संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने नए छह-लेन सड़क पुल ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ का उद्घाटन किया। यह पुल पूर्वोत्तर भारत के आधारभूत ढाँचे के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सेतु का नाम प्राचीन कामरूप राज्य के प्रसिद्ध 7वीं शताब्दी के शासक कुमार भास्कर वर्मा के नाम पर रखा गया है, जिन्हें असम की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक विरासत में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए जाना जाता है।
पुल की मुख्य विशेषताएँ:
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- यह पुल लगभग 1.24 किलोमीटर लंबा है और ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर निर्मित है। यह 8.4 किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग का हिस्सा है, जो गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ता है। लगभग ₹3,030 करोड़ की लागत से बना यह छह-लेन एक्स्ट्राडोज्ड प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) पुल है, जो पूर्वोत्तर भारत में अपनी श्रेणी का पहला पुल है।
- एक्स्ट्राडोज्ड डिजाइन में गर्डर और केबल-स्टेड पुलों की विशेषताओं का संयोजन होता है, जिससे पुल को अधिक मजबूती, स्थायित्व और चौड़ी नदी पर लंबे विस्तार को संभालने की क्षमता मिलती है।
- क्षेत्र की उच्च भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए इसमें बेस आइसोलेशन तकनीक और फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग जैसी उन्नत इंजीनियरिंग प्रणालियाँ अपनाई गई हैं। इसके अलावा, ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (बीएचएमएस) के माध्यम से पुल की सुरक्षा और स्थिति की वास्तविक समय में निगरानी की जाती है।
- यह पुल लगभग 1.24 किलोमीटर लंबा है और ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर निर्मित है। यह 8.4 किलोमीटर लंबे संपर्क मार्ग का हिस्सा है, जो गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ता है। लगभग ₹3,030 करोड़ की लागत से बना यह छह-लेन एक्स्ट्राडोज्ड प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) पुल है, जो पूर्वोत्तर भारत में अपनी श्रेणी का पहला पुल है।
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कुमार भास्कर वर्मा पुल के प्रमुख लाभ:
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- बेहतर संपर्क: यह पुल गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच सुचारु आवागमन सुनिश्चित करता है, जिससे यात्रा का समय कम होता है और यातायात जाम की समस्या में कमी आती है।
- राष्ट्रीय संस्थानों और सांस्कृतिक स्थलों तक आसान पहुँच: यह पुल उत्तर गुवाहाटी के प्रमुख शैक्षणिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्रों तक सरल पहुँच प्रदान करता है, जिससे पर्यटन, शिक्षा और प्रशासन को बढ़ावा मिलता है।
- उत्तर गुवाहाटी का ‘ट्विन सिटी’ के रूप में विकास: यह पुल उत्तर गुवाहाटी को गुवाहाटी के पूरक शहर के रूप में विकसित करने में सहायक है, जिससे मुख्य शहर पर जनसंख्या और यातायात का दबाव कम होता है तथा नियोजित शहरी विस्तार को प्रोत्साहन मिलता है।
- क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन: बेहतर संपर्क के कारण व्यापार, निवेश और रियल एस्टेट गतिविधियों को गति मिलती है। साथ ही, निर्माण और संचालन के दौरान रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं।
- बेहतर संपर्क: यह पुल गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच सुचारु आवागमन सुनिश्चित करता है, जिससे यात्रा का समय कम होता है और यातायात जाम की समस्या में कमी आती है।
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भास्करवर्मन के बारे में:
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- भास्करवर्मन ने 7वीं शताब्दी ईस्वी में कामरूप (प्राचीन असम) पर शासन किया।
- वे संस्कृत और वैदिक शिक्षा के प्रमुख संरक्षक थे तथा उन्होंने विद्वानों को संरक्षण देकर साहित्यिक और बौद्धिक परंपराओं को समृद्ध किया।
- उनका शासनकाल शिक्षा, कला और सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था के लिए विशेष रूप से स्मरण किया जाता है।
- उन्होंने थानेसर के राजा हर्षवर्धन के साथ रणनीतिक गठबंधन किया और बंगाल के शासक शशांक के विरुद्ध सहयोग किया, जिससे कामरूप की राजनीतिक स्थिति और अधिक सुदृढ़ हुई।
- इसके अतिरिक्त, उन्होंने चीन के साथ भी राजनयिक संबंध बनाए। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, उन्होंने चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) की मेजबानी की, जो उनके राज्य के अंतरराष्ट्रीय संपर्क और प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
- उन्होंने निधानपुर और दुबी ताम्रपत्र अभिलेख जारी किए, जो अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत हैं। इन अभिलेखों से कामरूप के प्रशासन, भूमि अनुदान प्रणाली और सामाजिक संरचना की विस्तृत जानकारी मिलती है।
- असम के नलबाड़ी में स्थित कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत और प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय (KBVSASU) आज भी उनके नाम और आदर्शों को जीवित रखे हुए है। यह विश्वविद्यालय संस्कृत, साहित्य और प्राचीन अध्ययन के क्षेत्र में विशेष योगदान दे रहा है और ज्ञान-विकास की उनकी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।
- भास्करवर्मन ने 7वीं शताब्दी ईस्वी में कामरूप (प्राचीन असम) पर शासन किया।
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निष्कर्ष:
कुमार भास्कर वर्मा सेतु आधुनिक इंजीनियरिंग कौशल, दूरदर्शी योजना और सांस्कृतिक सम्मान का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका उद्घाटन असम के विकास में एक नए अध्याय की शुरुआत करता है। यह सेतु न केवल क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करता है, बल्कि यात्रा को सरल बनाकर सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति प्रदान करता है।

