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Blog / 18 Jul 2026

भारतीय नौसेना को मिला एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टर

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय नौसेना को संयुक्त राज्य अमेरिका से एक और एमएच-60आर सीहॉक बहु-भूमिका (Multi-Role) नौसैनिक हेलीकॉप्टर प्राप्त हुआ है। इससे भारत की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता (Anti-Submarine Warfare) और समुद्री निगरानी क्षमताओं को मजबूती मिली है। कोच्चि में हुई नवीनतम आपूर्ति के साथ, भारत को अमेरिका के साथ हुए 946 मिलियन डॉलर के विदेशी सैन्य बिक्री (Foreign Military Sales - FMS) समझौते के तहत ऑर्डर किए गए 24 हेलीकॉप्टरों में से अब तक कुल एमएच-60आर हेलीकॉप्टर प्राप्त हो चुके हैं।

MH-60R सीहॉक हेलीकॉप्टर के बारे में:

      • एमएच-60आर सीहॉक, जिसेरोमियो” (Romeo) के नाम से भी जाना जाता है, एक उन्नत बहु-मिशन नौसैनिक हेलीकॉप्टर है। इसका निर्माण सिकोरस्की एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन द्वारा किया जाता है, जो लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) की एक इकाई है। इसे अमेरिकी नौसेना के लिए विकसित किया गया है और यह दुनिया के सबसे उन्नत समुद्री हेलीकॉप्टरों में से एक माना जाता है।
      • इस हेलीकॉप्टर को मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों के लिए डिजाइन किया गया है:
        • पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare - ASW)
        • सतह रोधी युद्ध (Anti-Surface Warfare - ASuW)
        • समुद्री निगरानी (Maritime Surveillance)
        • खोज और बचाव अभियान (Search and Rescue Operations)
        • चिकित्सीय निकासी (Medical Evacuation) और संचार सहायता

प्रमुख विशेषताएं और तकनीकी विनिर्देश:

      • एमएच-60आर सीहॉक में कई अत्याधुनिक प्रणालियां शामिल हैं:
        • अधिकतम गति: लगभग 333 किमी/घंटा (180 नॉट)
        • परिचालन सीमा: लगभग 830 किमी
        • मुख्य हथियार: Mk 54 हल्के टॉरपीडो और AGM-114 हेलफायर मिसाइल
        • सेंसर प्रणाली: डिपिंग सोनार, सोनाबॉय, अत्याधुनिक रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम
      • ये प्रणालियां हेलीकॉप्टर को पानी के नीचे और सतह पर मौजूद खतरों का प्रभावी रूप से पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम बनाती हैं।

भारत के लिए रणनीतिक महत्व:

      • पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता में वृद्धि: यह हेलीकॉप्टर भारत की शत्रु पनडुब्बियों का पता लगाने और उनका मुकाबला करने की क्षमता को काफी बढ़ाता है। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती पनडुब्बी गतिविधियों को देखते हुए, उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध प्लेटफॉर्म नौसैनिक संपत्तियों की सुरक्षा और समुद्री प्रभुत्व बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
      • नौसैनिक बेड़े की सुरक्षा: एमएच-60आर सीहॉक विध्वंसक पोतों (Destroyers), फ्रिगेट्स (Frigates) और विमानवाहक पोतों (Aircraft Carriers) जैसे युद्धपोतों से संचालित किया जा सकता है। यह पानी के नीचे मौजूद खतरों से उच्च-मूल्य वाले नौसैनिक प्लेटफॉर्मों की सुरक्षा के लिए रक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान करता है।
      • समुद्री क्षेत्र की जागरूकता में सुधार: अत्याधुनिक सेंसर और निगरानी प्रणालियों से लैस सीहॉक भारत की समुद्री सीमाओं, महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और रणनीतिक क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों की निगरानी करने की क्षमता को बढ़ाता है।

भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग:

      • एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की खरीद भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों को दर्शाती है। दोनों देश समुद्री सुरक्षा, रक्षा प्रौद्योगिकी और मालाबार जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यासों के क्षेत्रों में सहयोग करते हैं।
      • यह सौदा क्वाड (Quad) ढांचे के अंतर्गत सहयोग को भी मजबूत करता है, जिसका उद्देश्य एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) को बनाए रखना है।

निष्कर्ष:

एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टरों का भारतीय नौसेना में शामिल होना नौसेना के आधुनिकीकरण और भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह प्लेटफॉर्म भारत को पानी के नीचे मौजूद खतरों से निपटने में अधिक सक्षम बनाता है। हालांकि, दीर्घकालिक रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिए भारत को स्वदेशी रक्षा निर्माण और प्रौद्योगिकी विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होगी।

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