संदर्भ:
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) लगातार चौथे महीने नकारात्मक रहा। इस अवधि में एफडीआई का बहिर्वाह, अंतर्वाह से लगभग 446 मिलियन अमेरिकी डॉलर अधिक रहा। शुद्ध एफडीआई का तात्पर्य कुल एफडीआई अंतर्वाह और एफडीआई बहिर्वाह (जिसमें लाभ की वापसी तथा विदेशों में किए गए निवेश शामिल हैं) के बीच के अंतर से है। यदि शुद्ध एफडीआई लगातार नकारात्मक बना रहता है, तो यह संकेत देता है कि देश में दीर्घकालिक उत्पादक निवेश के रूप में आने वाली पूंजी की तुलना में अधिक पूंजी बाहर जा रही है।
एफडीआई क्या है?
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- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वह दीर्घकालिक निवेश है, जिसमें कोई विदेशी इकाई किसी अन्य देश के व्यवसाय या उत्पादक परिसंपत्ति में निवेश करती है और सामान्यतः उसमें पर्याप्त स्वामित्व या नियंत्रण रखती है। यह निवेश नए उद्योगों की स्थापना (ग्रीनफील्ड), अधिग्रहण या संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से किया जा सकता है।
- एफडीआई को अल्पकालिक पोर्टफोलियो निवेश से अलग माना जाता है, क्योंकि इसमें लंबे समय की प्रतिबद्धता होती है और प्रबंधन से जुड़े निर्णयों में प्रत्यक्ष भागीदारी रहती है।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वह दीर्घकालिक निवेश है, जिसमें कोई विदेशी इकाई किसी अन्य देश के व्यवसाय या उत्पादक परिसंपत्ति में निवेश करती है और सामान्यतः उसमें पर्याप्त स्वामित्व या नियंत्रण रखती है। यह निवेश नए उद्योगों की स्थापना (ग्रीनफील्ड), अधिग्रहण या संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से किया जा सकता है।
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एफडीआई का महत्व:
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- एफडीआई आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेषकर भारत जैसे विकासशील देशों के लिए:
- पूंजी निर्माण और आर्थिक वृद्धि: एफडीआई के माध्यम से देश में दीर्घकालिक पूंजी का प्रवाह होता है, जो घरेलू बचत को पूरक बनाकर अवसंरचना, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देता है।
- रोज़गार सृजन: विदेशी कंपनियों के प्रवेश से विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं, जिससे बेरोज़गारी में कमी आती है और आय स्तर में वृद्धि होती है।
- प्रौद्योगिकी और ज्ञान का हस्तांतरण: विदेशी निवेशक उन्नत तकनीक, आधुनिक प्रबंधन कौशल और वैश्विक श्रेष्ठ प्रथाएँ लाते हैं, जिससे उत्पादकता और नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है।
- निर्यात और बाज़ार तक पहुँच में वृद्धि: एफडीआई से वैश्विक बाज़ारों के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ती है और घरेलू कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय मूल्य शृंखलाओं से जुड़ पाती हैं।
- अवसंरचना में सुधार: एफडीआई से वित्तपोषित परियोजनाएँ परिवहन, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसी अवसंरचना के विकास में योगदान देती हैं।
- विदेशी मुद्रा और भुगतान संतुलन: विदेशी पूंजी के आगमन से भुगतान संतुलन की स्थिति सुदृढ़ होती है और विनिमय दरों में स्थिरता आती है।
- पूंजी निर्माण और आर्थिक वृद्धि: एफडीआई के माध्यम से देश में दीर्घकालिक पूंजी का प्रवाह होता है, जो घरेलू बचत को पूरक बनाकर अवसंरचना, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देता है।
- विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में एफडीआई औद्योगिक विविधीकरण, प्रतिस्पर्धी बाज़ार के निर्माण तथा प्रशिक्षण और कौशल विकास के माध्यम से मानव पूंजी को मजबूत करने में भी सहायक होता है।
- एफडीआई आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, विशेषकर भारत जैसे विकासशील देशों के लिए:
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शुद्ध एफडीआई नकारात्मक क्यों हुआ?
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- हाल के महीनों में भारत में शुद्ध एफडीआई के नकारात्मक रहने के पीछे कई प्रमुख कारण रहे हैं:
- लाभ वापसी और निवेश से बाहर निकलना: विदेशी कंपनियों द्वारा अर्जित लाभ की वापसी या निवेश की बिक्री से निवेश निकासी (Outflow) बढ़ जाता है, जिससे शुद्ध एफडीआई नकारात्मक हो जाता है।
- भारतीय कंपनियों का विदेशों में निवेश: भारतीय कंपनियों द्वारा रणनीतिक रूप से विदेशों में किए गए निवेश भी कुल निवेश निकासी को बढ़ाते हैं।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता: अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियाँ, मुद्रा विनिमय में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों के निर्णयों को प्रभावित करते हैं, जिसका असर एफडीआई के अंतर्वाह और निवेश निकासी दोनों पर पड़ता है।
- लाभ वापसी और निवेश से बाहर निकलना: विदेशी कंपनियों द्वारा अर्जित लाभ की वापसी या निवेश की बिक्री से निवेश निकासी (Outflow) बढ़ जाता है, जिससे शुद्ध एफडीआई नकारात्मक हो जाता है।
- हाल के महीनों में भारत में शुद्ध एफडीआई के नकारात्मक रहने के पीछे कई प्रमुख कारण रहे हैं:
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निष्कर्ष:
नवंबर 2025 में अधिक निवेश निकासी के कारण शुद्ध एफडीआई नकारात्मक रहा, किंतु समग्र रुझान यह दर्शाते हैं कि कुल एफडीआई निवेश प्रवाह अब भी अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है और संचयी शुद्ध निवेश में वृद्धि दर्ज की गई है। एफडीआई आज भी आर्थिक विस्तार, प्रौद्योगिकी अधिग्रहण और रोज़गार सृजन का एक प्रमुख आधार है। विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने, अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित रणनीतिक नीतियों के माध्यम से भारत एफडीआई का उपयोग दीर्घकालिक और समावेशी विकास के लिए प्रभावी रूप से कर सकता है।

