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Blog / 22 Jan 2026

"किल स्विच और बीमा पूल” डिजिटल अरेस्ट से लड़ने के उपकरण

संदर्भ:

भारत की तीव्र गति से डिजिटलीकृत होती अर्थव्यवस्था के समक्ष "डिजिटल अरेस्ट" से संबंधित धोखाधड़ी, एक गंभीर एवं बढ़ता हुआ साइबर खतरा है। इस चुनौती से निपटने के लिए, गृह मंत्रालय के अधीन एक उच्च-स्तरीय अंतर-विभागीय समिति (IDC) ग्राहकों और बैंकों की सुरक्षा हेतु "किल स्विच" (Kill Switch) जैसे तकनीकी उपकरणों और बीमा तंत्रों की संभावनाओं का अन्वेषण कर रही है। इन घोटालों में, धोखेबाज वीडियो कॉल के माध्यम से कानून प्रवर्तन अधिकारियों का प्रतिरूपण करते हैं और गिरफ्तारी या संपत्ति जब्त करने की धमकी देकर पीड़ितों को धन हस्तांतरित करने हेतु विवश करते हैं।

डिजिटल गिरफ्तारी के बारे में:

      • डिजिटल गिरफ्तारी एक ऑनलाइन जबरन वसूली का तरीका है जहाँ धोखेबाज:
        • सीबीआई (CBI), ईडी (ED) या पुलिस अधिकारियों का प्रतिरूपण (Impersonate) करते हैं।
        • पीड़ितों पर आपराधिक या वित्तीय गलत काम करने का आरोप लगाते हैं।
        • वीडियो कॉल के जरिए फर्जी पूछताछ करते हैं।
        • पैसा हस्तांतरित न करने पर जेल या संपत्ति जब्त करने की धमकी देते हैं।
        • धोखाधड़ी करने वाले अक्सर क्रिप्टोक्यूरेंसी, वायर ट्रांसफर, या डिजिटल वॉलेट के माध्यम से धन एकत्र करने के बाद गायब हो जाते हैं।

डिजिटल गिरफ्तारी बढ़ने के कारण:

      • डिजिटल लेनदेन में भारी वृद्धि।
      • उपयोगकर्ताओं के बीच कम साइबर जागरूकता।
      • एआई (AI) द्वारा उत्पन्न आवाजों और डीपफेक (deepfakes) सहित तकनीकी परिष्कार।
      • कमजोर वैश्विक प्रवर्तन जो क्षेत्रीय कमियों का लाभ उठाता है।
      • अथॉरिटी के डर का फ़ायदा उठाकर साइकोलॉजिकल मैनिपुलेशन।

India Weighs Kill Switch And Fraud Cover To Fight Digital Arrest Scams -  Outlook Money

किल स्विच के बारे में:

प्रस्तावित "किल स्विच" यूपीआई (UPI) या बैंक ऐप्स में एकीकृत एक आपातकालीन सुविधा है। यदि कोई उपयोगकर्ता धोखाधड़ी का संदेह करता है, तो इसे दबाने से सभी लेनदेन तुरंत फ्रीज हो जाते हैं, जिससे धन को "म्यूल खातों" (mule accounts - अवैध रूप से धन प्राप्त करने वाले खाते) में जाने से रोका जा सकता है। यह जबरन वसूली वाले घोटालों के खिलाफ एक वास्तविक समय, सक्रिय सुरक्षा उपाय का प्रतिनिधित्व करता है।

धोखाधड़ी के खिलाफ बीमा:

एक बीमा तंत्र पर भी विचार किया जा रहा है। बैंकों और बीमाकर्ताओं द्वारा समर्थित और आईआरडीएआई (IRDAI) द्वारा विनियमित एक धोखाधड़ी बीमा पूल, प्रणालीगत जोखिम को फैला सकता है, जो आतंकवाद बीमा मॉडल के समान है, जिससे कवरेज किफायती और प्रभावी हो जाएगा।

डिजिटल गिरफ्तारी को रोकने के लिए संस्थागत प्रतिक्रिया:

      • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C): साइबर अपराध पैटर्न को ट्रैक करने के लिए बैंकों, दूरसंचार और फिनटेक फर्मों के साथ समन्वय करता है।
      • स्पूफ्ड कॉल को ब्लॉक करना: दूरसंचार सेवा प्रदाता (टीएसपी) घोटालों में उपयोग किए जाने वाले फर्जी अंतरराष्ट्रीय नंबरों को ब्लॉक करते हैं।
      • राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल: नागरिक cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन घोटालों की रिपोर्ट कर सकते हैं।
      • सीईआरटी-इन (CERT-In) दिशानिर्देश: जनता को कॉल सत्यापित करने, व्यक्तिगत डेटा साझा करने से बचने और संदिग्ध ऐप्स इंस्टॉल न करने की सलाह देते हैं।
      • अंतर-मंत्रालयी समिति (मई 2024): दक्षिण पूर्व एशिया से संचालित होने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क से निपटती है।

निष्कर्ष:

डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में कमजोरियों को उजागर करते हैं। "किल स्विच", बीमा पूल, और समन्वित संस्थागत उपाय व्यक्तिगत और प्रणालीगत दोनों जोखिमों को कम कर सकते हैं। नागरिकों की सुरक्षा, वित्तीय लचीलेपन को मजबूत करने और विकसित हो रहे साइबर खतरे के परिदृश्य का मुकाबला करने के लिए सक्रिय, बहु-हितधारक रणनीतियाँ आवश्यक हैं।