संदर्भ:
हाल ही में केंद्र सरकार ने राज्यसभा को बताया कि हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत किए गए एक नए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में पूरे देश में कोई भी मैनुअल स्कैवेंजिंग का मामला नहीं पाया गया।
मैनुअल स्कैवेंजिंग क्या है?
मैनुअल स्कैवेंजिंग से आशय सूखे शौचालयों, खुले नालों, रेलवे पटरियों, सीवरों या सेप्टिक टैंकों से मानव मल को बाल्टी, टोकरी और झाड़ू जैसे साधारण उपकरणों की सहायता से हाथ से साफ करने, उठाने, ढोने, निपटान करने या संभालने की प्रथा से है।
प्रमुख निष्कर्ष:
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- सर्वेक्षण में एमएस अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत कोई भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं पाया गया। हालांकि, NAMASTE योजना के अंतर्गत 89,915 सीवर एवं सेप्टिक टैंक श्रमिकों (SSWs) का सत्यापन किया गया है।
- सरकार ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) किट, व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण, आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ERSUs) के लिए सुरक्षा उपकरण तथा सीवर एवं सेप्टिक टैंकों की मशीनी सफाई के उपकरण उपलब्ध कराकर मशीनीकरण का विस्तार किया है।
- सर्वेक्षण में एमएस अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत कोई भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं पाया गया। हालांकि, NAMASTE योजना के अंतर्गत 89,915 सीवर एवं सेप्टिक टैंक श्रमिकों (SSWs) का सत्यापन किया गया है।
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कानूनी एवं संवैधानिक ढांचा:
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- मैनुअल स्कैवेंजिंग संविधान के अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन) तथा अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन का अधिकार) का उल्लंघन करती है। हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन तथा सूखे शौचालयों के निर्माण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1993 ने सबसे पहले मैनुअल स्कैवेंजिंग और सूखे शौचालयों पर प्रतिबंध लगाया।
- इसे हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम (PEMSR), 2013 द्वारा और अधिक सशक्त बनाया गया, जिसने प्रतिबंध का विस्तार सीवरों और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई तक किया, चिन्हित श्रमिकों के पुनर्वास को अनिवार्य बनाया तथा अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती घोषित किया। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 भी अनुसूचित जातियों से संबंधित मैनुअल स्कैवेंजरों को नियोजित करने पर दंड का प्रावधान करता है।
- मैनुअल स्कैवेंजिंग संविधान के अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन) तथा अनुच्छेद 21 (गरिमा के साथ जीवन का अधिकार) का उल्लंघन करती है। हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन तथा सूखे शौचालयों के निर्माण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1993 ने सबसे पहले मैनुअल स्कैवेंजिंग और सूखे शौचालयों पर प्रतिबंध लगाया।
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सरकारी पहल:
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- NAMASTE योजना, जिसका संयुक्त रूप से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वयन किया जाता है, स्वच्छता कार्यों के पूर्ण मशीनीकरण, व्यावसायिक सुरक्षा, कौशल विकास, आजीविका सहायता तथा सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देती है।
- मैनुअल स्कैवेंजरों के पुनर्वास हेतु स्वरोजगार योजना (SRMS) पूर्व मैनुअल स्कैवेंजरों को कौशल प्रशिक्षण, रियायती ऋण तथा पुनर्वास सहायता प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, स्वच्छ भारत मिशन–शहरी 2.0 अपने उपयोगित जल प्रबंधन (Used Water Management) घटक के अंतर्गत सीवर और सेप्टिक टैंकों की मशीनी सफाई को प्रोत्साहित करता है ताकि खतरनाक मैनुअल प्रवेश को समाप्त किया जा सके।
- NAMASTE योजना, जिसका संयुक्त रूप से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वयन किया जाता है, स्वच्छता कार्यों के पूर्ण मशीनीकरण, व्यावसायिक सुरक्षा, कौशल विकास, आजीविका सहायता तथा सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देती है।
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महत्त्व:
यह सर्वेक्षण खतरनाक मैनुअल स्कैवेंजिंग को सुरक्षित एवं मशीनीकृत स्वच्छता व्यवस्था से प्रतिस्थापित करने पर सरकार के जोर को दर्शाता है। इसका उद्देश्य श्रमिकों की गरिमा, व्यावसायिक सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाना, साथ ही शहरी स्वच्छता प्रणालियों को सुदृढ़ करना तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करना है।
निष्कर्ष:
यद्यपि राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में कोई भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं पाया गया, फिर भी सीवरों में होने वाली मौतों और क्रियान्वयन संबंधी कमियों का बने रहना यह संकेत देता है कि यह चुनौती अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। मैनुअल स्कैवेंजिंग के पूर्ण उन्मूलन के लिए कानून का सख्ती से पालन, स्वच्छता कार्यों का सार्वभौमिक मशीनीकरण, NAMASTE और SRMS जैसी योजनाओं के माध्यम से पुनर्वास, तकनीकी नवाचार तथा जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं, ताकि स्वच्छता कर्मियों की गरिमा, सुरक्षा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

