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Blog / 25 Jul 2026

भारत में एंटीबायोटिक उपयोग पर लैंसेट का अध्ययन

संदर्भ:

हाल ही में द लैंसेट पब्लिक हेल्थ (The Lancet Public Health) में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया कि भारत में 'वॉच (Watch)' श्रेणी की एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, जबकि इनका उपयोग केवल उन विशिष्ट संक्रमणों के लिए किया जाना चाहिए जहाँ प्रथम-पंक्ति (First-line) की एंटीबायोटिक दवाएँ प्रभावी नहीं होती हैं। अध्ययन ने एंटीबायोटिक दवाओं के अनुचित उपयोग और इससे प्रतिजैविक प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance- AMR) बढ़ने के खतरे पर चिंता व्यक्त की है।

WHO का अवेयर (AWaRe) एंटीबायोटिक वर्गीकरण:

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अवेयर (AWaRe- Access, Watch, Reserve) फ्रेमवर्क के अंतर्गत एंटीबायोटिक दवाओं को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है:

      • Access: सामान्य जीवाणु संक्रमणों के उपचार के लिए प्रथम-पंक्ति की एंटीबायोटिक दवाएँ, जिनसे प्रतिजैविक प्रतिरोध का जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है।
      • Watch: व्यापक-स्पेक्ट्रम (Broad-spectrum) एंटीबायोटिक दवाएँ, जिनका उपयोग केवल विशिष्ट संक्रमणों में किया जाना चाहिए क्योंकि इनसे प्रतिजैविक प्रतिरोध बढ़ने का जोखिम अधिक होता है।
      • Reserve: बहु-दवा प्रतिरोधी (Multidrug-resistant- MDR) संक्रमणों के उपचार के लिए अंतिम विकल्प (Last-resort) के रूप में उपयोग की जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएँ।

Lancet Study on India’s Antibiotic Use

भारत के सन्दर्भ में प्रमुख निष्कर्ष:

      • अध्ययन के अनुसार, भारत में प्रति 1,000 व्यक्तियों प्रतिदिन एंटीबायोटिक दवाओं की आदर्श आवश्यकता 14.7 डिफाइंड डेली डोज़ (Defined Daily Doses- DID) है, जिसमें शामिल हैं:
        • 7.8 DID Access एंटीबायोटिक।
        • 6 DID Watch एंटीबायोटिक।
        • 0.99 DID Reserve एंटीबायोटिक।
      • जबकि भारत में वास्तविक एंटीबायोटिक खपत 18.3 DID है, जिसमें शामिल हैं:
        • 4.5 DID Access एंटीबायोटिक।
        • 9.3 DID Watch एंटीबायोटिक।
        • 0.19 DID Reserve एंटीबायोटिक।
      • वर्तमान में कुल एंटीबायोटिक उपयोग का केवल 27% ही Access श्रेणी का है, जबकि अनुमानित आवश्यकता 52.3% है।
      • Watch एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग यह दर्शाता है कि अधिक शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाएँ अक्सर अनावश्यक रूप से दी जा रही हैं, जबकि देश में दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों का अधिक बोझ होने के बावजूद Reserve एंटीबायोटिक का उपयोग अपेक्षाकृत कम हो रहा है।

वैश्विक निष्कर्ष:

      • इस अध्ययन में 186 देशों एवं क्षेत्रों में एंटीबायोटिक उपयोग का विश्लेषण किया गया।
      • 72% देशों में आवश्यकता से अधिक एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग पाया गया।
      • 99% देशों में ऐसी एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक उपयोग हुआ जो प्रतिजैविक प्रतिरोध को बढ़ावा देती हैं।
      • 60% देश अब भी ऐसी एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग कर रहे हैं जिन्हें WHO नियमित उपयोग के लिए अनुशंसित नहीं करता।
      • वैश्विक स्तर पर लगभग 77% एंटीबायोटिक उपयोग Access श्रेणी से होना चाहिए, जो 2030 तक 70% Access एंटीबायोटिक उपयोग के संयुक्त राष्ट्र लक्ष्य का समर्थन करता है।

भारत में प्रमुख चिंताएँ:

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के पॉइंट प्रीवेलेंस सर्वेक्षण (2021–22) के अनुसार:

      • अस्पताल में भर्ती प्रत्येक चार में से लगभग तीन मरीजों को एंटीबायोटिक दवाएँ दी गईं।
      • 57% प्रिस्क्रिप्शन Watch एंटीबायोटिक, 38% Access एंटीबायोटिक तथा 2% Reserve एंटीबायोटिक के थे।
      • केवल 6% एंटीबायोटिक प्रिस्क्रिप्शन सूक्ष्मजीववैज्ञानिक (Microbiological) प्रमाणों के आधार पर दिए गए।
      • इंजेक्शन द्वारा दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं तथा एक जैसी (Duplicate) एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से प्रतिजैविक प्रतिरोध का जोखिम और बढ़ जाता है।

चुनौतियाँ:

      • व्यापक-स्पेक्ट्रम Watch एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग।
      • प्रथम-पंक्ति की Access एंटीबायोटिक का कम उपयोग।
      • वास्तविक बहु-दवा प्रतिरोधी संक्रमणों में Reserve एंटीबायोटिक का सीमित उपयोग।
      • एंटीबायोटिक लिखने से पहले पर्याप्त सूक्ष्मजीववैज्ञानिक परीक्षणों का अभाव।
      • प्रतिजैविक प्रतिरोध (AMR) का बढ़ता बोझ।

निष्कर्ष:

यह अध्ययन WHO के AWaRe Framework के अनुरूप एंटीमाइक्रोबियल स्टूअर्डशिप (Antimicrobial Stewardship) को सुदृढ़ करने, बेहतर नैदानिक परीक्षणों (Diagnostic Testing) तथा एंटीबायोटिक दवाओं के तर्कसंगत उपयोग (Rational Use) की आवश्यकता पर बल देता है। एंटीबायोटिक दवाओं के उचित उपयोग को सुनिश्चित करना प्रतिजैविक प्रतिरोध से निपटने तथा रोगियों को सबसे उपयुक्त उपचार उपलब्ध कराने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

 

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