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Blog / 12 Aug 2026

मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए नासा ने इसरो को आमंत्रित किया

संदर्भ:

हाल ही में नासा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को अपने मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मनुष्यों को पुनः चंद्रमा पर भेजना और अंततः वहां मनुष्यों की स्थायी उपस्थिति स्थापित करना है। इस प्रस्ताव पर 5–6 अगस्त, 2026 को बेंगलुरु में आयोजित भारत-अमेरिका नागरिक अंतरिक्ष संयुक्त कार्य समूह की 9वीं बैठक के दौरान चर्चा हुई।

पृष्ठभूमि:

भारत अमेरिका के साथ अपने अंतरिक्ष सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है। 2023 में भारत आर्टेमिस समझौते का 27वां हस्ताक्षरकर्ता देश बना। यह समझौता चंद्रमा, मंगल और अन्य खगोलीय पिंडों के शांतिपूर्ण तथा टिकाऊ नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए सिद्धांत निर्धारित करता है। नासा का यह नवीनतम आमंत्रण नासा और इसरो के बीच बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग को और मजबूत करता है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:

      • निसार मिशन:
        • नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) मिशन दोनों देशों के द्विपक्षीय सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है। इसमें उन्नत रडार तकनीक का उपयोग पृथ्वी की सतह पर होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए किया जाता है। इसके अंतर्गत हिमनदों, वनों, भूकंपों, भूस्खलनों और कृषि से संबंधित परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है।
        • इस मिशन का सफल क्रियान्वयन भविष्य के अधिक जटिल संयुक्त अंतरिक्ष अभियानों के लिए आधार प्रदान कर सकता है।
      • मानव अंतरिक्ष उड़ान:
        • भारत का गगनयान कार्यक्रम मानव अंतरिक्ष उड़ान की क्षमताओं को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। नासा ने भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षण देने में भी सहयोग प्रदान किया है।
        • भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का वर्ष 2025 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) का अभियान भारत-अमेरिका के मानव अंतरिक्ष उड़ान सहयोग में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा।
      • चंद्र अन्वेषण:
        • नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम मनुष्यों को पुनः चंद्रमा पर भेजने और वहां लंबे समय तक अन्वेषण के लिए आवश्यक क्षमताएं विकसित करने का लक्ष्य रखता है। भारत का भी 2040 तक मनुष्यों को चंद्रमा पर भेजने का दीर्घकालिक लक्ष्य है।

भारत के लिए महत्व:

      • नासा का यह आमंत्रण भारत के लिए कई अवसर प्रदान करता है:
        • उन्नत तकनीकों और विशेषज्ञता तक पहुंच।
        • भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं को मजबूत करना।
        • चंद्र अनुसंधान में वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना।
        • भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग का विकास।
        • वैश्विक अंतरिक्ष कूटनीति में भारत की भूमिका का विस्तार।
        • भविष्य में मंगल और उससे आगे के अंतरिक्ष अभियानों के लिए तैयारी।
        • 2023 में भारत की चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग पहले ही उसकी बढ़ती हुई चंद्र अन्वेषण क्षमताओं को प्रदर्शित कर चुकी है।

निष्कर्ष:

नासा द्वारा इसरो को मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का आमंत्रण भारत-अमेरिका के बीच गहराते अंतरिक्ष सहयोग को दर्शाता है। मून बेस प्रोग्राम में भागीदारी से भारत की तकनीकी क्षमताओं, वैज्ञानिक प्रभाव और उभरती हुई चंद्र अर्थव्यवस्था में उसकी रणनीतिक भूमिका को बढ़ावा मिल सकता है। स्वायत्तता, तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा शांतिपूर्ण और टिकाऊ अंतरिक्ष अन्वेषण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखनी चाहिए।

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj