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Blog / 27 Jun 2026

नेत्र एइवीएंडसी (Netra AEW&C): भारत की स्वदेशी हवाई निगरानी प्रणाली

चर्चा मे क्यों? 

भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता और रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी नेत्र एयरबॉर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) प्रणाली को अंतिम परिचालन मंजूरी (Final Operational Clearance - FOC) दे दी गई है। बेंगलुरु स्थित रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की प्रयोगशाला, सेंटर फॉर एयरबॉर्न सिस्टम्स (CABS) द्वारा विकसित यह प्रणाली भारत की हवाई और समुद्री निगरानी क्षमताओं में एक बड़ी उपलब्धि है।

तकनीकी विशिष्टताएँ:

नेत्र प्रणाली को ब्राजीलियाई एम्ब्रेयर EMB-145I (Embraer EMB-145I) विमान प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया गया है। यह अत्याधुनिक मिशन उपकरणों के एक परिष्कृत सूट से लैस है, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

    • एइसा रडार (AESA Radar): सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किया गया ऐरे रडार, जो 240 डिग्री कवरेज प्रदान करता है।
    • आईएफएफ (IFF): 'मित्र या दुश्मन की पहचान' करने वाली उन्नत प्रणाली।
    • मिशन कंप्यूटर: वास्तविक समय में डेटा प्रोसेसिंग और त्वरित निर्णय लेने के लिए।
    • सुरक्षित संचार नेटवर्क: डेटालिंक और उपग्रह संचार (SATCOM) के माध्यम से सुरक्षित सूचना साझाकरण।
    • ईएसएम और सीएसएम: इलेक्ट्रॉनिक सहायता उपाय (ESM) और संचार सहायता उपाय (CSM), जो दुश्मन के सिग्नलों को इंटरसेप्ट करने में सक्षम हैं।

यह प्रणाली हवा और समुद्र दोनों में लक्ष्यों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और उनकी पहचान करने में सक्षम है, जिससे भारतीय वायुसेना (IAF) की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमताओं को मजबूती मिलती है।

पृष्ठभूमि: 

नेत्र ने भारतीय वायु सेना के लिए एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' (क्षमता वर्धक) के रूप में खुद को साबित किया है। इसकी परिचालन प्रभावशीलता को दो प्रमुख सैन्य अभियानों में देखा गया है:

1.   2019 बालाकोट एयरस्ट्राइक: इस ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई के दौरान नेत्र ने पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र की निगरानी करने और भारतीय लड़ाकू विमानों को सटीक दिशा-निर्देश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

2.   ऑपरेशन सिंदूर: पिछले वर्ष (2025) आयोजित इस ऑपरेशन में भी नेत्र ने चीनी व शत्रु प्रौद्योगिकियों को बेअसर करने में और अग्रिम मोर्चे पर कमांड और कंट्रोल सेंटर के रूप में काम किया।

इस तकनीक के सफल विकास के साथ ही भारत दुनिया का पांचवां ऐसा देश बन गया है, जिसके पास अपनी स्वदेशी AEW&C क्षमता है।

चीन की अवाक्स (AWACS) क्षमता से तुलना:

हवाई निगरानी के क्षेत्र में भारत और चीन के बीच एक बड़ा संख्यात्मक और तकनीकी अंतर (Capability Gap) मौजूद है:

    • संख्यात्मक असंतुलन: भारतीय वायुसेना (IAF) के पास वर्तमान में केवल 6 हवाई निगरानी विमान हैं (3 स्वदेशी नेत्र और 3 इजरायली फॉल्कन अवाक्स)। इसके विपरीत, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स (PLAAF - चीन) के पास 30 से अधिक अत्याधुनिक अवाक्स प्रणालियाँ हैं, जिनमें KJ-2000, KJ-200, KJ-500 और अगली पीढ़ी के KJ-3000 शामिल हैं।
    • तकनीकी अंतर और रडार रेंज: चीन का प्राथमिक निगरानी विमान KJ-500 और नया KJ-3000 फिक्स्ड त्रि-आयामी (Triangular) एइसा रडार का उपयोग करते हैं, जो बिना किसी ब्लाइंड स्पॉट के 360-डिग्री निरंतर कवरेज प्रदान करते हैं। वर्तमान 'नेत्र' (Mk-1) की रेंज लगभग 200-250 किमी है और इसका कवरेज केवल 240-डिग्री है, जिसका अर्थ है कि इसके पिछले हिस्से में ब्लाइंड स्पॉट रहता है।
    • थिएटर प्रभुत्व: अपनी विशाल फ्लीट के दम पर चीन तिब्बत (LACC), ताइवान जलडमरूमध्य, और दक्षिण चीन सागर जैसे कई मोर्चों पर चौबीसों घंटे (24/7) निरंतर हवाई निगरानी बनाए रखने में सक्षम है, जबकि भारत को दोहरे मोर्चे (चीन-पाक) पर निरंतर कवरेज के लिए कम से कम 18 विमानों की आवश्यकता है।

भू-राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव:

    • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन: हिंद महासागर और व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए स्वदेशी नेत्र भारत की समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) को बढ़ाता है। यह भारत को इस क्षेत्र में एक 'नेट सुरक्षा प्रदाता' (Net Security Provider) के रूप में स्थापित करने में मदद करता है।
    • पाकिस्तान पर तकनीकी बढ़त: पाकिस्तान के पास वर्तमान में 11 स्वदेशी/विदेशी अवाक्स प्रणालियाँ (जैसे स्वीडिश Saab-2000 Erieye और चीनी ZDK-03) हैं। नेत्र की FOC और पूर्ण युद्ध-तैनाती (Combat Readiness) ने बालाकोट के बाद भारत की हवाई निवारक क्षमता (Air Deterrence) को मजबूत किया है, जिससे पाकिस्तान द्वारा किसी भी औचक हवाई दुस्साहस का त्वरित जवाब दिया जा सकता है।
    • सामरिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy): युद्ध जैसी स्थितियों में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं (जैसे इजरायल या रूस) पर निर्भरता को कम करके, भारत बिना किसी बाहरी दबाव के स्वतंत्र निर्णय ले सकता है।

 निष्कर्ष:

संख्या के अंतराल को पाटने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लगभग ₹19,000 करोड़ की लागत से नेत्र Mk-2 परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत एयर इंडिया से प्राप्त 6 एयरबस A321 (Airbus A321) विमानों पर बड़े स्वदेशी एइसा रडार लगाए जा रहे हैं, जो 500 किमी से अधिक रेंज और बेहतर कवरेज प्रदान करेंगे। इस क्षेत्र में भारत को अभी भी रडार और विमान प्लेटफार्मों के लिए आंशिक रूप से विदेशी कलपुर्जों (जैसे ब्राजील का विमान) पर निर्भर रहना पड़ता है। पूर्ण आत्मनिर्भरता के लिए विमान इंजन और लड़ाकू विमान प्लेटफार्मों का पूर्ण स्वदेशीकरण आवश्यक है।

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