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Blog / 19 Sep 2026

CBFC की नई फिल्म प्रमाणन के नए दिशानिर्देश 2026

संदर्भ:

हाल ही में, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B) ने सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों के प्रमाणन हेतु संशोधित दिशानिर्देश (Guidelines for Certification of Films for Public Exhibition) अधिसूचित किए हैं। संशोधित दिशानिर्देशों में मुख्य रूप से 1991 के फिल्म प्रमाणन दिशानिर्देशों के विस्तृत ढाँचे को बरकरार रखा गया है। हालांकि, इसमें मादक पदार्थों और आयु-आधारित UA प्रमाणन संकेतकों से संबंधित दो महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़े गए हैं।

फिल्म प्रमाणन क्या है?

      • फिल्म प्रमाणन वह वैधानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत भारत में फिल्मों को सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले जाँचा जाता है।
      • केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है और यह सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत कार्य करता है। भारत में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए बनाई गई फिल्म के लिए CBFC से प्रमाणन प्राप्त करना आवश्यक है।

कानूनी ढाँचा:

फिल्म प्रमाणन की व्यवस्था मुख्य रूप से निम्नलिखित पर आधारित है:

      • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952
      • सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024
      • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 5B के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देश।
      • राष्ट्रीय प्रतीकों, बच्चों की सुरक्षा, अश्लीलता, तंबाकू और पशु क्रूरता जैसे मुद्दों से संबंधित प्रासंगिक कानून।

CBFC New Guidelines: UA 7+, UA 13+ and UA 16+

2026 के दिशानिर्देशों में दो प्रमुख बदलाव:

      • मादक पदार्थों पर अनिवार्य चेतावनी
        • मादक दवाओं या मन:प्रभावी पदार्थों (Psychotropic Substances) के उपयोग, सेवन या तस्करी को दर्शाने वाले या उनसे संबंधित दृश्यों में एक अस्वीकरण/वैधानिक चेतावनी देना अनिवार्य होगा।
        • यह दिशानिर्देश फिल्मों में मादक पदार्थों के चित्रण पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाता। इसके बजाय, संबंधित दृश्यों के लिए एक विशिष्ट चेतावनी की आवश्यकता निर्धारित करता है।
      • नए आयु-आधारित UA संकेतक
        • संशोधित दिशानिर्देशों में सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024 के तहत शुरू की गई आयु-आधारित UA श्रेणियों को शामिल किया गया है:
        • UA 7+
        • UA 13+
        • UA 16+
        • इन संकेतकों का अर्थ है कि फिल्म को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जा सकता है, लेकिन निर्धारित आयु से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता या अभिभावकों को विवेकपूर्ण निर्णय लेना चाहिए।

फिल्म प्रमाणन के प्रमुख सिद्धांत:

संशोधित दिशानिर्देशों में 1991 के ढाँचे के कई प्रमुख सिद्धांतों को बरकरार रखा गया है।

      • हिंसा/अपराध का महिमामंडन नहीं: असामाजिक गतिविधियों, हिंसा, आपराधिक तरीकों और शराब के सेवन को महिमामंडित या प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए।
      • बच्चों की सुरक्षा: बच्चों को हिंसा या बाल शोषण का सामना करते हुए या उसे देखते हुए दिखाने से, जहाँ तक संभव हो, अनावश्यक रूप से बचना चाहिए।
      • मानवीय गरिमा: अश्लीलता, महिलाओं का अपमानजनक चित्रण, दिव्यांग व्यक्तियों का उपहास, पशु क्रूरता तथा समुदायों का अपमानजनक चित्रण रोकने पर जोर दिया गया है।
      • यौन हिंसा: ऐसे दृश्यों से बचना चाहिए। जहाँ उनका चित्रण आवश्यक हो, उन्हें न्यूनतम और गैर-ग्राफिक रखा जाना चाहिए।

सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 5B के बारे में:

      • धारा 5B के अनुसार, किसी फिल्म को प्रमाणित नहीं किया जाएगा, यदि वह अन्य बातों के साथ निम्नलिखित के विरुद्ध मानी जाती है:
        • भारत की संप्रभुता और अखंडता
        • राज्य की सुरक्षा
        • विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध
        • लोक व्यवस्था
        • शिष्टता या नैतिकता
      • इसमें मानहानि, न्यायालय की अवमानना और किसी अपराध के लिए उकसाने की संभावना जैसे विषय भी शामिल हैं।
      • इस प्रकार, धारा 5B फिल्म प्रमाणन से संबंधित दिशानिर्देशों का प्रमुख वैधानिक आधार प्रदान करती है।

प्रमाणन की श्रेणियाँ:

2024 के नियमों के माध्यम से लागू वर्तमान आयु-आधारित व्यवस्था के तहत प्रमुख श्रेणियाँ निम्नलिखित हैं:

श्रेणी

अर्थ

U

सभी के लिए अप्रतिबंधित सार्वजनिक प्रदर्शन

UA 7+

अप्रतिबंधित प्रदर्शन, लेकिन 7 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सावधानी आवश्यक

UA 13+

अप्रतिबंधित प्रदर्शन, लेकिन 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सावधानी आवश्यक

UA 16+

अप्रतिबंधित प्रदर्शन, लेकिन 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सावधानी आवश्यक

A

केवल वयस्कों के लिए प्रतिबंधित प्रदर्शन

पहले की व्यापक UA श्रेणी को अब UA 7+, UA 13+ और UA 16+ में विभाजित किया गया है। इन आयु संकेतकों का उद्देश्य माता-पिता/अभिभावकों को मार्गदर्शन देना है, न कि कम उम्र के बच्चों के लिए UA प्रमाणित फिल्मों को देखने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना।

महत्त्व:

संशोधित ढाँचा:

      • 1991 के प्रमाणन सिद्धांतों को बनाए रखता है।
      • माता-पिता के लिए अधिक स्पष्ट आयु-आधारित मार्गदर्शन प्रदान करता है।
      • मादक पदार्थों के विरुद्ध एक विशिष्ट चेतावनी जोड़ता है।
      • कलात्मक स्वतंत्रता तथा लोक व्यवस्था, शिष्टता और बाल संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है।
      • ई-सिनेप्रमाण (e-Cinepramaan) के माध्यम से डिजिटल प्रमाणन की दिशा में जारी बदलाव को आगे बढ़ाता है।

निष्कर्ष:

2026 के दिशानिर्देशों में मौजूदा फिल्म प्रमाणन व्यवस्था को काफी हद तक बनाए रखते हुए मादक पदार्थों से संबंधित चेतावनियों और आयु-आधारित UA वर्गीकरण को शामिल किया गया है। केंद्रीय नियामकीय चुनौती अब भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बाल संरक्षण, लोक व्यवस्था तथा संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य हितों के बीच संतुलन स्थापित करना है।

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