होम > Blog

Blog / 25 Feb 2026

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 (National Monetisation Pipeline 2.0) का शुभारंभ किया है। यह मुद्रीकरण कार्यक्रम का दूसरा चरण है, जिसका उद्देश्य राजकोषीय बोझ बढ़ाए सरकारी बिना संपत्तियों के मूल्य का प्रभावी उपयोग कर निवेश जुटाना है। इसे नीति आयोग ने अवसंरचना से जुड़े विभिन्न मंत्रालयों के परामर्श से तैयार किया है। राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0, केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना 2025–30 के अनुरूप है।

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 के बारे में:

      • राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन एक सुव्यवस्थित नीति ढांचा है, जिसके माध्यम से सार्वजनिक संपत्तियों (ब्राउनफील्ड अवसंरचना) में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित कर संसाधन जुटाए जाते हैं। इन परिसंपत्तियों का स्वामित्व सरकार के पास ही बना रहता है, लेकिन उनके संचालन अथवा उपयोग से प्राप्त आय को नई और उत्पादक अवसंरचना परियोजनाओं में पुनर्निवेश किया जाता है।
      • राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 के तहत सरकार ने वित्त वर्ष 2026 से 2030 के बीच ₹16.72 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत 12 प्रमुख क्षेत्रोंजैसे राजमार्ग, रेलवे, विद्युत, बंदरगाह, कोयला और खननकी 2,000 से अधिक परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण किया जाएगा। इस अनुमानित राशि में लगभग ₹5.8 लाख करोड़ का संभावित निजी निवेश भी शामिल है।

महत्त्व:

      • राजकोषीय बोझ के बिना अवसंरचना वित्तपोषण को बढ़ावा: राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 पूंजीगत परियोजनाओं के लिए प्रत्यक्ष बजटीय व्यय पर निर्भरता को कम करता है। मौजूदा परिसंपत्तियों के पुनर्चक्रण के माध्यम से नए संसाधन उत्पन्न होते हैं, जिससे राजकोषीय घाटे पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।
      • निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन: विभिन्न मुद्रीकरण मॉडलों के जरिए निजी पूंजी को अवसंरचना क्षेत्र में आमंत्रित किया जाता है। इससे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) व्यवस्था सुदृढ़ होती है, दीर्घकालिक निवेश प्रवाह बढ़ता है तथा परिसंपत्तियों के संचालन में दक्षता और पारदर्शिता आती है।
      • संभावित गुणक प्रभाव: अनुमानों के अनुसार, राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 के अंतर्गत परिसंपत्ति मुद्रीकरण से अगले 5–10 वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। नए पूंजीगत व्यय और आर्थिक गतिविधियों के परिणामस्वरूप निवेश गुणक प्रभाव के माध्यम से भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग ₹40 लाख करोड़ तक का अतिरिक्त योगदान हो सकता है।
      • राष्ट्रीय अवसंरचना लक्ष्यों के साथ सामंजस्य: यह पहल भारत की व्यापक अवसंरचना विकास रणनीति और दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टि के अनुरूप है। इससे संपर्क-सुविधा, ऊर्जा परिवर्तन, लॉजिस्टिक्स दक्षता और शहरी विकास को गति मिलेगी।

चुनौतियाँ और आलोचनाएँ:

      • क्रियान्वयन संबंधी जोखिम: इतनी बड़ी और विविध परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण का लक्ष्य प्रभावी कार्यान्वयन, स्पष्ट नियामक ढांचे, अनुकूल बाजार परिस्थितियों और निवेशकों के विश्वास पर निर्भर करता है।
      • मूल्यांकन और मूल्य निर्धारण की जटिलता: सार्वजनिक परिसंपत्तियों का यथार्थ एवं पारदर्शी मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक है, ताकि राष्ट्र को उचित आर्थिक लाभ प्राप्त हो और सार्वजनिक हित सुरक्षित रहे।
      • सामाजिक और रणनीतिक चिंताएँ: महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील क्षेत्रों में निजी भागीदारी की सीमा को लेकर बहस जारी है। साथ ही यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सेवाओं की निरंतरता बनी रहे और आम नागरिकों के हितों की रक्षा हो।

निष्कर्ष:

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन 2.0 भारत की मौजूदा अवसंरचना परिसंपत्तियों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से भविष्य के विकास के लिए वित्त जुटाने की एक महत्त्वपूर्ण नीति पहल है। वित्त वर्ष 2030 तक ₹16.72 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य यह दर्शाता है कि सरकार परिसंपत्ति पुनर्चक्रण, बाजार भागीदारी और पूंजी संचयन के जरिए अवसंरचना विकास को तीव्र गति देना चाहती है, साथ ही राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है।