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Blog / 10 Aug 2026

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने लाभ-साझाकरण तंत्र के तहत ₹3.79 करोड़ वितरित किए

संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने अभिगम एवं लाभ-साझाकरण (ABS) तंत्र के तहत 33 राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBBs), केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (UTBCs) तथा जैव विविधता संरक्षण में शामिल राष्ट्रीय संस्थानों को लगभग ₹3.79 करोड़ वितरित किए हैं। NBA द्वारा किया गया संचयी ABS वितरण अब ₹166 करोड़ को पार कर गया है।

अभिगम एवं लाभ-साझाकरण क्या है?

अभिगम एवं लाभ-साझाकरण (ABS) एक ऐसी व्यवस्था है जिसके माध्यम से जैविक एवं आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों को उनके संरक्षण में शामिल हितधारकों के साथ निष्पक्ष एवं समान रूप से साझा किया जाता है। इसका उद्देश्य व्यावसायिक उपयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करना है।

National Biodiversity Authority Disburses 3.79 Crore Under ABS Mechanism

कानूनी एवं संस्थागत ढाँचा:

भारत का ABS ढाँचा जैव विविधता अधिनियम, 2002 पर आधारित है और यह जैव विविधता पर अभिसमय के तहत नागोया प्रोटोकॉल के अनुरूप है।

भारत में जैव विविधता शासन की त्रिस्तरीय संरचना है:

1.        राष्ट्रीय स्तर: राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण

2.      राज्य स्तर: राज्य जैव विविधता बोर्ड

3.      स्थानीय स्तर: जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (BMCs)

BMCs जन जैव विविधता रजिस्टर (PBRs) तैयार करने में भी शामिल होती हैं, जिनमें स्थानीय जैविक संसाधनों और उनसे संबंधित ज्ञान का दस्तावेजीकरण किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय अभिसमय एवं प्रोटोकॉल:

जैव विविधता पर अभिसमय (CBD), 1992

CBD एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय संधि है, जिसके तीन प्रमुख उद्देश्य हैं:

      • जैव विविधता का संरक्षण।
      • जैव विविधता का सतत उपयोग।
      • आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त लाभों का निष्पक्ष एवं समान साझाकरण।

भारत CBD का पक्षकार है।

      • नागोया प्रोटोकॉल, 2010:
        • आनुवंशिक संसाधनों तक अभिगम तथा लाभों के निष्पक्ष एवं समान साझाकरण संबंधी नागोया प्रोटोकॉल, CBD का एक पूरक समझौता है। यह ABS के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ढाँचा प्रदान करता है और देशों को यह सुनिश्चित करने में सहायता करता है कि आनुवंशिक संसाधनों से प्राप्त लाभों को निष्पक्ष रूप से साझा किया जाए।
      • कार्टाजेना प्रोटोकॉल, 2000:
        • कार्टाजेना जैव सुरक्षा प्रोटोकॉल आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी से उत्पन्न जीवित रूप से संशोधित जीवों (LMOs) के सुरक्षित प्रबंधन, परिवहन और उपयोग से संबंधित है। यह जैव विविधता संरक्षण के लिए प्रासंगिक है, लेकिन ABS ढाँचे से अलग है।
      • कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा, 2022:
        • वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा (GBF) वर्ष 2030 के लिए वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों को निर्धारित करती है। लक्ष्य 4 आनुवंशिक विविधता पर केंद्रित है, जबकि लक्ष्य 13 आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों के निष्पक्ष एवं समान साझाकरण से संबंधित है।

महत्व:

      • ABS तंत्र जैव-डकैती को रोकने, जैविक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने और जैव विविधता संरक्षण के लिए संसाधन उत्पन्न करने में सहायता करता है। इन निधियों का उपयोग स्व-स्थाने एवं बाह्य-स्थाने संरक्षण, जैव विविधता विरासत स्थलों, जन जैव विविधता रजिस्टरों, BMCs के क्षमता निर्माण तथा स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए किया जा सकता है।
      • यह विशेष रूप से कृषि-जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है, जो खाद्य सुरक्षा, फसल सुधार और जलवायु अनुकूलन क्षमता का समर्थन करती है।

चुनौतियाँ:

प्रमुख चुनौतियों में जैविक संसाधनों के मूल स्रोत की पहचान करना, पारंपरिक ज्ञान का अपर्याप्त दस्तावेजीकरण, सीमित संस्थागत क्षमता और ABS निधियों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना शामिल हैं। भारत को जैव विविधता विनियमन तथा वैज्ञानिक अनुसंधान एवं व्यावसायिक नवाचार के बीच भी संतुलन बनाए रखना होगा।

निष्कर्ष:

₹3.79 करोड़ का वितरण भारत के उस प्रयास को दर्शाता है, जिसमें जैविक संसाधनों के आर्थिक उपयोग को संरक्षण और सामुदायिक कल्याण से जोड़ा जा रहा है। एक मजबूत ABS तंत्र सतत विकास, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरणीय न्याय को बढ़ावा दे सकता है तथा CBD, नागोया प्रोटोकॉल और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सहायता कर सकता है।

 

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