चर्चा में क्यों?
हाल ही में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एनसीबी (NCB) वार्षिक रिपोर्ट 2025 तथा ड्रग कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट (2026–2029) को एनसीओआरडी (NCORD) फ्रेमवर्क के अंतर्गत जारी किया।
एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट 2025 की प्रमुख विशेषताएँ:
रिकॉर्ड स्तर की प्रवर्तन कार्रवाई
भारत में वर्ष 2021–2025 के दौरान मादक पदार्थों से संबंधित गिरफ्तारियों की संख्या पाँच वर्षों में सबसे अधिक दर्ज की गई।
• वर्ष 2025 में 1,83,675 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या 1,22,224 थी।
• 810 निवारक निरोध (Preventive Detention) आदेश जारी किए गए, जबकि वर्ष 2024 में इनकी संख्या 531 थी।
यह खुफिया जानकारी आधारित प्रवर्तन तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को दर्शाता है।
डिजिटल माध्यमों से मादक पदार्थों की तस्करी में वृद्धि
टेलीग्राम, व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग मादक पदार्थों की तस्करी के लिए तेजी से किया जा रहा है।
• टेलीग्राम मादक पदार्थों के विज्ञापन और समन्वय का एक प्रमुख प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है।
यह दर्शाता है कि मादक पदार्थों का अवैध व्यापार अब पारंपरिक भौतिक नेटवर्क से साइबर-सक्षम नेटवर्क की ओर बढ़ रहा है।
अफीम का प्रमुख स्रोत बना म्यांमार
म्यांमार ने अवैध अफीम के प्रमुख स्रोत के रूप में अफगानिस्तान को पीछे छोड़ दिया है।
• म्यांमार से पूर्वोत्तर भारत तक एक प्रमुख तस्करी गलियारा (Trafficking Corridor) सक्रिय है।
• मादक पदार्थों का व्यापार हथियारों की तस्करी तथा उग्रवादी संगठनों के वित्तपोषण से भी जुड़ा हुआ है।
यह भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
अवैध खेती का बड़े पैमाने पर विनाश
• नष्ट की गई अफीम (पोस्ता) की खेती: 42,282 एकड़ (2025) जबकि वर्ष 2024 में 22,512 एकड़।
• नष्ट की गई कैनाबिस (भांग/गांजा) की खेती: 38,193 एकड़, जबकि वर्ष 2024 में 34,018 एकड़।
यह आपूर्ति पक्ष (Supply-side) पर नियंत्रण के प्रयासों में तीव्रता को दर्शाता है।
सिंथेटिक मादक पदार्थों का उभरता खतरा
• वैश्विक स्तर पर जब्त किए गए मादक पदार्थों में मेथामफेटामाइन और एमफेटामाइन का प्रभुत्व है।
• नया खतरा: निटाजेन्स (Nitazenes), जो ऐसे सिंथेटिक ओपिओइड हैं जो हेरोइन से 500 गुना अधिक शक्तिशाली हो सकते हैं।
• इनके प्रमुख उत्पादन केंद्रों में म्यांमार, मेक्सिको, अफगानिस्तान और यूरोप शामिल हैं।
ड्रग कंट्रोल विज़न डॉक्यूमेंट (2026–2029) के बारे में:
यह दस्तावेज़ विकसित भारत 2047 के अनुरूप "नशा मुक्त भारत" के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है तथा यह चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:
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- प्रवर्तन, खुफिया जानकारी एवं संचालन: मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लक्षित कार्रवाई।
- प्रीकर्सर एवं सिंथेटिक मादक पदार्थों पर नियंत्रण: रसायनों तथा उत्पादन स्तर पर ही मादक पदार्थों को रोकना।
- मांग में कमी एवं हानि नियंत्रण: जन-जागरूकता, पुनर्वास तथा समुदाय आधारित रोकथाम।
- क्षमता निर्माण एवं समन्वय: संस्थागत क्षमता, डेटा प्रणाली तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना।
- प्रवर्तन, खुफिया जानकारी एवं संचालन: मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लक्षित कार्रवाई।
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गोल्डन ट्रायंगल और गोल्डन क्रेसेंट:
• गोल्डन क्रेसेंट: ईरान–अफगानिस्तान–पाकिस्तान क्षेत्र, जो अफीम का प्रमुख स्रोत है।
• गोल्डन ट्रायंगल: म्यांमार–थाईलैंड–लाओस क्षेत्र, जो मादक पदार्थों के उत्पादन का प्रमुख केंद्र है।
भारत इन दोनों क्षेत्रों के बीच स्थित है, जिससे यह मादक पदार्थों की तस्करी और आवागमन (Transit Trafficking) के प्रति अधिक संवेदनशील बन जाता है। वैश्विक मादक पदार्थों के प्रभाव के कारण इन क्षेत्रों को कभी-कभी "डेथ क्रेसेंट" तथा "डेथ ट्रायंगल" भी कहा जाता है।
भारत में मादक पदार्थ नियंत्रण का कानूनी ढाँचा:
संवैधानिक आधार
भारत की मादक पदार्थ नीति अनुच्छेद 47 पर आधारित है, जो राज्य को औषधीय उपयोग को छोड़कर नशीले पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने तथा जनस्वास्थ्य में सुधार करने का निर्देश देता है।
एनडीपीएस अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985):
स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act, 1985) भारत में मादक पदार्थों से संबंधित प्रमुख कानून है। यह:
• मादक पदार्थों की खेती, उत्पादन, बिक्री, कब्जा एवं परिवहन पर प्रतिबंध लगाता है।
• चिकित्सा एवं वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए विनियमित उपयोग की अनुमति देता है।
• संयुक्त राष्ट्र के मादक पदार्थ संबंधी अभिसमयों (UN Drug Conventions) को लागू करता है।
वर्गीकरण:
• नार्कोटिक ड्रग्स (Narcotic Drugs): अफीम, कोका, कैनाबिस से प्राप्त पदार्थ।
• मनोप्रभावी पदार्थ (Psychotropic Substances): एलएसडी (LSD), एमडीएमए (MDMA), सेडेटिव्स।
• नियंत्रित पदार्थ (Controlled Substances): प्रीकर्सर रसायन।
कैनाबिस अपवाद: भांग (Bhang) का विनियमन एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत नहीं, बल्कि राज्य सरकारों के कानूनों के अंतर्गत किया जाता है।
दंड एवं जमानत:
सजा मादक पदार्थ की मात्रा पर निर्भर करती है:
• कम मात्रा (Small Quantity): अधिकतम 1 वर्ष।
• मध्यम मात्रा (Intermediate Quantity): अधिकतम 10 वर्ष।
• व्यावसायिक मात्रा (Commercial Quantity): 10–20 वर्ष का कारावास तथा भारी जुर्माना; पुनरावृत्ति की स्थिति में मृत्युदंड तक का प्रावधान।
व्यावसायिक मात्रा से जुड़े मामलों में जमानत प्राप्त करना अत्यंत कठिन है।
निष्कर्ष:
एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट 2025 भारत के समक्ष मादक पदार्थों की बदलती चुनौती को रेखांकित करती है, जिसमें पारंपरिक तस्करी मार्गों से आगे बढ़कर डिजिटल तस्करी नेटवर्क और सिंथेटिक मादक पदार्थों का खतरा प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया है। वहीं, विज़न डॉक्यूमेंट 2026–29 प्रवर्तन, रोकथाम और पुनर्वास को एकीकृत करते हुए नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करता है।
