होम > Blog

Blog / 25 Jul 2026

सिंधु जल संधि: भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखा

संदर्भ:

हाल ही में भारत द्वारा सिंधु जल संधि (IWT) को "स्थगित (In Abeyance)" रखने के निर्णय पर पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारत ने संधि में संशोधन एवं पुनर्विचार (Renegotiation) के लिए भी नोटिस जारी किया है, जिसका पाकिस्तान ने अभी तक कोई उत्तर नहीं दिया है।

सिंधु जल संधि क्या है?

      • सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षर किए गए थे। यह संधि सिंधु नदी तंत्र के जल के बंटवारे को नियंत्रित करती है।
      • पूर्वी नदियाँ: रावी, ब्यास और सतलुज का जल भारत को आवंटित किया गया।
      • पश्चिमी नदियाँ: सिंधु, झेलम और चिनाब मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित की गईं।
      • भारत को पश्चिमी नदियों पर घरेलू उपयोग, सिंचाई तथा रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजनाओं के लिए सीमित अधिकार प्राप्त हैं।

भारत ने संधि को स्थगित क्यों किया?

भारत ने निम्नलिखित कारण बताए हैं-

      • लगातार सीमा पार आतंकवाद।
      • पहलगाम आतंकवादी हमला।
      • राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएँ।

Indus Waters Treaty (IWT)

संधि के पुनर्विचार की आवश्यकता क्यों है?

यह संधि लगभग छह दशक पहले बनाई गई थी और वर्तमान चुनौतियों का समुचित समाधान नहीं करती। आज जलवायु परिवर्तन, हिमनदों का पिघलना, वर्षा के बदलते स्वरूप, बढ़ती जनसंख्या, जल की बढ़ती मांग तथा तकनीकी प्रगति ने जल प्रबंधन की आवश्यकताओं को बदल दिया है। साथ ही, इसमें पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flows), जल गुणवत्ता, आपदा प्रबंधन तथा समेकित नदी बेसिन प्रबंधन से संबंधित पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।

स्थायी सिंधु आयोग के बारे में:

संधि के तहत स्थायी सिंधु आयोग (PIC) की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य जल संबंधी आँकड़ों का आदान-प्रदान, निरीक्षण, तकनीकी सहयोग तथा विवाद समाधान है। हालांकि, इसका कार्यक्षेत्र मुख्यतः संधि के क्रियान्वयन तक सीमित है और यह आधुनिक नदी आयोगों की तरह व्यापक नदी प्रबंधन की भूमिका नहीं निभाता।

महत्त्व:

सिंधु नदी तंत्र उत्तरी भारत में सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, पेयजल तथा कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह संधि युद्धों और राजनीतिक तनाव के बावजूद लागू रही है, जिससे यह विश्व के सबसे सफल सीमापार जल-साझाकरण समझौतों में से एक मानी जाती है। साथ ही, सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत में होने के कारण चीन की ऊपरी धारा (Upstream) में होने वाली गतिविधियाँ भी भारत के लिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

आगे की राह:

संधि के अनुच्छेद XII के तहत भारत द्वारा संशोधन का अनुरोध किया जा सकता है। एक आधुनिकीकृत संधि में जलवायु अनुकूलन, पर्यावरण संरक्षण, बेहतर बाढ़ प्रबंधन, वैज्ञानिक आँकड़ों का आदान-प्रदान तथा मजबूत संस्थागत व्यवस्था को शामिल करते हुए भारत के जल एवं सुरक्षा हितों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

निष्कर्ष:

सिंधु जल संधि ने भारत और पाकिस्तान के बीच जल सहयोग बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। किंतु बदलते भूराजनैतिक परिदृश्य, जलवायु परिवर्तन और उभरती जल चुनौतियों को देखते हुए इसका पुनरीक्षण और आधुनिकीकरण सिंधु नदी बेसिन के सतत एवं न्यायसंगत प्रबंधन के लिए आवश्यक हो गया है।

 

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj