संदर्भ:
हाल ही में, भारतीय नौसेना ने मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में तीसरे माहे-श्रेणी के पनडुब्बी रोधी युद्धक उथले जल पोत (ASW-SWC) INS मंगरोल (P82) को नौसेना में शामिल किया। कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा निर्मित यह पोत भारत की तटीय रक्षा, पानी के भीतर निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को मजबूत करता है।
माहे-श्रेणी कार्यक्रम के बारे में:
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- माहे-श्रेणी कार्यक्रम भारतीय नौसेना की एक परियोजना है, जिसके अंतर्गत पुराने अभय-श्रेणी के कार्वेट पोतों को बदलने के लिए आठ पनडुब्बी रोधी युद्धक उथले जल पोत (ASW-SWC) बनाए जाने हैं। इस संबंध में 30 अप्रैल 2019 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे।
- इन पोतों की आपूर्ति जून 2028 तक निर्धारित है। यह कार्यक्रम नौसेना की तटीय युद्ध क्षमताओं के आधुनिकीकरण में सहायता करता है तथा आत्मनिर्भर भारत पहल के अंतर्गत स्वदेशी युद्धपोत निर्माण को बढ़ावा देता है।
- माहे-श्रेणी कार्यक्रम भारतीय नौसेना की एक परियोजना है, जिसके अंतर्गत पुराने अभय-श्रेणी के कार्वेट पोतों को बदलने के लिए आठ पनडुब्बी रोधी युद्धक उथले जल पोत (ASW-SWC) बनाए जाने हैं। इस संबंध में 30 अप्रैल 2019 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे।
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INS मंगरोल के बारे में:
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- INS मंगरोल माहे-श्रेणी श्रृंखला का तीसरा पोत है। इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आयातित रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम करने के भारत के प्रयासों को दर्शाता है।
- इस पोत का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के एक तटीय नगर और मछली पकड़ने के बंदरगाह मंगरोल के नाम पर रखा गया है। इसकी प्राथमिक भूमिका उथले तटीय जल में सक्रिय शत्रु पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है।
- INS मंगरोल माहे-श्रेणी श्रृंखला का तीसरा पोत है। इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आयातित रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम करने के भारत के प्रयासों को दर्शाता है।
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विशिष्टताएँ एवं डिजाइन:
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- माहे-श्रेणी के पोतों की लंबाई लगभग 78 मीटर है तथा इनका विस्थापन लगभग 900–1,100 टन है। ये डीजल इंजन और वाटरजेट प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करके लगभग 25 नॉट की अधिकतम गति प्राप्त कर सकते हैं। इनका डिजाइन उथले और सीमित जल क्षेत्रों में प्रभावी संचालन क्षमता प्रदान करता है।
- इन पोतों में RBU-6000 पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर, तीन नलियों वाले हल्के टॉरपीडो लॉन्चर, बारूदी सुरंग बिछाने वाली रेलें, 30 मिमी की नौसैनिक तोप और स्वदेशी पतवार पर लगे सोनार सिस्टम लगाए गए हैं।
- माहे-श्रेणी के पोतों की लंबाई लगभग 78 मीटर है तथा इनका विस्थापन लगभग 900–1,100 टन है। ये डीजल इंजन और वाटरजेट प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करके लगभग 25 नॉट की अधिकतम गति प्राप्त कर सकते हैं। इनका डिजाइन उथले और सीमित जल क्षेत्रों में प्रभावी संचालन क्षमता प्रदान करता है।
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प्रमुख भूमिकाएँ एवं क्षमताएँ:
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- INS मंगरोल को तटीय जलक्षेत्रों में पनडुब्बी संबंधी खतरों का मुकाबला करने के लिए तटीय पनडुब्बी रोधी युद्ध हेतु डिजाइन किया गया है। इसके सोनार सिस्टम पानी के भीतर मौजूद लक्ष्यों का पता लगाने और उनका पीछा करने में सहायता करते हैं, जबकि इसके हथियार शत्रु पनडुब्बियों पर हमला करने में सक्षम हैं।
- यह पोत पानी के भीतर निगरानी, खोज एवं बचाव (SAR), बारूदी सुरंग बिछाने तथा निम्न तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (LIMO) को भी अंजाम दे सकता है। ये क्षमताएँ बंदरगाहों, पोताश्रयों और तटीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को मजबूत करती हैं।
- INS मंगरोल को तटीय जलक्षेत्रों में पनडुब्बी संबंधी खतरों का मुकाबला करने के लिए तटीय पनडुब्बी रोधी युद्ध हेतु डिजाइन किया गया है। इसके सोनार सिस्टम पानी के भीतर मौजूद लक्ष्यों का पता लगाने और उनका पीछा करने में सहायता करते हैं, जबकि इसके हथियार शत्रु पनडुब्बियों पर हमला करने में सक्षम हैं।
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भारत के लिए महत्त्व:
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- यह कार्यक्रम पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने और उनका जवाब देने की भारत की क्षमता में सुधार करके तटीय सुरक्षा तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता को मजबूत करता है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री सुरक्षा हितों को भी समर्थन प्रदान करता है।
- भारतीय शिपयार्ड द्वारा इन पोतों का निर्माण आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहलों को आगे बढ़ाता है, घरेलू रक्षा विनिर्माण को प्रोत्साहित करता है तथा भारतीय आपूर्तिकर्ताओं और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए अवसर पैदा करता है।
- यह कार्यक्रम पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने और उनका जवाब देने की भारत की क्षमता में सुधार करके तटीय सुरक्षा तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता को मजबूत करता है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के समुद्री सुरक्षा हितों को भी समर्थन प्रदान करता है।
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निष्कर्ष:
INS मंगरोल को नौसेना में शामिल करना भारतीय नौसेना की तटीय युद्ध क्षमताओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। माहे-श्रेणी कार्यक्रम स्वदेशी जहाज निर्माण को विशिष्ट पनडुब्बी रोधी तकनीक के साथ जोड़ता है, जिससे तटीय रक्षा, समुद्री निगरानी और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के भारत के दीर्घकालिक उद्देश्य को बढ़ावा मिलता है।

