संदर्भ:
हाल ही में जोधपुर की लगभग 200 वर्ष पुरानी पारंपरिक फुटवियर कला मोजरी शिल्प को केंद्र सरकार द्वारा भौगोलिक संकेतक टैग प्रदान किया गया है। यह मान्यता कारीगरों की सुरक्षा, बेहतर ब्रांडिंग और निर्यात के अवसरों को बढ़ाने में सहायक होगी।
जोधपुरी मोजरी के बारे में:
जोधपुरी मोजरी एक हस्तनिर्मित चमड़े की पारंपरिक जूती है, जो अपनी कढ़ाई, मजबूती, लचीलेपन और पारंपरिक डिजाइन के लिए प्रसिद्ध है। राजस्थान की गर्म जलवायु के लिए यह उपयुक्त है क्योंकि इसकी संरचना हल्की और हवादार होती है।
मोजरी को पुरुष और महिला दोनों पहनते हैं। यह एक स्लिप-ऑन जूता होता है, जिसे घरों और मंदिरों में आसानी से उतारा जा सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
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- यह शिल्प मुख्य रूप से जिनगर समुदाय द्वारा किया जाता है, जो परंपरागत रूप से घोड़े की काठी बनाने के कार्य से जुड़े थे। जिनगर शब्द का संबंध जीन (काठी) से है, जिसका अर्थ है काठी बनाने वाले।
- ऐतिहासिक रूप से यह समुदाय राजसी सेनाओं के लिए घोड़ों की काठी तथा तलवारों और खंजरों के चमड़े के आवरण तैयार करता था।
- स्थानीय परंपराओं के अनुसार, एक शाही विवाह के अवसर पर जिनगर समुदाय द्वारा बनाए गए रचनात्मक डिजाइन वाले चमड़े के जूतों से जोधपुर के शासक प्रभावित हुए, जिसके बाद समुदाय ने जूते बनाने का कार्य अपनाया। समय के साथ मोजरी जोधपुर की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गई।
- यह शिल्प मुख्य रूप से जिनगर समुदाय द्वारा किया जाता है, जो परंपरागत रूप से घोड़े की काठी बनाने के कार्य से जुड़े थे। जिनगर शब्द का संबंध जीन (काठी) से है, जिसका अर्थ है काठी बनाने वाले।
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GI टैग के बारे में:
भौगोलिक संकेतक (GI) टैग एक ऐसा चिन्ह है, जो उन उत्पादों को दिया जाता है जिनकी विशेष गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या पहचान किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र से जुड़ी होती है। यह किसी उत्पाद की पहचान को उसके उत्पादन क्षेत्र से जोड़ता है।
कानूनी ढांचा:
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पहलू |
विवरण |
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नियामक कानून |
वस्तुओं के भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 |
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प्रभावी तिथि |
सितंबर 2003 |
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उद्देश्य |
भौगोलिक उत्पादों का संरक्षण और दुरुपयोग को रोकना |
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अंतरराष्ट्रीय संबंध |
WTO के TRIPS समझौते के अनुरूप |
भारत ने GI कानून को पारंपरिक उत्पादों को बौद्धिक संपदा के रूप में सुरक्षित रखने और उनके आर्थिक महत्व को बढ़ावा देने के लिए लागू किया।
प्रशासनिक संस्था:
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- GI पंजीकरण का कार्य भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, चेन्नई द्वारा किया जाता है, जो उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आती है।
- बौद्धिक संपदा अधिकारों का समग्र प्रशासन पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक (द्वारा किया जाता है।
- GI पंजीकरण का कार्य भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, चेन्नई द्वारा किया जाता है, जो उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आती है।
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वैधता अवधि:
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- GI पंजीकरण की वैधता 10 वर्षों तक होती है।
- इसे समय-समय पर नवीनीकृत किया जा सकता है।
- GI पंजीकरण की वैधता 10 वर्षों तक होती है।
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भारत में पहला GI टैग:
भारत में GI टैग प्राप्त करने वाला पहला उत्पाद दार्जिलिंग चाय (2004-05) थी। यह भारत के GI ढांचे के अंतर्गत संरक्षित होने वाला पहला उत्पाद बना।
GI टैग के लाभ:
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- अनधिकृत उपयोग के विरुद्ध कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
- पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करता है।
- बाजार में उत्पाद की पहचान और प्रतिष्ठा बढ़ाता है।
- निर्यात को बढ़ावा देता है।
- स्थानीय कारीगरों और ग्रामीण रोजगार को सहायता प्रदान करता है।
- अनधिकृत उपयोग के विरुद्ध कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
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भारत में हाल के GI टैग:
हाल के GI मान्यता प्राप्त उत्पादों में शामिल हैं:
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- पश्चिम बंगाल के जोलभोरा संदेश और मोनोहारा।
- मध्य प्रदेश की खुरासानी इमली।
- झारखंड की भगैया सिल्क, कुचाई सिल्क, मुंडा आभूषण और बांस शिल्प।
- आंध्र प्रदेश की पोंडुरु खादी।
- पश्चिम बंगाल के जोलभोरा संदेश और मोनोहारा।
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निष्कर्ष:
जोधपुरी मोजरी को मिला GI टैग केवल एक पारंपरिक फुटवियर कला की मान्यता नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा को संरक्षित करने और कारीगर समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

