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Blog / 19 Feb 2026

एआई के लिए मानव विज़न

संदर्भ:

नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुशासन के लिए मानव (MANAV) विज़नप्रस्तुत किया। इस पहल के माध्यम से भारत स्वयं को विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के दृष्टिकोण से जिम्मेदार, संतुलित और मानव-केंद्रित एआई विकास का वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मानव विज़न के प्रमुख घटक:

मानव (MANAV) शब्द एआई के पाँच मूलभूत मार्गदर्शक सिद्धांतों का प्रतीक है:

      • M — नैतिक और मूल्य-आधारित प्रणाली: एआई का विकास और उपयोग मजबूत नैतिक ढाँचों पर आधारित होना चाहिए। इसके निर्णय मानवाधिकारों, सामाजिक मूल्यों और नैतिक जवाबदेही का सम्मान करें, ताकि तकनीक मानव हितों के अनुरूप कार्य करे।
      • A — जवाबदेह शासन: एआई का संचालन पारदर्शी, उत्तरदायी और नियमबद्ध होना चाहिए। इसके लिए स्पष्ट नीतियाँ, प्रभावी निगरानी तंत्र और डेवलपर्स व संचालकों को जवाबदेह ठहराने की सुदृढ़ व्यवस्था आवश्यक है।
      • N — राष्ट्रीय संप्रभुता: व्यक्तियों और राष्ट्रों से संबंधित डेटा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जिसका डेटा, उसका अधिकारके सिद्धांत के तहत डेटा स्वामित्व और राष्ट्रीय संप्रभुता को सशक्त बनाया जाना चाहिए।
      • A — सुलभ और समावेशी: एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचना चाहिए। यह कुछ कंपनियों या समूहों तक सीमित न रहकर समान अवसर, व्यापक पहुँच और तकनीकी लोकतंत्रीकरण को बढ़ावा दे।
      • V — वैध और प्रमाणित: एआई के सभी अनुप्रयोग कानून के अनुरूप, सत्यापित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित होने चाहिए, ताकि वास्तविक जीवन में उनका उपयोग विश्वास, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के साथ किया जा सके।

मानव विज़न का महत्व:

      • यह विज़न भारत को जिम्मेदार एआई विकास के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में स्थापित करता है, विशेषकर वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए एक मार्गदर्शक मॉडल के रूप में।
      • यह मानव-केंद्रित एआई को प्रोत्साहित करता है, जिसमें कल्याण, निष्पक्षता और नैतिक शासन को प्राथमिकता दी जाती है।
      • यह नवाचार और विनियमन के बीच संतुलन बनाता है, जिससे एआई विकास सुरक्षित, पारदर्शी और सामाजिक रूप से लाभकारी बन सके।
      • यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए मूल्य-आधारित ढाँचा प्रदान करता है, जो तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में साझा जिम्मेदारी को मजबूत करता है।

एआई के प्रति भारत की रणनीतिक दृष्टि:

      • समावेशी और सामाजिक उपयोगिता वाला एआई: इंडिया एआई मिशन के माध्यम से सरकार एआई को निष्पक्ष, समावेशी और समाजोपयोगी बनाने पर बल दे रही है। इसका उद्देश्य शहरीग्रामीण अंतर को कम करना और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा आजीविका के क्षेत्रों में सुधार लाना है।
      • व्यावहारिक उपयोग: दुग्ध क्षेत्र में अमूल जैसी संस्थाओं द्वारा एआई आधारित पहलों से 36 लाख से अधिक महिला कार्यकर्ताओं को लाभ मिल रहा है। इससे उत्पादकता बढ़ रही है और उनकी आय सशक्त हो रही है।
      • रोजगार और कौशल विकास: एआई को रोजगार के लिए खतरा नहीं, बल्कि परिवर्तन का अवसर माना जा रहा है। बड़े स्तर पर कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यबल को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
      • वैश्विक एआई ढाँचे और सहयोग: विश्व स्तर पर एआई शासन अधिक समावेशी और संतुलित ढाँचों की ओर बढ़ रहा है, जो पक्षपात, डिजिटल उपनिवेशवाद और उत्तरदक्षिण असमानताओं जैसी चुनौतियों का समाधान करने का प्रयास करते हैं।

प्रमुख पहलें:

      • ब्लेचली पार्क घोषणा (2023): 28 देशों ने उन्नत एआई जोखिमों से निपटने और साझा वैज्ञानिक समझ विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।
      • ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन एआई (GPAI): 2024 में भारत के नेतृत्व में इस मंच ने एआई को वैश्विक सार्वजनिक संपदा के रूप में स्वीकार करने और वैश्विक दक्षिण को सशक्त समर्थन देने की वकालत की।
      • एआई एक्शन समिट 2025 (पेरिस): भारत और फ्रांस की सह-अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन ने एआई के जिम्मेदार उपयोग और समान पहुंच पर बल दिया।
      • एआई इम्पैक्ट समिट 2026 (नई दिल्ली): इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय मनुष्‍य, पृथ्‍वी और प्रगतिहै, जिसका उद्देश्य एआई के लाभों को व्यापक और संतुलित रूप से साझा करना है।

निष्कर्ष:

मानव विज़न केवल तकनीकी नीति का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह मानव कल्याण, नैतिकता, समावेशन, जवाबदेही और राष्ट्रीय हितों पर आधारित एक व्यापक शासन-दृष्टि है। यह दर्शाता है कि भारत एआई को केवल तकनीकी प्रगति के रूप में नहीं, बल्कि मानव मूल्यों से जुड़े विकास के साधन के रूप में देखता है।