Modi to lay foundation stone of India's First Commercial-Scale Coal-to-Ammonium  Nitrate Project in Odisha The coal gasification initiative is expected to  catalyse investments of Rs 2.5 to 3 lakh crore and

इस परियोजना में कोयला गैसीकरण कैसे कार्य करता है?

      • कोयला गैसीकरण में ठोस कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे सिंगैस (Syngas) अर्थात् कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन के मिश्रण में परिवर्तित किया जाता है। इसके बाद इस सिंगैस को निम्नलिखित उत्पादों में परिवर्तित किया जाता है:
        • हैबर-बॉश प्रक्रिया के माध्यम से अमोनिया (NH)
        • ऑस्टवाल्ड प्रक्रिया के माध्यम से नाइट्रिक अम्ल (HNO)
        • अंततः अमोनियम नाइट्रेट (NHNO)
      • इस प्रकार, कोयला केवल ईंधन के रूप में उपयोग होने के बजाय रासायनिक उत्पादन के लिए कच्चे माल (Feedstock) के रूप में कार्य करता है, जिससे अधिक मूल्य संवर्धन संभव होता है।

 25,000 Crore Coal Gasification Project in Odisha

कोयला गैसीकरण क्या है?

कोयला गैसीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को सिंगैस (सिंथेटिक गैस) में परिवर्तित किया जाता है, जो हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण होती है। इस सिंगैस का उपयोग रसायनों, उर्वरकों, ईंधनों तथा अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है।

प्रत्यक्ष रूप से कोयला जलाने की तुलना में गैसीकरण:

      • कोयले के उपयोग की दक्षता बढ़ाता है।
      • उच्च मूल्य वाले रसायनों के उत्पादन को संभव बनाता है।
      • स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के साथ संयोजन होने पर पर्यावरणीय प्रभाव को कम करता है।

परियोजना का महत्व:

      • ऊर्जा एवं आयात सुरक्षा: भारत बड़ी मात्रा में अमोनिया और संबंधित रसायनों का आयात करता है। यह परियोजना प्रचुर मात्रा में उपलब्ध घरेलू कोयले का उपयोग करके आयात निर्भरता को कम करेगी।
      • कोयला अर्थव्यवस्था में मूल्य संवर्धन: बिजली उत्पादन हेतु कोयला जलाने के बजाय इसे उच्च मूल्य वाले रसायनों में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग सुनिश्चित होगा।
      • आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा: बीएचईएल की स्वदेशी प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के सहयोग से रणनीतिक रासायनिक उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।
      • औद्योगिक विकास: अमोनियम नाइट्रेट खनन, अवसंरचना और निर्माण क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को समर्थन मिलेगा।

चुनौतियाँ:

      • उच्च पूंजीगत एवं परिचालन लागत
      • पर्यावरणीय चिंताएँ (गैसीकरण प्रक्रिया से CO उत्सर्जन)
      • प्रौद्योगिकी के बड़े पैमाने पर विस्तार से जुड़े जोखिम
      • अमोनियम नाइट्रेट की विस्फोटक प्रकृति के कारण कड़े सुरक्षा मानकों की आवश्यकता

निष्कर्ष:

कोल-टू-अमोनियम नाइट्रेट परियोजना भारत की कोयला नीति में एक रणनीतिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें केवल ऊर्जा उत्पादन के बजाय मूल्यवर्धित रासायनिक उत्पादन और औद्योगिक आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जा रहा है। यह परियोजना यह भी दर्शाती है कि आर्थिक विकास और आयात प्रतिस्थापन के साथ संतुलन स्थापित करते हुए कोयला गैसीकरण भारत के ऊर्जा संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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