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Blog / 25 Jul 2026

कुशा मिसाइल: DRDO का स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम

संदर्भ:

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वीप से स्वदेशी कुशा लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Long-Range Surface-to-Air Missile - LR-SAM) का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। इस मिसाइल ने एक उच्च गति वाले हवाई लक्ष्य को सफलतापूर्वक भेदकर अपनी मार्गदर्शन प्रणाली (Guidance System), रडार एकीकरण (Radar Integration) तथा अवरोधन (Interception) क्षमता को प्रमाणित किया। यह सफलता प्रोजेक्ट कुशा के अंतर्गत भारत के स्वदेशी लंबी दूरी के वायु रक्षा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्रोजेक्ट कुशा के बारे में:

      • प्रोजेक्ट कुशा, जिसे एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (Extended Range Air Defence System - ERADS) भी कहा जाता है, DRDO द्वारा विकसित किया जा रहा एक स्वदेशी लंबी दूरी का सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल (SAM) कार्यक्रम है।
      • इसका उद्देश्य भारत की भविष्य की लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली की रीढ़ बनना तथा आयातित रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करना है। इसकी लंबी दूरी की अवरोधन क्षमता और बहु-स्तरीय (Layered) रक्षा संरचना के कारण इसकी तुलना अक्सर रूस की S-400 प्रणाली से की जाती है।
      • यह प्रणाली निम्नलिखित हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई है-
        • लड़ाकू विमान (Fighter Aircraft)
        • स्टील्थ विमान (Stealth Aircraft)
        • क्रूज़ मिसाइलें (Cruise Missiles)
        • हेलीकॉप्टर
        • ड्रोन (UAV)
        • एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) विमान
      • यह प्रणाली भारत के बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (Ballistic Missile Defence - BMD) कार्यक्रम के साथ मिलकर व्यापक वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रदान करेगी।

Kusha Missile-Project Kusha

प्रोजेक्ट कुशा की प्रमुख विशेषताएँ

    • इसमें तीन प्रकार की इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं-
      • M1 – 150 किमी की मारक क्षमता
      • M2 – 250 किमी की मारक क्षमता
      • M3 – 350–400 किमी की मारक क्षमता
    • यह बहु-स्तरीय (Multi-layered) वायु रक्षा कवच प्रदान करेगा।
    • इसे इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) से जोड़ा जाएगा।
    • उन्नत रडार, मोबाइल लॉन्चर तथा नेटवर्क-केंद्रित कमांड प्रणाली के माध्यम से यह वास्तविक समय (Real-Time) में लक्ष्य की पहचान, ट्रैकिंग और अवरोधन करेगा।
    • यह मिशन सुदर्शन चक्र का भी एक महत्वपूर्ण घटक है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को सशक्त बनाता है।

मिशन सुदर्शन चक्र क्या है?

प्रोजेक्ट कुशा, मिशन सुदर्शन चक्र का मुख्य आधार है। यह भारत की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2035 तक पूरे देश में स्वदेशी वायु एवं मिसाइल रक्षा कवच (Air and Missile Defence Shield) स्थापित करना है।

ऑपरेशन सिंदूर तथा यूक्रेन और पश्चिम एशिया के हालिया संघर्षों के बाद इस मिशन का महत्व और बढ़ गया है, क्योंकि इन घटनाओं ने ड्रोन, क्रूज़ मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों से उत्पन्न बढ़ते खतरों को उजागर किया।

इस मिशन का उद्देश्य-

    • सामरिक सैन्य परिसंपत्तियों (Strategic Military Assets) की सुरक्षा
    • महत्वपूर्ण नागरिक अवसंरचना (Critical Civilian Infrastructure) की रक्षा
    • बहु-स्तरीय एवं एकीकृत वायु रक्षा नेटवर्क का निर्माण

S-400 और प्रोजेक्ट कुशा में अंतर:

रूस की S-400 प्रणाली के विपरीत, प्रोजेक्ट कुशा का मुख्य उद्देश्य-

    • लड़ाकू विमान
    • स्टील्थ विमान
    • क्रूज़ मिसाइलें
    • ड्रोन

को निष्क्रिय करना है।

जबकि बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा का कार्य भारत का बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) कार्यक्रम करेगा।

दोनों प्रणालियाँ मिलकर भारत को एक व्यापक राष्ट्रीय वायु रक्षा कवच प्रदान करेंगी।

महत्त्व:

      • ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूती प्रदान करता है।
      • आयातित वायु रक्षा प्रणालियों पर निर्भरता कम करता है।
      • उन्नत मिसाइल तकनीक एवं एकीकृत रक्षा नेटवर्क विकसित करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
      • DRDO, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), निजी उद्योगों तथा अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।
      • भारत के रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र (Defence Industrial Ecosystem) को सुदृढ़ बनाता है।
      • राष्ट्रीय सुरक्षा को दीर्घकालिक रूप से मजबूत करता है।

निष्कर्ष:

कुशा मिसाइल का सफल प्रथम उड़ान परीक्षण भारत की रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रोजेक्ट कुशा और मिशन सुदर्शन चक्र के प्रमुख स्तंभ के रूप में यह प्रणाली भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा क्षमता को अत्यधिक सुदृढ़ करेगी तथा भविष्य में विकसित होते हवाई खतरों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करेगी। इसकी सफलता न केवल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को विश्व के अग्रणी उन्नत वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने वाले देशों की श्रेणी में भी स्थापित करेगी।

 

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