होम > Blog

Blog / 13 Feb 2026

केन-बेतवा लिंक परियोजना (KBLP)

संदर्भ:

हाल ही में, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। बिजावर तहसील कार्यालय के पास प्रदर्शनकारियों (मुख्य रूप से आदिवासी ग्रामीणों) और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें पत्थरबाजी और सरकारी काम में बाधा डालने की घटनाएं हुईं। यह आंदोलन मुख्य रूप से उचित मुआवजे, निष्पक्ष पुनर्वास और हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांगों को लेकर शुरू हुआ था।

परियोजना के बारे में:

केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (NPP) के तहत भारत की पहली प्रमुख राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है। इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अधिशेष (Surplus) जल को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी में स्थानांतरित करना है, जिससे विशेष रूप से सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र को लाभ होगा। 

Ken-Betwa Link Project

मुख्य आंकड़े और लक्ष्य:

      • इस बड़ी परियोजना की अनुमानित लागत ₹44,650 करोड़ है, जिसके माध्यम से बुंदेलखंड क्षेत्र की कायाकल्प करने का लक्ष्य रखा गया है।
      • परियोजना के पूर्ण होने पर 10.62 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और लगभग 62 लाख लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा। ऊर्जा के क्षेत्र में यह परियोजना कुल 130 मेगावाट विद्युत् का उत्पादन करेगी, जिसमें 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा शामिल है।
      • इसके तहत 77 मीटर ऊंचे दौधन बांध का निर्माण किया जाएगा, साथ ही 221 किमी लंबी नहर और 2 किमी की एक सुरंग बनाई जाएगी ताकि पानी का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित हो सके।
      • जल साझाकरण के समझौते के तहत, मध्य प्रदेश को सालाना 2,350 MCM (मिलियन क्यूबिक मीटर) और उत्तर प्रदेश को 1,700 MCM पानी आवंटित किया जाएगा, जो दोनों राज्यों के बीच क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करेगा।

परियोजना से जुड़ी चिंताएं:

      • इस परियोजना ने महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और सामाजिक सवाल खड़े किए हैं:
        • पारिस्थितिक प्रभाव: 9,000 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि जलमग्न हो जाएगी, जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का 10% हिस्सा शामिल है। इससे वन्यजीवों के आवास और जैव विविधता को खतरा है। 
        • विस्थापन: छतरपुर और पन्ना जिलों के कई गांवों को विस्थापन का सामना करना पड़ रहा है, जिससे भूमि अधिग्रहण, मुआवजे और आजीविका की बहाली की समस्याएं पैदा हो रही हैं।
        • स्थानीय विरोध: परामर्श की कमी और पुनर्वास में देरी के कारण ग्रामीणों में आक्रोश है, जो अक्सर विरोध प्रदर्शनों और हिंसा का रूप ले लेता है।

परियोजना के लाभ:

      • चिंताओं के बावजूद, इस परियोजना के कई सामाजिक-आर्थिक लाभ हैं:
      • सूखा की समस्या से निदान: बुंदेलखंड के 13 जिलों को जल सुरक्षा प्रदान करना और कृषि उत्पादकता बढ़ाना।
      • ऊर्जा उत्पादन: नवीकरणीय ऊर्जा (हाइड्रो और सोलर) क्षमता का समर्थन करना। 
      • क्षेत्रीय विकास: आजीविका में सुधार, पीने के पानी तक पहुंच और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के बीच क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।

निष्कर्ष:

केन-बेतवा लिंक परियोजना भारत में 'विकास बनाम पर्यावरण और सामाजिक समानता' की चुनौती का एक प्रमुख उदाहरण है। हालांकि यह जल सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा का वादा करती है, लेकिन इसकी सफलता पारदर्शी पुनर्वास, पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और सहभागी शासन पर निर्भर करती है। हालिया हिंसक विरोध प्रदर्शन समावेशी योजना और प्रभावित समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।