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Blog / 03 Jun 2026

मिशन “स्नेहजोरी”

संदर्भ:

हाल ही में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया तथा असम के मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से मिशन स्नेहजोरी का शुभारंभ किया। यह एक क्लस्टर-आधारित पहल है, जिसका उद्देश्य असम के मूगा रेशम क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विलासिता (लक्ज़री) वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तित करना है। इस मिशन का लक्ष्य उत्पादन से लेकर ब्रांडिंग और निर्यात तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ बनाना है।

पृष्ठभूमि:

    • मूगा रेशम, जो केवल असम में पाया जाता है, विश्व का एकमात्र प्राकृतिक स्वर्णिम (सुनहरे रंग का) रेशम माना जाता है। इसे भारत के प्रथम रेशम के रूप में भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त होने का गौरव भी प्राप्त है।
    • अपार सांस्कृतिक महत्व और अंतरराष्ट्रीय विशिष्टता के बावजूद यह क्षेत्र लंबे समय तक बिखरा हुआ तथा पर्याप्त रूप से व्यावसायिक विकास से वंचित रहा। ऐतिहासिक रूप से मूगा रेशम उत्पादकों को उत्पादन स्तर पर कम मूल्य प्राप्त होता था (औसतन ₹25,000 प्रति किलोग्राम), जिसके कारण जमीनी स्तर के कारीगरों और उत्पादकों को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता था।

मिशन स्नेहजोरी के बारे में:

    • मिशन स्नेहजोरी पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) द्वारा प्रारंभ की गई ₹411 करोड़ की एक क्लस्टर-आधारित पहल है, जिसका उद्देश्य असम के मूगा रेशम क्षेत्र का व्यापक रूपांतरण करना है। यह मिशन 2.5 लाख से अधिक बुनकरों और रेशम उत्पादकों को सशक्त बनाने तथा राज्य के जीआई-टैग प्राप्त स्वर्णिम धागे” (मूगा रेशम) को वैश्विक स्तर पर एक प्रीमियम विलासिता ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए शुरू किया गया है।
    • पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय और असम सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आरंभ किया गया यह मिशन तीन वर्षों (2026–2028) की अवधि में संचालित किया जाएगा।
    • यह मिशन उत्पादन के सभी प्रमुख चरणों को समाहित करता है, जिनमें पोषक पौधों (सोम और सोआलू) की खेती, रेशमकीट बीज उत्पादन, रीलिंग एवं बुनाई अवसंरचना का विकास, ब्रांडिंग एवं जीआई प्रमाणीकरण, निर्यात संवर्धन, पर्यटन विकास तथा डिजिटल अनुरेखण (ट्रेसेबिलिटी) प्रणाली शामिल हैं।
    • इस योजना का कार्यान्वयन असम के प्रमुख रेशम उत्पादक जिलों- जोरहाट, शिवसागर, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, लखीमपुर, धेमाजी, माजुली तथा सुआलकुची में किया जाएगा।

मिशन के उद्देश्य:

    • मूल्य संवर्धन एवं आय वृद्धि: मूगा रेशम उत्पादकों और बुनकरों की आय बढ़ाकर ₹50,000 प्रति किलोग्राम से अधिक करना। इसके लिए प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाएगा।
    • संस्थागत सहयोग: 30 किसान उत्पादक संगठन (FPOs) तथा 1,180 से अधिक किसान हित समूह (FIGs) स्थापित किए जाएंगे, जिससे उत्पादकों को संगठित समर्थन और बाज़ार तक बेहतर पहुँच मिल सके।
    • अवसंरचना का आधुनिकीकरण: प्रमुख उत्पादक जिलों, जैसे जोरहाट, शिवसागर और माजुली, में पाँच आधुनिक मूगा रीलिंग इकाइयों तथा एक विशेष मूगा स्पन मिल की स्थापना की जाएगी।
    • पोषक पौधों का पुनर्जीवन: रेशमकीटों के लिए सतत भोजन उपलब्ध कराने हेतु 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सोम और सोआलू पौधों का पुनरुद्धार किया जाएगा।
    • अनुरेखण एवं ब्रांडिंग: एकीकृत स्नेहजोरीब्रांड विकसित किया जाएगा तथा जीआई-आधारित डिजिटल अनुरेखण प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे विश्वभर के उपभोक्ता अपने द्वारा खरीदे गए मूगा रेशम की प्रामाणिकता की पुष्टि कर सकेंगे।
    • पर्यटन से एकीकरण: सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मूगा सिल्क ट्रेल”, रेशम पर्यटन पार्क तथा वार्षिक मूगा उत्सवों का आयोजन किया जाएगा। इससे स्थानीय कला, संस्कृति और पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।

सांस्कृतिक एवं आर्थिक महत्त्व

    • मूगा रेशम, एरी तथा तसर रेशम के साथ वान्य (जंगली) रेशम की श्रेणी में आता है।
    • ऐतिहासिक रूप से इसका उपयोग अहोम वंश के राजपरिवार के परिधानों में किया जाता था।
    • वर्तमान में यह असम के पारंपरिक परिधान मेखला-चादर का अभिन्न अंग है।
    • यह ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

निष्कर्ष:

मिशन स्नेहजोरी पारंपरिक रेशम-पालन व्यवस्था से आगे बढ़कर वैश्विक विलासिता रेशम अर्थव्यवस्था मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है। प्रौद्योगिकी, ब्रांडिंग तथा क्लस्टर-आधारित विकास को एकीकृत करके यह पहल असम के मूगा रेशम को विश्व धरोहर वस्त्र के रूप में स्थापित करने, ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि करने तथा सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण का लक्ष्य रखती है।

 

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