भारत में स्कूल शिक्षा प्रणाली पर नीति आयोग की रिपोर्ट
संदर्भ:
हाल ही में, नीति आयोग ने “भारत में स्कूल शिक्षा प्रणाली: गुणवत्ता संवर्धन हेतु कालानुक्रमिक विश्लेषण और नीतिगत रोडमैप” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है।
रिपोर्ट के बारे में:
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- यह रिपोर्ट वर्ष 2014-15 से 2024-25 तक भारत की स्कूल शिक्षा प्रणाली की प्रगति का विश्लेषण करती है तथा विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप गुणवत्ता, समानता और सीखने के परिणामों में सुधार के लिए सिफारिशें प्रस्तुत करती है।
- यह अध्ययन UDISE+, PARAKH, NAS और ASER सर्वेक्षणों के आँकड़ों पर आधारित है, जिसमें सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है।
- यह रिपोर्ट वर्ष 2014-15 से 2024-25 तक भारत की स्कूल शिक्षा प्रणाली की प्रगति का विश्लेषण करती है तथा विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप गुणवत्ता, समानता और सीखने के परिणामों में सुधार के लिए सिफारिशें प्रस्तुत करती है।
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स्कूल शिक्षा में प्रमुख उपलब्धियाँ:
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- भारत, वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी स्कूल शिक्षा प्रणाली का संचालन कर रहा है, जिसमें 14.71 लाख विद्यालय, 24.69 करोड़ से अधिक विद्यार्थी और 1.01 करोड़ शिक्षक शामिल हैं।
- रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि प्रारंभिक शिक्षा में लगभग सार्वभौमिक पहुँच हासिल कर ली गई है, जहाँ प्राथमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (GER) 90.9% तथा उच्च प्राथमिक स्तर पर 90.3% है।
- पिछले एक दशक में स्कूल अवसंरचना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कार्यशील बिजली सुविधा वाले विद्यालयों का प्रतिशत 2014-15 में 55.96% से बढ़कर 2024-25 में 91.9% हो गया है।
- डिजिटल पहुँच में भी तेज़ी से विस्तार हुआ है, जहाँ इंटरनेट सुविधा वाले विद्यालयों का प्रतिशत 8.05% से बढ़कर 63.5% तक पहुँच गया है। सीखने के परिणामों में भी, विशेषकर आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता के क्षेत्र में, महामारी के कारण उत्पन्न व्यवधानों के बाद धीरे-धीरे सुधार दिखाई दे रहा है।
- भारत, वर्तमान में विश्व की सबसे बड़ी स्कूल शिक्षा प्रणाली का संचालन कर रहा है, जिसमें 14.71 लाख विद्यालय, 24.69 करोड़ से अधिक विद्यार्थी और 1.01 करोड़ शिक्षक शामिल हैं।
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रिपोर्ट में चिन्हित प्रमुख चुनौतियाँ:
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- प्रगति के बावजूद, रिपोर्ट में कई संरचनात्मक तथा अधिगम-संबंधी चुनौतियों की पहचान की गई है। स्कूल शिक्षा प्रणाली अभी भी खंडित बनी हुई है, जहाँ प्राथमिक विद्यालयों की संख्या बहुत अधिक है, लेकिन उच्च माध्यमिक विद्यालयों की संख्या सीमित है। जहाँ 7.3 लाख प्राथमिक विद्यालय हैं, वहीं केवल 1.64 लाख उच्च माध्यमिक विद्यालय मौजूद हैं, जिससे विद्यार्थियों के लिए अगले स्तर पर संक्रमण में कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं।
- माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट एक गंभीर चिंता बना हुआ है। माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 11.5% है जबकि प्राथमिक स्तर पर यह केवल 0.3% है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि एक-तिहाई से अधिक विद्यालयों में 50 से कम विद्यार्थी हैं, जिससे संसाधनों का आवंटन और शिक्षकों की तैनाती प्रभावी ढंग से नहीं हो पाती।
- शिक्षा की गुणवत्ता अभी भी असमान बनी हुई है। ASER के निष्कर्षों के अनुसार, ग्रामीण भारत में कक्षा 5 के लगभग आधे विद्यार्थी कक्षा 2 स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम नहीं हैं, जो रटने की प्रवृत्ति तथा कमजोर आधारभूत कौशल की लगातार बनी हुई समस्या को दर्शाता है।
- प्रगति के बावजूद, रिपोर्ट में कई संरचनात्मक तथा अधिगम-संबंधी चुनौतियों की पहचान की गई है। स्कूल शिक्षा प्रणाली अभी भी खंडित बनी हुई है, जहाँ प्राथमिक विद्यालयों की संख्या बहुत अधिक है, लेकिन उच्च माध्यमिक विद्यालयों की संख्या सीमित है। जहाँ 7.3 लाख प्राथमिक विद्यालय हैं, वहीं केवल 1.64 लाख उच्च माध्यमिक विद्यालय मौजूद हैं, जिससे विद्यार्थियों के लिए अगले स्तर पर संक्रमण में कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं।
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नीति आयोग की सिफारिशें:
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- रिपोर्ट में कक्षा 1 से 12 तक को शामिल करने वाले समग्र विद्यालयों (Composite Schools) के विकास तथा साक्ष्य-आधारित विद्यालय युक्तिकरण के माध्यम से संरचनात्मक सुधारों की सिफारिश की गई है। साथ ही, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की निगरानी के लिए स्वतंत्र राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण (SSSAs) स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया है।
- इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में दक्षता-आधारित शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल समावेशन तथा दिव्यांग बच्चों और प्रवासी विद्यार्थियों के समर्थन पर विशेष बल दिया गया है। आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता को सुदृढ़ करना अभी भी प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है।
- रिपोर्ट में कक्षा 1 से 12 तक को शामिल करने वाले समग्र विद्यालयों (Composite Schools) के विकास तथा साक्ष्य-आधारित विद्यालय युक्तिकरण के माध्यम से संरचनात्मक सुधारों की सिफारिश की गई है। साथ ही, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की निगरानी के लिए स्वतंत्र राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण (SSSAs) स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया है।
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निष्कर्ष:
भारत ने स्कूल शिक्षा में पहुँच और अवसंरचना के विस्तार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, सीखने के परिणामों में सुधार, माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट कम करना तथा डिजिटल पहुँच में समानता सुनिश्चित करना अभी भी बड़ी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। नीति आयोग द्वारा प्रस्तावित यह रोडमैप भारत की स्कूल शिक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी, प्रभावी और गुणवत्ता-आधारित ढाँचे में परिवर्तित करने का लक्ष्य रखता है, जो विकसित भारत @2047 के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है।

