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Blog / 13 May 2026

इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA): संरक्षण के लिए भारत की वैश्विक पहल

अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA)

संदर्भ:

हालिया रिपोर्टों के अनुसार चीन के अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) में शामिल होने की संभावना कम है। यह विकास उस समय सामने आया है जब 1 से 3 जून तक नई दिल्ली में IBCA का पहला वैश्विक शिखर सम्मेलन आयोजित होने वाला है, जिसमें लगभग 95 देशों के भाग लेने की उम्मीद है।

अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) के बारे में:

      • अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है जिसका मुख्यालय भारत में स्थित है। इसे भारत द्वारा 9 अप्रैल 2023 को, “प्रोजेक्ट टाइगरके 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुरू किया गया था। इस गठबंधन का उद्देश्य सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों- बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग मंच तैयार करना है।
      • इस पहल का क्रियान्वयन देश में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा किया जाता है। इसकी संस्थागत संरचना काफी हद तक अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) के मॉडल पर आधारित है, जिसमें सदस्य देशों की सभा, स्थायी समिति और सचिवालय शामिल हैं।

International Big Cat Alliance (IBCA)

सदस्यता और भागीदारी:

IBCA की सदस्यता संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के लिए खुली है, जिसमें रेंज (जहाँ बड़ी बिल्लियाँ पाई जाती हैं) और गैर-रेंज दोनों प्रकार के देश शामिल हैं। वर्तमान में इस गठबंधन में 24 सदस्य देश, तीन पर्यवेक्षक देश और कई अन्य भागीदार राष्ट्र शामिल हैं। सऊदी अरब ने अपनी सदस्यता की पुष्टि कर दी है, जबकि चीन की भागीदारी अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

चीन की स्थिति और संरक्षण स्थिति:

      • स्वतंत्र वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार चीन में जंगली बाघों की संख्या बहुत कम है, जो मुख्य रूप से रूस के साथ लगती उत्तर-पूर्वी सीमा क्षेत्रों तक सीमित है। इनमें मुख्य रूप से अमूर (साइबेरियन) बाघ शामिल हैं, जिनकी अनुमानित संख्या कैमरा-ट्रैप और भौगोलिक अध्ययन के आधार पर लगभग 50–70 बताई जाती है।
      • इसके विपरीत, भारत में जंगली बाघों की संख्या काफी अधिक है। नवीनतम आकलनों के अनुसार वर्ष 2022 में भारत में लगभग 3,167 बाघ थे, जिनमें मुख्य रूप से बंगाल टाइगर शामिल हैं, जो हिमालय से लेकर मध्य और दक्षिण भारत तक फैले संरक्षित अभयारण्यों में पाए जाते हैं।

IBCA की प्रमुख विशेषताएँ:

      • वैश्विक पहल: भारत द्वारा वर्ष 2023 में बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए शुरू की गई पहल।
      • शामिल प्रजातियाँ: बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा।
      • कानूनी स्थिति: वर्ष 2025 में यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी संगठन बन गया।
      • मुख्यालय: भारत
      • क्रियान्वयन संस्था: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)
      • वित्त पोषण: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 2023–2028 की अवधि के लिए ₹150 करोड़ की मंजूरी दी गई है।
      • प्रथम शिखर सम्मेलन: नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसका विषय है- बिग कैट्स को बचाओ, मानवता को बचाओ, पारिस्थितिकी तंत्र को बचाओ।

IBCA का महत्व:

      • यह गठबंधन आवास संरक्षण, शिकार प्रजातियों (prey base) की सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में वैश्विक सहयोग को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है। यह सदस्य देशों के बीच समन्वित कार्रवाई को भी बढ़ावा देता है, ताकि अवैध शिकार, आवास की हानि और मानववन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सके।
      • भारत के लिए IBCA वन्यजीव संरक्षण में एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में उसकी भूमिका को और मजबूत करता है। यह प्रोजेक्ट टाइगरकी सफलता पर आधारित है और भारत के संरक्षण कूटनीति (conservation diplomacy) के दायरे को भी व्यापक बनाता है।

निष्कर्ष:

हालाँकि IBCA शीर्ष शिकारी प्रजातियों (apex predators) के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच के रूप में उभर रहा है, लेकिन चीन की संभावित अनुपस्थिति बड़ी बिल्लियों के वितरण और संरक्षण प्राथमिकताओं में मौजूद भू-राजनीतिक और पारिस्थितिक असमानताओं को उजागर करती है। IBCA की सफलता व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी, वैज्ञानिक सहयोग और जैव विविधता संरक्षण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगी।

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