संदर्भ:
हाल ही में, लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल द्वारा लक्षद्वीप को पूर्ण साक्षर केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया। यह उपलब्धि ULLAS–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत विशेष शिक्षण और मूल्यांकन अभियानों के बाद हासिल हुई, जिसमें सभी चिन्हित पात्र शिक्षार्थियों ने साक्षरता मूल्यांकन परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की।
पृष्ठभूमि:
2011 की जनगणना के अनुसार, लक्षद्वीप की साक्षरता दर लगभग 91.85% थी। प्रारंभिक सर्वेक्षण में 1,113 ऐसे वयस्क निरक्षर व्यक्तियों की पहचान की गई, जिन्हें साक्षरता संबंधी सहायता की आवश्यकता थी। इस कमी को दूर करने के लिए विशेष पहल की गईं, जिनमें शिक्षण कार्यक्रम, घर-आधारित शिक्षण सहायता और मूल्यांकन अभियान शामिल थे, ताकि पात्र शिक्षार्थियों को बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल प्राप्त करने में मदद मिल सके। इसके परिणामस्वरूप, सभी चिन्हित पात्र शिक्षार्थियों ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता मूल्यांकन परीक्षा (FLNAT) सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की।
ULLAS–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के बारे में:
ULLAS का पूरा नाम Understanding of Lifelong Learning for All in Society है। यह शिक्षा मंत्रालय द्वारा 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के निरक्षर व्यक्तियों के लिए लागू की जाने वाली केंद्र प्रायोजित योजना है।
इसके प्रमुख घटकों में शामिल हैं:
-
-
- बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता।
- महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल, जिसमें डिजिटल और वित्तीय साक्षरता शामिल हैं।
- बुनियादी शिक्षा।
- व्यावसायिक कौशल विकास।
- सतत शिक्षा।
- बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता।
-
यह योजना 2022–23 से 2026–27 तक संचालित है और स्वयंसेवा, सामुदायिक भागीदारी तथा प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षण को बढ़ावा देती है।
साक्षरता का मानदंड:
अगस्त 2024 में, शिक्षा मंत्रालय ने साक्षरता को समझ के साथ पढ़ने, लिखने और गणना करने की क्षमता के रूप में परिभाषित किया। इसमें डिजिटल और वित्तीय साक्षरता जैसे महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल भी शामिल हैं। राष्ट्रीय ढाँचे के अंतर्गत किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की 95% या उससे अधिक साक्षरता दर को पूर्ण साक्षरता के समकक्ष माना जाता है।
लक्षद्वीप की उपलब्धि का महत्त्व:
-
-
- सामाजिक सशक्तीकरण: साक्षरता नागरिकों को अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से समझने में सक्षम बनाती है।
- आर्थिक विकास: वित्तीय साक्षरता और बुनियादी संख्यात्मकता लोगों को रोजगार एवं आजीविका के अवसरों तक पहुँचने में सहायता करती है।
- डिजिटल समावेशन: डिजिटल साक्षरता ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल भुगतान तक पहुँच को आसान बनाती है।
- समावेशी विकास: वयस्क शिक्षा उन लोगों को सीखने के अवसर प्रदान करती है, जो बचपन में औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे।
- सतत विकास लक्ष्य: यह उपलब्धि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 4 (SDG 4) के अनुरूप है, जो समावेशी एवं समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा आजीवन सीखने के अवसरों पर केंद्रित है।
- सामाजिक सशक्तीकरण: साक्षरता नागरिकों को अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से समझने में सक्षम बनाती है।
-
चुनौतियाँ:
साक्षरता को बनाए रखने के लिए निरंतर सीखने के अवसर, डिजिटल पहुँच, व्यावसायिक प्रशिक्षण और नियमित मूल्यांकन आवश्यक हैं। इसके साथ ही, बुजुर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों और भौगोलिक रूप से अलग-थलग समुदायों पर विशेष ध्यान देना भी आवश्यक है।
निष्कर्ष:
लक्षद्वीप की पूर्ण साक्षरता की उपलब्धि वयस्क शिक्षा, सामुदायिक भागीदारी और लक्षित शिक्षण अभियानों के महत्त्व को दर्शाती है। हालाँकि, दीर्घकालिक सफलता साक्षरता को डिजिटल एवं वित्तीय सशक्तीकरण, आजीविका और आजीवन सीखने से जोड़ने पर निर्भर करेगी। यह उपलब्धि भारत में समावेशी विकास और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

