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Blog / 09 Feb 2026

मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक

संदर्भ:

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की हालिया मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में प्रमुख नीतिगत रेपो दर को 5.25% पर यथावत रखने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय अनुकूल घरेलू मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मूल्य स्थिरता और आर्थिक वृद्धि के संतुलन को ध्यान में रखते हुए लिया गया। साथ ही, RBI ने वित्त वर्ष 2025–26 (FY26) के लिए अपनी मुद्रास्फीति अनुमान को संशोधित कर 2.1% कर दिया है, जो उसके 4% के लक्ष्य से काफी कम है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC):

MPC एक छह-सदस्यीय वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना 2016 में उर्जित पटेल समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई थी। इसका उद्देश्य मौद्रिक नीति में नियम-आधारित और सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।

Monetary Policy Committee | IAS GYAN

प्रमुख विवरण:

      • उद्देश्य: आर्थिक वृद्धि को समर्थन देते हुए 4% (± 2) के दायरे में मुद्रास्फीति बनाए रखना।
      • संरचना (6 सदस्य):
        • अध्यक्ष: RBI गवर्नर (पदेन)
        • सदस्य: RBI के तीन अधिकारी (जिनमें एक उप-गवर्नर शामिल) तथा भारत सरकार द्वारा नियुक्त तीन बाहरी विशेषज्ञ
      • बैठकें: वर्ष में कम से कम चार बार (द्विमासिक)
      • मतदान: बहुमत के आधार पर; बराबरी की स्थिति में गवर्नर का निर्णायक मत
      • मुख्य उपकरण: रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, नकद आरक्षित अनुपात (CRR), वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) और खुले बाजार परिचालन (OMO)

मौद्रिक नीति का रुख:

      • विस्तारवादी/उदार: वृद्धि को प्रोत्साहित करने हेतु दरों में कटौती
      • संकोचनात्मक/कड़ा: उच्च मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने हेतु दरों में वृद्धि
      • तटस्थ: वृद्धि और मुद्रास्फीति के बीच संतुलित दृष्टिकोण

MPC ने पूर्व की एकल-सदस्यीय प्रणाली के स्थान पर पारदर्शिता, जवाबदेही और सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया को सुदृढ़ किया है।

नीति निर्णय:

      • रेपो दर: 5.25% पर यथावत
      • नीति रुख: तटस्थ स्थिरता का संकेत, साथ ही परिस्थितियाँ बदलने पर कार्रवाई की लचीलापन

दरें यथावत रखने के पीछे तर्क:

1.      निम्न मुद्रास्फीति: सीमित मूल्य दबाव के कारण और सख्ती की आवश्यकता नहीं।

2.     आर्थिक वृद्धि: मजबूत घरेलू मांग और लचीले क्षेत्रों से निरंतर वृद्धि का समर्थन।

3.     वैश्विक जोखिम: भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ और जिंस कीमतों में उतार-चढ़ावसावधानीपूर्ण रुख आवश्यक।

महत्व:

      • मूल्य स्थिरता: मुद्रास्फीति लक्ष्य के भीतर, आरबीआई के ढांचे पर विश्वास बढ़ता है।
      • नीतिगत पूर्वानुमेयता: स्थिर दरें उधारी, ऋण और निवेश निर्णयों में सहायक।
      • मौद्रिक गुंजाइश: तटस्थ रुख भविष्य में डेटा के आधार पर समायोजन की लचीलापन बनाए रखता है।

निष्कर्ष:

नीतिगत दर को यथावत रखते हुए और FY26 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को 2.1% पर संशोधित करके, RBI ने संतुलित, डेटा-आधारित दृष्टिकोण का संकेत दिया है, जो वृद्धि और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन साधता है। MPC की भूमिका पारदर्शिता, जवाबदेही और सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया को सुनिश्चित करती है, जिससे भारत की मौद्रिक नीति रूपरेखा की विश्वसनीयता मज़बूत होती है और घरेलू व वैश्विक आर्थिक परिवर्तनों के प्रति लचीलापन बना रहता है।