ईरान युद्ध और भारत की ऊर्जा सुरक्षा: इथेनॉल मिश्रण
संदर्भ:
ईरान–पश्चिम एशिया संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा संकट को बढ़ा दिया है। इस वजह से तेल की आपूर्ति बाधित हो रही है, खासकर होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) के माध्यम से, जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा गुज़रता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में पश्चिम एशिया युद्ध पर बोलते हुए कहा कि पिछले दशक में भारत का बढ़ाया गया इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (Ethanol Blending Programme) आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम करने में मदद कर रहा है।
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (EBP) के बारे में:
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- इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (EBP) 2003 में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य पेट्रोल में नवीनीकृत बायोफ्यूल इथेनॉल मिलाना है। इसके मुख्य लक्ष्य हैं:
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना
- वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना
- किसानों के लिए लाभकारी बाज़ार उपलब्ध कराना
- इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम (EBP) 2003 में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य पेट्रोल में नवीनीकृत बायोफ्यूल इथेनॉल मिलाना है। इसके मुख्य लक्ष्य हैं:
- भारत ने मार्च 2025 तक 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) हासिल कर लिया, जो 2030 के लक्ष्य से पहले है। मिश्रण स्तर 2014 में लगभग 1.5% था, जो 2025 तक 20% तक बढ़ गया। भविष्य में 2030 तक 27% (E27) लक्ष्य रखा गया है।
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इथेनॉल मिश्रण का महत्व:
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- ऊर्जा सुरक्षा: भारत लगभग 87–88% कच्चे तेल का आयात करता है। इथेनॉल मिश्रण से 2014 से अब तक 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
- पर्यावरणीय लाभ: कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन 50% तक कम होता है और हाइड्रोकार्बन 20% तक घटते हैं, जिससे 700 लाख टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन कम हुआ।
- किसान कल्याण: किसानों को 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया; गन्ना, मक्का और अधिशेष अनाज के लिए बाजार सुनिश्चित हुआ।
- ऊर्जा सुरक्षा: भारत लगभग 87–88% कच्चे तेल का आयात करता है। इथेनॉल मिश्रण से 2014 से अब तक 1.44 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
- इस प्रकार, इथेनॉल मिश्रण ऊर्जा, पर्यावरण और कृषि नीतियों को जोड़ता है।
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नीति समर्थन:
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- राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति (2018/2022): अधिक फीडस्टॉक्स (गुड़ का रस, मक्का, चावल) शामिल किए गए
- प्रधानमंत्री जी-वन योजना (Pradhan Mantri JI-VAN Yojana): फसल अवशेषों से 2G इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा
- ब्याज सब्सिडी योजना: डिस्टिलरी विस्तार पर 6% सब्सिडी
- GST में छूट: इथेनॉल पर 18% से घटाकर 5%
- ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस (2023): अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए
- राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति (2018/2022): अधिक फीडस्टॉक्स (गुड़ का रस, मक्का, चावल) शामिल किए गए
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ब्राजील मॉडल: मुख्य सीख
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- 1970 के तेल संकट के बाद ब्राजील का अनुभव एक सफल उदाहरण माना जाता है। प्रो-अल्कोहोल कार्यक्रम (1975) के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए:
- पेट्रोल में कम से कम 11% इथेनॉल मिलाना अनिवार्य किया गया।
- 1979 तक E100 वाहन हाइड्रस इथेनॉल पर चलने लगे।
- 1985 तक इथेनॉल उत्पादन लगभग 1,200 करोड़ लीटर पहुंचा और इसके लिए विशेष फ्यूल पंप स्थापित किए गए।
- 2003 में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन विकसित किए गए, जो पेट्रोल और इथेनॉल दोनों का इस्तेमाल कर सकते थे।
- पेट्रोल में कम से कम 11% इथेनॉल मिलाना अनिवार्य किया गया।
- 2024 तक ब्राजील के परिवहन ईंधन मिश्रण में इथेनॉल का हिस्सा 50% से अधिक हो गया और मिश्रण स्तर 27–30% तक पहुंचा। यह साबित करता है कि लगातार नीति, मजबूत अवसंरचना और तकनीकी नवाचार लंबे समय में सफलता सुनिश्चित करते हैं।
- 1970 के तेल संकट के बाद ब्राजील का अनुभव एक सफल उदाहरण माना जाता है। प्रो-अल्कोहोल कार्यक्रम (1975) के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए:
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भारत की प्रगति और नीति में अंतर:
भारत ने इथेनॉल उत्पादन को लगभग नगण्य स्तर से बढ़ाकर 1,000 करोड़ लीटर से अधिक किया है, जिसमें अब अनाज आधारित फीडस्टॉक्स पर अधिक निर्भरता है।
हालांकि, कुछ प्रमुख चुनौतियाँ हैं:
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- फ्लेक्स-फ्यूल वाहन और रूपांतरण अवसंरचना की कमी
- अलग डिपेंसिंग सिस्टम (E30, E100) का अभाव
- कराधान में असंगतियाँ (इथेनॉल GST के दायरे में, जबकि पेट्रोल को GST के बाहर रखा गया है)
- सरकार, ऑटो उद्योग और तेल विपणन कंपनियों के बीच समन्वय की आवश्यकता
- फ्लेक्स-फ्यूल वाहन और रूपांतरण अवसंरचना की कमी
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इन मुद्दों को सुलझाना जरूरी है ताकि इथेनॉल का इस्तेमाल वर्तमान सीमा से आगे बढ़ाया जा सके।
आगे की राह:
ईरान युद्ध भारत के लिए ब्राज़ील मॉडल को अपनाने का एक रणनीतिक अवसर प्रदान करता है। इसके मुख्य कदम इस प्रकार हैं:
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- मिश्रण लक्ष्यों को E20 से बढ़ाकर E30+ करना
- फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देना और मौजूदा वाहनों में रेट्रोफिटिंग करना
- मिश्रित ईंधन को GST के दायरे में लाकर कराधान को तर्कसंगत बनाना
- एथेनॉल के बुनियादी ढांचे और उत्पादन का सतत रूप से विस्तार करना
- मिश्रण लक्ष्यों को E20 से बढ़ाकर E30+ करना
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निष्कर्ष:
1970 से लेकर वर्तमान ईरान संघर्ष तक के वैश्विक तेल संकट यह स्पष्ट करते हैं कि ऊर्जा का विविधीकरण आवश्यक है। इथेनॉल अपनाने की गति बढ़ाकर भारत ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर सकता है, आयात पर निर्भरता कम कर सकता है और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है।

