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Blog / 23 Mar 2026

भारत में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खरीद संबंधी मुद्दे

संदर्भ:

हाल ही में, कनीमोझी करुणानिधि की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति ने चावल और गेहूं की अनुमानित और वास्तविक खरीद के बीच लगातार बने अंतर पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

समिति के मुख्य निष्कर्ष:

      • 2022–23 से गेहूं और चावल की खरीद कुल उत्पादन के 30% से भी कम रही।
      • गेहूं की खरीद 2023–24, 2024–25 और 2025–26 के लिए अनुमानित मात्रा का क्रमशः 76.71%, 71.35% और 87.29% रही।
      • बिहार, गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में लक्ष्य से कम खरीद हुई।
      • समिति ने बेहतर खरीद योजना, रीयल-टाइम निगरानी और केंद्रराज्य समन्वय को मजबूत करने की सिफारिश की है।

मुख्य मुद्दे:

      • अनुमानित और वास्तविक खरीद के बीच मौजूद अंतर खराब योजना और अपर्याप्त पूर्वानुमान का संकेत देता है, जिससे खाद्य सुरक्षा भंडार कमजोर होता है। खरीद मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में केंद्रित है, जबकि पूर्वी राज्यों जैसे बिहार में यह काफी कम है।
      • इसके अलावा, बाजार की परिस्थितियाँ भी इस पर असर डालती हैं; जब बाजार मूल्य MSP से अधिक होता है, तो किसान अक्सर निजी खरीदारों को प्राथमिकता देते हैं। भंडारण और लॉजिस्टिक्स की कमज़ोरी भी खरीद को प्रभावित करती है। गेहूं और चावल पर अधिक ध्यान देने से फसल विविधता पर नकारात्मक असर पड़ता है और अन्य आवश्यक फसलें अनदेखी रह जाती हैं।

Minimum Support Price (MSP): Crop List, Objectives & Challenges

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बारे में:

      • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह पूर्व-घोषित मूल्य है, जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदती है, ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिल सके। इसे सालाना 23 फसलों के लिए घोषित किया जाता है। भारत में MSP की सिफारिश कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) द्वारा की जाती है और यह उत्पादन लागत पर कम से कम 50% का लाभ सुनिश्चित करता है।
      • खरीद तंत्र में भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियाँ शामिल हैं। गेहूं और धान/चावल जैसी फसलों की खरीद ओपन-एंडेडहोती है, यानी सरकार गुणवत्ता मानकों पर खरीदी जाने वाली सभी फसल खरीदती है। खरीद पर असर डालने वाले मुख्य कारक “उत्पादन स्तर, बाजार में अधिशेष, MSP और बाजार मूल्य का अंतर, मांग-आपूर्ति की स्थिति, और निजी व्यापारी भागीदारी” हैं।
      • MSP किसानों की आय सुरक्षा सुनिश्चित करता है, संकट के समय फसल की बिक्री को रोकता है, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का समर्थन करता है और खाद्य सुरक्षा भंडार बनाए रखता है। उदाहरण के लिए, 2026–27 के लिए गेहूं का MSP ₹2,585/क्विंटल है, जो किसानों को स्थिर और सुरक्षित आय प्रदान करता है।

समिति की सिफारिशें:

      • खरीद योजना की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाना
      • उत्पादन और फसल आगमन की रीयल-टाइम निगरानी को बेहतर करना
      • राज्यों के साथ समन्वय और सहयोग को बढ़ाना
      • खरीद प्रणाली को अधिक यथार्थपरक और उत्तरदायी बनाना

आगे की राह:

पूर्वी भारत, जैसे बिहार और ओडिशा में खरीद का विस्तार करना आवश्यक है। साथ ही, विशेषकर दालों और तिलहन जैसी फसलों पर ध्यान केंद्रित करके फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना चाहिए। डिजिटल ट्रैकिंग और पारदर्शिता के तंत्र में सुधार करना, भंडारण और लॉजिस्टिक्स के ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है। MSP प्रणाली में भी सुधार करके इसे आय समर्थन और बाजार सुधारों के साथ संतुलित बनाना चाहिए, जिससे किसानों की स्थिर आय सुनिश्चित हो और कृषि क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा मिले।

निष्कर्ष:

उच्च उत्पादन के बावजूद खरीद में गिरावट भारत के MSP तंत्र में संरचनात्मक कमियों को दर्शाती है। खरीद तंत्र को मजबूत करना और इसका क्षेत्रीय आधार व्यापक बनाना किसानों के कल्याण, खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि के लिए अत्यंत आवश्यक है।