संदर्भ:
लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा निर्मित स्वदेशी बहुउद्देशीय पोत (MPV), आईएनएस समर्थक को 16 अक्टूबर, 2026 को कर्नाटक के कारवार में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इसका शामिल होना रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारत की प्रगति को दर्शाता है।
आईएनएस समर्थक के बारे में:
आईएनएस समर्थक का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा तमिलनाडु स्थित अपने कट्टुपल्ली शिपयार्ड में किया गया है। यह परियोजना 25 मार्च, 2022 को रक्षा मंत्रालय के साथ हस्ताक्षरित ₹887 करोड़ के अनुबंध का हिस्सा है, जो खरीद (भारतीय) श्रेणी के अंतर्गत आता है। इस पोत में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इसकी लंबाई 107 मीटर है, इसका विस्थापन 3,750 टन से अधिक है, यह अधिकतम 15 नॉट की गति प्राप्त कर सकता है और इसकी अनुमानित परिचालन सीमा 4,500 समुद्री मील है। आईएनएस उत्कर्ष इस परियोजना का दूसरा पोत है। समर्थक नाम का अर्थ “प्रस्तावक” या “समर्थन करने वाला” है, जबकि इसका आदर्श वाक्य “विजय ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है” (विजयार्थम् एकनिष्ठता) है।
भूमिकाएँ और क्षमताएँ:
आईएनएस समर्थक एक बहुमुखी प्लेटफॉर्म है, जिसे कई प्रकार के नौसैनिक अभियानों को संचालित करने के लिए तैयार किया गया है। इसके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
हथियारों और सेंसरों का परीक्षण: स्वदेशी हथियारों, सेंसरों और युद्ध प्रणालियों का परीक्षण एवं मूल्यांकन करना।
समुद्री निगरानी: टोही और अपतटीय गश्त में सहायता करना।
मानवरहित प्रणालियाँ: मानवरहित हवाई और सतही वाहनों के लिए मातृ पोत के रूप में कार्य करना।
HADR: मानवीय सहायता और आपदा राहत प्रदान करना।
अन्य अभियान: बचाव, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी कार्रवाई और सीमित चिकित्सा सहायता में सहयोग करना।
भारत के लिए महत्त्व:
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण: घरेलू निर्माण से विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होती है और भारत का रक्षा विनिर्माण तंत्र मजबूत होता है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी: L&T का योगदान नौसैनिक पोत निर्माण में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित करता है, जिससे नवाचार, कुशल रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
समुद्री सुरक्षा: यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में निगरानी और परिचालन तत्परता को समर्थन प्रदान कर सकता है, जो समुद्री संचार मार्गों, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण है।
स्वदेशी प्रौद्योगिकी का परीक्षण: आईएनएस समर्थक घरेलू स्तर पर विकसित हथियारों, सेंसरों और मानवरहित प्रणालियों के परीक्षण के लिए एक मंच प्रदान करता है, जिससे उनकी परिचालन प्रभावशीलता में सुधार करने में सहायता मिलती है।
निष्कर्ष:
आईएनएस समर्थक को भारतीय नौसेना में शामिल करना आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। स्वदेशी पोत निर्माण को मजबूत करके, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करके और समुद्री तत्परता को बढ़ाकर, भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता में सुधार कर सकता है तथा हिंद महासागर क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा कर सकता है।
