संदर्भ:
हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय वायु सेना (IAF) के लिए 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को ₹3.25 लाख करोड़ की लागत से स्वीकृति प्रदान की है। यह हाल के वर्षों में सबसे बड़े रक्षा अधिग्रहणों में से एक है और ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायु सेना अपनी स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की संख्या से कम पर संचालन कर रही है। इनमें से 18 विमान फ्रांस से फ्लाई-अवे स्थिति में प्राप्त होंगे, जबकि शेष 90 विमानों का निर्माण “मेक इन इंडिया” पहल के तहत देश में किया जाएगा।
रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) के बारे में:
रक्षा अधिग्रहण परिषद, रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में कार्य करने वाली भारत की रक्षा खरीद संबंधी सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था है। यह अधिग्रहण प्रस्तावों के लिए ‘एसेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) प्रदान करती है, दीर्घकालिक योजनाओं को स्वीकृति देती है तथा अनुमोदित कार्यक्रमों के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करती है।
राफेल सौदे को मिली स्वीकृति भारत की संरचित और कुशल रक्षा योजना प्रक्रिया को दर्शाती है।
स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा:
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- इस अधिग्रहण की एक प्रमुख विशेषता घरेलू उत्पादन है। लगभग 90 विमानों का संयोजन भारत में किया जाएगा, जिससे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रोजगार सृजन और एयरोस्पेस क्षेत्र में कौशल विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
- “बाय एंड मेक” मॉडल रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करता है, विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करता है तथा महत्वपूर्ण सैन्य प्रौद्योगिकियों में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करता है।
- इस अधिग्रहण की एक प्रमुख विशेषता घरेलू उत्पादन है। लगभग 90 विमानों का संयोजन भारत में किया जाएगा, जिससे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रोजगार सृजन और एयरोस्पेस क्षेत्र में कौशल विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
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राफेल के बारे में:
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- राफेल, एक 4.5 पीढ़ी का, ट्विन-इंजन, बहु-भूमिका (ओम्नीरोल) लड़ाकू विमान है, जो एक ही आक्रमण में वायु हमला, जमीनी हमला, टोही तथा परमाणु प्रतिरोध करने में सक्षम है।
- इसके उन्नत एवियोनिक्स में RBE2 AESA रडार, स्पेक्ट्रा (SPECTRA) इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली तथा मॉड्यूलर डेटा फ्यूज़न प्रणाली शामिल हैं।
- स्नेमा M88 इंजनों से संचालित यह विमान मैक 1.8 तक की गति से सुपरक्रूज़ कर सकता है और इसका युद्धक दायरा 1,000 किमी से अधिक है।
- इसके आयुधों में मेटियोर बीवीआर मिसाइल, SCALP/स्टॉर्म शैडो क्रूज़ मिसाइल तथा एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल शामिल हैं। भारतीय वायु सेना के लिए विशेष संशोधनों से इसकी उत्तरजीविता, उच्च-ऊँचाई प्रदर्शन तथा परिचालन लचीलापन और बढ़ गया है।
- राफेल, एक 4.5 पीढ़ी का, ट्विन-इंजन, बहु-भूमिका (ओम्नीरोल) लड़ाकू विमान है, जो एक ही आक्रमण में वायु हमला, जमीनी हमला, टोही तथा परमाणु प्रतिरोध करने में सक्षम है।
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रणनीतिक और परिचालन महत्व:
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- यह अधिग्रहण भारत के लड़ाकू विमान बेड़े में मौजूद महत्वपूर्ण क्षमतागत कमी को दूर करेगा और पश्चिमी तथा उत्तरी सीमाओं पर जारी सुरक्षा चुनौतियों के बीच तैयारियों को सुनिश्चित करेगा।
- राफेल बेड़े का विस्तार कर 176 विमानों तक (जिसमें 26 नौसैनिक राफेल-M विमान भी शामिल हैं) भारत बहु-आयामी परिचालन तत्परता और प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करता है।
- यह अधिग्रहण भारत के लड़ाकू विमान बेड़े में मौजूद महत्वपूर्ण क्षमतागत कमी को दूर करेगा और पश्चिमी तथा उत्तरी सीमाओं पर जारी सुरक्षा चुनौतियों के बीच तैयारियों को सुनिश्चित करेगा।
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निष्कर्ष:
परिचालन लाभों के अतिरिक्त, यह सौदा फ्रांस के साथ भारत की रक्षा साझेदारी को और मजबूत करता है, जिससे दीर्घकालिक रणनीतिक एवं तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलता है। उन्नत विदेशी तकनीक और घरेलू विनिर्माण के संयोजन के माध्यम से यह अधिग्रहण भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के लक्ष्य को आगे बढ़ाता है तथा यह दर्शाता है कि भारत उच्च-स्तरीय रक्षा प्रणालियों को अपनी सशस्त्र सेनाओं में सफलतापूर्वक एकीकृत करने में सक्षम है।

