आईएनएस महेंद्रगिरि
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय नौसेना ने आईएनएस महेंद्रगिरि (Yard 12654) को प्राप्त किया, जो नीलगिरि-श्रेणी (Project 17A) के फ्रिगेट्स का छठा जहाज है। यह भारत की समुद्री रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित यह जहाज ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण पर भारत के बढ़ते फोकस को दर्शाता है।
प्रोजेक्ट 17A के बारे में:
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- नीलगिरि-श्रेणी के फ्रिगेट्स (Project 17A) शिवालिक-श्रेणी (Project 17) के उन्नत संस्करण हैं, जिनमें बेहतर स्टील्थ (गोपनीयता), स्वचालन और युद्ध क्षमता शामिल है। इस परियोजना के तहत कुल सात फ्रिगेट्स बनाए जा रहे हैं, जिन्हें दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड्स में विभाजित किया गया है—मुंबई की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) चार जहाजों का निर्माण कर रही है, जबकि कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) तीन जहाज बना रही है।
- इस परियोजना में लगभग 75% स्वदेशी सामग्री का उपयोग हो रहा है और इसमें 200 से अधिक एमएसएमई (MSMEs) शामिल हैं, जिससे भारत के घरेलू रक्षा औद्योगिक तंत्र को मजबूती मिल रही है और महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।
- नीलगिरि-श्रेणी के फ्रिगेट्स (Project 17A) शिवालिक-श्रेणी (Project 17) के उन्नत संस्करण हैं, जिनमें बेहतर स्टील्थ (गोपनीयता), स्वचालन और युद्ध क्षमता शामिल है। इस परियोजना के तहत कुल सात फ्रिगेट्स बनाए जा रहे हैं, जिन्हें दो प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड्स में विभाजित किया गया है—मुंबई की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) चार जहाजों का निर्माण कर रही है, जबकि कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) तीन जहाज बना रही है।
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सात फ्रिगेट्स की सूची:
इस बेड़े में INS नीलगिरि, INS हिमगिरि, INS उदयगिरि, INS तारागिरि, INS दुनागिरि, INS विंध्यगिरि और INS महेंद्रगिरि शामिल हैं। इन जहाजों को 2025 से 2026 के बीच क्रमिक रूप से शामिल (कमीशन/डिलीवर) किया गया है, जिसमें INS नीलगिरि को जनवरी 2025 में कमीशन किया गया और INS महेंद्रगिरि को अप्रैल 2026 में डिलीवर किया गया। इन जहाजों का चरणबद्ध शामिल होना नौसेना की परिचालन क्षमता और बेड़े के आधुनिकीकरण को निरंतर बढ़ावा देता है।
मुख्य तकनीकी विशेषताएँ:
प्रोजेक्ट 17A के फ्रिगेट्स में उन्नत स्टील्थ विशेषताएँ शामिल हैं, जैसे रडार-अवशोषित सामग्री और बेहतर हुल डिजाइन के माध्यम से कम रडार क्रॉस-सेक्शन। इन्हें इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन तकनीक से बनाया गया है, जिसमें पहले से तैयार (pre-outfitted) ब्लॉक्स को जोड़कर निर्माण समय को कम किया जाता है। ये जहाज लगभग 6,670 टन वज़न के हैं, लगभग 149 मीटर लंबे हैं, और CODOG या CODAG प्रणोदन प्रणाली के माध्यम से 28–32 नॉट्स की गति प्राप्त कर सकते हैं।
हथियार और सेंसर प्रणाली:
ये फ्रिगेट्स बहुआयामी युद्ध के लिए सुसज्जित हैं। वायु रक्षा के लिए इनमें 32-सेल Barak-8 (LR-SAM) प्रणाली है, जबकि सतह पर हमला करने की क्षमता 8 ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों के माध्यम से सुनिश्चित होती है। इनमें 76 मिमी सुपर रैपिड गन माउंट, AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) और पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) उपकरण जैसे टॉरपीडो ट्यूब, रॉकेट लॉन्चर और HUMSA-NG सोनार शामिल हैं।
उन्नत सेंसर जैसे MF-STAR AESA रडार मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग में सक्षम हैं, जबकि शक्ति इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, अवरोधन (interception) और जैमिंग की क्षमताएँ प्रदान करती है।
महत्व:
भारतीय नौसेना के वारशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा पूर्णतः डिज़ाइन किया गया प्रोजेक्ट 17A स्वदेशी रक्षा इंजीनियरिंग में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है। ये फ्रिगेट्स ब्लू-वॉटर ऑपरेशन्स के लिए बनाए गए हैं और INS विक्रांत के आसपास केंद्रित कैरियर बैटल ग्रुप्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे भारत की समुद्री शक्ति प्रक्षेपण क्षमता मजबूत होती है। भारतीय पर्वत श्रृंखलाओं पर आधारित नामकरण परंपरा, पहले की नीलगिरि-श्रेणी के जहाजों की विरासत को आगे बढ़ाती है और तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नौसैनिक परंपरा की निरंतरता का प्रतीक है।
निष्कर्ष:
नीलगिरि-श्रेणी फ्रिगेट कार्यक्रम के तहत INS महेंद्रगिरि का शामिल होना भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण और नौसेना आधुनिकीकरण में तेज़ प्रगति को दर्शाता है। उन्नत स्टील्थ, मारक क्षमता और स्वचालन से युक्त प्रोजेक्ट 17A भारतीय नौसेना की परिचालन तत्परता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक प्रमुख समुद्री शक्ति के रूप में उसकी भूमिका को सुदृढ़ करता है।

