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Blog / 28 Jul 2026

माइक्रोपोरेलस कोल्हापुरेंसिस: नए पॉलीपोर फंगस की खोज

संदर्भ:

हाल ही में वैज्ञानिकों ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के भुदरगढ़ (Bhudargad) तालुका में पॉलीपोर (ब्रैकेट) कवक की एक नई प्रजाति माइक्रोपोरेलस कोल्हापुरेंसिस (Microporellus kolhapurensis) की खोज की है।

माइक्रोपोरेलस कोल्हापुरेन्सिस के बारे में:

      • यह पॉलीपोर (Polypore) अथवा ब्रैकेट (Bracket) कवक की एक नई प्रजाति है।
      • इसकी खोज महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के भुदरगढ़ तालुका में की गई।
      • यह कवक सड़ी-गली (Rotting) लकड़ी पर उगता है।
      • यह मुख्यतः जुलाई से सितंबर के बीच फलन (Fruiting) करता है।
      • यह सामान्यतः अकेले (Singly) उगता है।

new species of fungi from kolhapur named Microporellus kolhapurensis -  Marathi News | Mumbai Tarun Bharat

प्रमुख विशेषताएँ:

      • यह प्रजाति अपने निकट संबंधी कवकों से निम्नलिखित विशेषताओं के कारण भिन्न है-
        • पीले-नारंगी से धूसर-भूरे (Yellowish-orange to Grayish-brown) रंग की होती है।
        • छाते (Umbrella) के आकार की संरचना।
        • पार्श्व डंठल (Lateral Stalk)
        • भूमि पर उगने (Ground-growing) की प्रवृत्ति।
        • बड़े-बड़े छिद्र (Large Pores)
        • आँसू (Teardrop) के आकार के बीजाणु (Spores)
      • मोटी भित्ति वाली विशिष्ट सिस्टिडिया (Thick-walled Cystidia), जो बीजाणु-धारण सतह पर उपस्थित बड़ी कोशिकाएँ होती हैं, लेकिन स्वयं बीजाणु उत्पन्न नहीं करतीं।

पॉलीपोर (Polypores) क्या हैं?

      • पॉलीपोर, जिन्हें ब्रैकेट (Bracket) या शेल्फ (Shelf) कवक भी कहा जाता है, कवकों का एक समूह है।
      • इनके फलन शरीर (Fruiting Body) के निचले भाग में अनेक सूक्ष्म छिद्र (Pores) होते हैं, जिनके कारण इन्हें Polypores कहा जाता है।
      • इन छिद्रों में बीजाणु (Spores) बनते और सुरक्षित रहते हैं, जिनके माध्यम से कवकों का प्रजनन होता है।
      • ये छिद्र सतह क्षेत्र (Surface Area) को बढ़ाते हैं, जिससे अधिक संख्या में बीजाणु विकसित हो सकें।
      • अधिकांश पॉलीपोर में ये छिद्र गोलाकार तथा नियमित दूरी पर व्यवस्थित होते हैं।
      • इनका आकार शेल्फ (Shelf) या ब्रैकेट (Bracket) जैसा होता है, इसलिए इन्हें Bracket Fungi भी कहा जाता है।
      • ये प्रायः जीवित वृक्षों, गिरे हुए तनों (Logs) तथा लकड़ी पर उगते हैं।
      • कुछ प्रजातियों में लकड़ी से जुड़ने के लिए छोटा डंठल (Short Stalk) भी होता है।
      • ये स्वस्थ वृक्षों को नुकसान पहुँचा सकते हैं, लेकिन साथ ही मृत वृक्षों के अपघटन (Decomposition) में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
      • इनका माइसीलियम (Mycelium) मेजबान वृक्ष के तने के भीतर फैला रहता है, जबकि केवल फलन शरीर (Fruiting Body) बाहर दिखाई देता है।

पारिस्थितिक महत्व:

      • मृत लकड़ी के अपघटन में सहायता कर पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण (Nutrient Recycling) करते हैं।
      • वन पारिस्थितिकी तंत्र (Forest Ecosystem) के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
      • जैव विविधता (Biodiversity) के संरक्षण और वन स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक (Indicators) माने जाते हैं।

 

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