होम > Blog

Blog / 05 Jan 2026

इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स प्रोत्साहन के लिए 22 और परियोजनाओं को मंज़ूरी

संदर्भ:

हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के अंतर्गत 22 अतिरिक्त परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है। यह योजना देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को मज़बूत करने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की सरकार की व्यापक रणनीति का एक अहम हिस्सा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के बारे में:

      • इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसे अप्रैल 2025 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा शुरू किया गया।
      • ECMS एक उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI-जैसी) योजना है, जिसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और पार्ट्स के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना है।
      • इस योजना का मुख्य लक्ष्य स्थानीय मूल्य संवर्धन को बढ़ाना, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना, गुणवत्तापूर्ण रोज़गार के अवसर सृजित करना और मोबाइल फोन, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी हार्डवेयर तथा रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों को मज़बूती प्रदान करना है।
      • यह योजना स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर के लिए पहले से लागू प्रोत्साहन योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकोसिस्टम को और अधिक सशक्त, गहन और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक है।

MeitY Okays 22 More Projects for Electronic Parts Incentives

नवीनतम मंज़ूरियों की प्रमुख विशेषताएँ:

      • निवेश और उत्पादन:
        • हाल ही में मंज़ूरी प्राप्त 22 परियोजनाओं में लगभग ₹41,863 करोड़ के निवेश का अनुमान है।
        • इन परियोजनाओं से लगभग ₹2,58,152 करोड़ मूल्य के उत्पादन की संभावना है।
      • रोज़गार सृजन:
        • इन परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 33,791 प्रत्यक्ष रोज़गार अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
        • इसके अतिरिक्त, सहायक, आपूर्ति और संबंधित उद्योगों में बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रोज़गार भी उत्पन्न होगा।
      • उत्पाद कवरेज:
        • इन मंज़ूरियों में 11 प्रमुख उत्पाद श्रेणियाँ शामिल हैं, जिनमें प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोज़र और लिथियम-आयन सेल जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स सम्मिलित हैं।
        • इसके साथ ही कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल जैसी उप-असेंबली तथा एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न और एनोड सामग्री जैसे आवश्यक सप्लाई-चेन इनपुट भी इसमें शामिल हैं।
      • भौगोलिक विस्तार:
        • इन परियोजनाओं के तहत निर्माण इकाइयाँ आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों में स्थापित की जाएँगी।
        • यह पहल देश में संतुलित और समावेशी औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की एक सुविचारित रणनीति को दर्शाती है।

महत्व:

      • घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूती: इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के स्थानीय निर्माण को प्रोत्साहित कर यह योजना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की एक प्रमुख कमज़ोरी (आयात पर अत्यधिक निर्भरता) को कम करने में सहायक है।
      • रोज़गार और निवेश में वृद्धि: प्रस्तावित निवेश और रोज़गार सृजन का व्यापक स्तर सरकार के औद्योगिक आधार को विस्तार देने और उच्च-कौशल एवं तकनीकी रोज़गार को बढ़ावा देने के लक्ष्य को दर्शाता है।
      • मूल्य श्रृंखला का विकास: विभिन्न कंपोनेंट्स और उप-असेंबली के उत्पादन को समर्थन देकर यह योजना देश में एक समग्र और मज़बूत मूल्य शृंखला के निर्माण में मदद करती है, जिससे आपूर्ति संबंधी जोखिम घटते हैं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।

निष्कर्ष:

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के अंतर्गत 22 अतिरिक्त परियोजनाओं को दी गई मंज़ूरी यह स्पष्ट करती है कि सरकार भारत को एक वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर और ठोस प्रयास कर रही है। बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित करने, रोज़गार के नए अवसर सृजित करने और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के माध्यम से यह पहल भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को अधिक आत्मनिर्भर, सशक्त और तकनीक-आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj