संदर्भ:
हाल के समय में संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) की निधियों के उपयोग को लेकर राजनीतिक स्तर पर व्यापक चर्चा और जांच देखने को मिली है। कुछ सांसदों पर अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाहर धनराशि आवंटित करने के आरोप लगाए गए, जिसके कारण योजना के दिशा-निर्देशों के अनुपालन को लेकर बहस और तेज़ हो गई। जहां एक ओर आलोचकों ने एमपीएलएडीएस को समाप्त करने की मांग उठाई है, वहीं दूसरी ओर समर्थकों का मत है कि पारदर्शिता बढ़ाकर और निधियों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक सुधारों के साथ इस योजना को जारी रखा जाना चाहिए। इस पूरे विमर्श ने जमीनी स्तर के विकास में एमपीएलएडीएस की भूमिका पर पुनः ध्यान आकर्षित किया है।
एमपीएलएडीएस योजना के बारे में:
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- शुरुआत और वित्तपोषण: संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) की शुरुआत दिसंबर 1993 में एक केंद्रीय योजना के रूप में की गई थी। इसका पूरा वित्तपोषण भारत सरकार द्वारा किया जाता है।
- आवंटन: प्रत्येक सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए प्रति वर्ष ₹5 करोड़ तक के कार्यों की सिफारिश कर सकता है।
- अनुमेय परियोजनाएँ: यह योजना सड़कों, पेयजल सुविधाओं, स्कूल भवनों और सामुदायिक केंद्रों जैसी स्थायी और उपयोगी सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण पर केंद्रित है।
- निर्वाचन क्षेत्र के बाहर कार्य: सांसद किसी एक वित्तीय वर्ष में अपने निर्वाचन क्षेत्र या राज्य के बाहर ₹50 लाख तक की परियोजनाओं की सिफारिश कर सकते हैं। गंभीर प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में यह सीमा बढ़ाकर ₹1 करोड़ कर दी जाती है।
- कार्यान्वयन और निगरानी: परियोजनाओं का कार्यान्वयन जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है तथा उनकी प्रगति की निगरानी एमपीएलएडीएस के ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से की जाती है।
- शुरुआत और वित्तपोषण: संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) की शुरुआत दिसंबर 1993 में एक केंद्रीय योजना के रूप में की गई थी। इसका पूरा वित्तपोषण भारत सरकार द्वारा किया जाता है।
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एमपीएलएडीएस के लाभ:
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- स्थानीय विकास: यह योजना सांसदों को अपने क्षेत्र की विशिष्ट विकासात्मक आवश्यकताओं “जैसे बुनियादी ढांचा, जल आपूर्ति, शिक्षा और स्वास्थ्य” को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम बनाती है।
- त्वरित प्रतिक्रिया: तात्कालिक सामुदायिक जरूरतों और समय-संवेदनशील परियोजनाओं के लिए धन शीघ्र उपलब्ध कराने में सहायक है।
- सार्वजनिक जवाबदेही: जियो-टैग की गई तस्वीरों से युक्त डिजिटल डैशबोर्ड नागरिकों को कार्यों की प्रगति, पूर्णता और गुणवत्ता की जानकारी प्राप्त करने में मदद करता है।
- विकास के लिए राजनीतिक प्रोत्साहन: यह योजना सांसदों को अपने मतदाताओं के लिए ठोस और प्रत्यक्ष लाभ सुनिश्चित करने हेतु प्रेरित करती है, जिससे प्रतिनिधि जवाबदेही मजबूत होती है।
- आपात स्थितियों में लचीलापन: प्राकृतिक आपदाओं के समय निर्वाचन क्षेत्र के बाहर भी धन आवंटन की अनुमति देकर राहत और पुनर्वास कार्यों को समय पर संभव बनाती है।
- ऐतिहासिक उपयोग: पूर्व के आंकड़े दर्शाते हैं कि कई लोकसभाओं में निधियों का उच्च स्तर पर उपयोग हुआ है और अनेक सांसदों ने सामाजिक कल्याण तथा अवसंरचना विकास के लिए इनका प्रभावी प्रयोग किया है।
- स्थानीय विकास: यह योजना सांसदों को अपने क्षेत्र की विशिष्ट विकासात्मक आवश्यकताओं “जैसे बुनियादी ढांचा, जल आपूर्ति, शिक्षा और स्वास्थ्य” को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम बनाती है।
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निष्कर्ष:
एमपीएलएडीएस आज भी निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर विकास को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण साधन है। निधियों के दुरुपयोग या उपयोग में देरी से जुड़े आरोप योजना की मूल अवधारणा की बजाय उसके कार्यान्वयन से संबंधित चुनौतियों को उजागर करते हैं। एमपीएलएडीएस को समाप्त करना सांसदों से स्थानीय विकास की एक महत्वपूर्ण व्यवस्था छीन लेने के समान होगा। अतः इसे समाप्त करने के बजाय पारदर्शिता बढ़ाने, सांसदों के लिए क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने तथा परियोजना स्वीकृति प्रक्रियाओं को सरल बनाने जैसे लक्षित सुधार किए जाने चाहिए, ताकि सार्वजनिक धन का लाभ देशभर के समुदायों तक निरंतर और प्रभावी रूप से पहुँचता रहे।

