संदर्भ:
हाल ही में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) ने वर्ष 2023–24 के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) जारी किया है। इस सर्वेक्षण में देश के 715 जिलों और लगभग 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -6 के बारे में:
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- NFHS-6 एक व्यापक एवं बहु-चरणीय सर्वेक्षण है, जिसका उद्देश्य भारत में स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े प्रमुख संकेतकों का आकलन करना है। इसके माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रजनन दर, पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य बीमा कवरेज तथा डिजिटल समावेशन से संबंधित प्रवृत्तियों का अध्ययन किया जाता है।
- यह सर्वेक्षण अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS), मुंबई द्वारा आयोजित किया जाता है और इसे भारत का सबसे व्यापक स्वास्थ्य एवं जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण माना जाता है। यह जनसंख्या, स्वास्थ्य, पोषण तथा परिवार कल्याण से संबंधित जिला-स्तरीय आँकड़े उपलब्ध कराता है और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण तथा सतत विकास लक्ष्य (SDGs) की प्रगति की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह सर्वेक्षण प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रदर्शन के मूल्यांकन तथा स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और परिणामों में क्षेत्रीय असमानताओं की पहचान के लिए एक मानक (Benchmark) का कार्य करता है।
- NFHS-6 एक व्यापक एवं बहु-चरणीय सर्वेक्षण है, जिसका उद्देश्य भारत में स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े प्रमुख संकेतकों का आकलन करना है। इसके माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रजनन दर, पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य बीमा कवरेज तथा डिजिटल समावेशन से संबंधित प्रवृत्तियों का अध्ययन किया जाता है।
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सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष:
मातृ स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार
सर्वेक्षण के अनुसार मातृ स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
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- संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries) बढ़कर 90.6% हो गए हैं।
- प्रसवपूर्व देखभाल (Antenatal Care) का कवरेज 95.9% तक पहुँच गया है।
- गर्भावस्था का प्रारंभिक पंजीकरण तथा नियमित स्वास्थ्य जांच में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries) बढ़कर 90.6% हो गए हैं।
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ये उपलब्धियाँ स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुँच और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती हैं।
बाल स्वास्थ्य एवं पोषण में सुधार
NFHS-6 के अनुसार बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी संकेतकों में भी सकारात्मक प्रगति हुई है।
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- बच्चों में ठिगनापन (Stunting) 35.5% से घटकर 29.3% हो गया।
- गंभीर क्षीणता (Severe Wasting) 7.7% से घटकर 5.2% रह गई।
- पूर्ण टीकाकरण कवरेज बढ़कर 87.1% हो गया।
- रोटावायरस वैक्सीन कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि होकर 85.4% तक पहुँच गई।
- बच्चों में ठिगनापन (Stunting) 35.5% से घटकर 29.3% हो गया।
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ये सुधार बाल स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन को दर्शाते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच एवं सामाजिक सुरक्षा
स्वास्थ्य सेवाओं और वित्तीय सुरक्षा तक पहुँच में भी महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है।
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- स्वास्थ्य बीमा कवरेज 41% से बढ़कर 60.2% हो गया है।
- इसमें आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य (PM-JAY) जैसी योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
- बच्चों के 95.6% टीकाकरण सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से किए गए।
- महिलाओं के इंटरनेट उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 33.3% से बढ़कर 64.3% हो गया है।
- स्वास्थ्य बीमा कवरेज 41% से बढ़कर 60.2% हो गया है।
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यह डिजिटल असमानता में कमी तथा सेवाओं तक बेहतर पहुँच को दर्शाता है।
प्रमुख चुनौतियाँ:
प्रगति के बावजूद कई चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं-
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- 6–8 माह आयु के लगभग 40.5% शिशुओं को पर्याप्त पूरक आहार नहीं मिल रहा है।
- लगभग 12.9% बच्चे अभी भी आंशिक रूप से टीकाकृत हैं या बिल्कुल टीकाकरण से वंचित हैं।
- गैर-संचारी रोगों (NCDs) में वृद्धि देखी जा रही है।
- कुपोषण का दोहरा बोझ (Double Burden of Malnutrition) उभर रहा है, जिसमें अल्पपोषण के साथ-साथ मोटापा भी बढ़ रहा है।
- केवल 37.8% गर्भवती महिलाएँ ही आयरन एवं फोलिक एसिड की अनुशंसित खुराक पूरी कर पा रही हैं।
- 6–8 माह आयु के लगभग 40.5% शिशुओं को पर्याप्त पूरक आहार नहीं मिल रहा है।
आगे की राह:
इन चुनौतियों से निपटने के लिए लक्षित हस्तक्षेप आवश्यक हैं-
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- U-WIN के माध्यम से AI-आधारित माइक्रो-प्लानिंग अपनाकर टीकाकरण की निगरानी और कवरेज बढ़ाया जा सकता है।
- पोषण 2.0 और सक्षम आंगनवाडी को सशक्त बनाकर बाल पोषण में सुधार किया जा सकता है।
- स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों का विस्तार गैर-संचारी रोगों की शीघ्र पहचान में सहायक होगा।
- व्यवहार परिवर्तन अभियानों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं में पोषण संबंधी अनुपालन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
- U-WIN के माध्यम से AI-आधारित माइक्रो-प्लानिंग अपनाकर टीकाकरण की निगरानी और कवरेज बढ़ाया जा सकता है।
निष्कर्ष:
NFHS-6 भारत की स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण तथा स्वास्थ्य बीमा कवरेज में सुधार उत्साहजनक है। हालांकि, कुपोषण, अपूर्ण टीकाकरण और बढ़ते जीवनशैली संबंधी रोगों जैसी चुनौतियाँ यह संकेत देती हैं कि अब स्वास्थ्य नीति का ध्यान उपचार-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण की गुणवत्ता और स्वस्थ जीवनशैली पर केंद्रित होना चाहिए।


