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Blog / 06 May 2026

कपास उत्पादकता मिशन 2026: वस्त्र क्षेत्र पर प्रभाव

कपास उत्पादकता मिशन 2026

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय सरकार ने ₹5,659.22 करोड़ की राशि कपास उत्पादकता मिशन के लिए पाँच वर्ष की अवधि (2026–27 से 2030–31) हेतु मंजूर की है। इसे केंद्रीय बजट 2025–26 में घोषित किया गया था। इस मिशन का उद्देश्य विज्ञान और तकनीक के माध्यम से कपास की उत्पादकता बढ़ाना तथा भारत के वस्त्र उद्योग के लिए गुणवत्तापूर्ण कपास की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

मिशन के बारे में:

कपास उत्पादकता मिशन भारत में कपास की उत्पादकता, गुणवत्ता और सततता (sustainability) को सुधारने के लिए एक परिवर्तनकारी पहल है। यह सरकार के 5F विज़न—Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign—के अनुरूप है, जो पूरे वस्त्र मूल्य श्रृंखला को एकीकृत करता है। यह मिशन किसानों की आय बढ़ाने और वस्त्र क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने पर भी केंद्रित है।

Mission for Cotton Productivity

मुख्य उद्देश्य और घटक:

यह मिशन कई विज्ञान-आधारित और बाजार-उन्मुख हस्तक्षेपों पर केंद्रित है:

      • उच्च उपज और जलवायु-सहिष्णु बीज: उन्नत प्रजनन तकनीकों के माध्यम से कीट-प्रतिरोधी और जलवायु-अनुकूल कपास किस्मों का विकास।
      • तकनीक-आधारित खेती: उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS), कम दूरी पर बुवाई और एकीकृत कपास प्रबंधन को बढ़ावा देना।
      • प्रसंस्करण का आधुनिकीकरण: दक्षता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए जिनिंग और प्रसंस्करण इकाइयों का उन्नयन।
      • गुणवत्ता परीक्षण अवसंरचना: मानकीकृत कपास ग्रेडिंग और प्रमाणन के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की स्थापना।
      • ब्रांडिंग और ट्रेसेबिलिटी: भारतीय कपास को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए कस्तूरी कॉटन भारतको मजबूत करना।
      • डिजिटल एकीकरण: पारदर्शी मूल्य निर्धारण और बेहतर बाजार पहुंच के लिए मंडियों को ई-प्लेटफॉर्म से जोड़ना।
      • परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy): पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए कपास अपशिष्ट का पुनर्चक्रण कर मूल्य-वर्धित उत्पाद बनाना।
      • फाइबर विविधीकरण: बांस, फ्लैक्स, रेमी और केले के रेशे जैसे प्राकृतिक रेशों को बढ़ावा देना।

मिशन के लक्ष्य (Targets of the Mission):

      • कपास उत्पादन लक्ष्य: 2031 तक 498 लाख गांठें (bales)
      • उत्पादकता सुधार: 440 किलोग्राम/हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम/हेक्टेयर उत्पादन करना

भारत के कपास क्षेत्र के बारे में :

      • भारत क्षेत्रफल (Acreage) के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है, जो वैश्विक कपास क्षेत्र का लगभग 40% हिस्सा रखता है। हालाँकि, कुल उत्पादन के मामले में, भारत आमतौर पर चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 20-23% योगदान देता है।
      • प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक और राजस्थान हैं। हालांकि, उत्पादन-क्षमता (productivity) अभी भी वैश्विक अग्रणी देशों की तुलना में कम है।

कपास उत्पादन की चुनौतियाँ:

मुख्य समस्याओं में कम उपज, गुलाबी बॉलवर्म जैसे कीटों का आक्रमण, वर्षा-आधारित खेती के कारण जलवायु संवेदनशीलता, तथा मूल्य अस्थिरता शामिल हैं, जो किसानों की आय को प्रभावित करती हैं।

सरकारी सहायता उपाय:

      • कपास निगम ऑफ इंडिया (CCI) के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था
      • बीटी कपास (Bt cotton) को बढ़ावा देना
      • कपास खरीद प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए कपास किसान ऐप
      • कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) द्वारा परामर्श एवं सलाह

मिशन का महत्व:

कपास उत्पादकता मिशन से अपेक्षा है कि यह:

      • किसानों की आय बढ़ाएगा
      • वस्त्र उद्योग के लिए कच्चे माल की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा
      • भारत की वैश्विक वस्त्र प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करेगा
      • सतत (sustainable) और तकनीक-आधारित कृषि को बढ़ावा देगा

निष्कर्ष:

कपास उत्पादकता मिशन एक रणनीतिक सुधार है, जिसका उद्देश्य नवाचार, डिजिटलीकरण और सततता के माध्यम से भारत के कपास क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना है, जिससे 5F विज़न के तहत संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जा सके।

 

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