संदर्भ:
हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर, गुजरात में गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र (GBRC) में एक उच्च-नियंत्रण जैव सुरक्षा स्तर-4 (BSL-4) प्रयोगशाला की आधारशिला रखी। इस सुविधा को भारत के लिए एक "स्वास्थ्य कवच" के रूप में वर्णित किया गया है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और जैव प्रौद्योगिकी क्षमता में एक नए चरण की शुरुआत है।
BSL-4 सुविधा के बारे में:
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- BSL-4 जैव सुरक्षा नियंत्रण के उच्चतम स्तर का प्रतिनिधित्व करता है। इसे दुनिया के सबसे खतरनाक और अत्यधिक संक्रामक रोगजनकों (Pathogens) पर शोध के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनके लिए वर्तमान में प्रभावी उपचार या टीके उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।
- प्रमुख गतिविधियाँ: रोगजनकों का अलगाव (Isolation), निदान, चिकित्सा और वैक्सीन विकास, तथा तीव्र प्रकोप प्रतिक्रिया। ये सभी कार्य कड़े नियंत्रण और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत किए जाते हैं।
- लागत और संरचना: यह प्रयोगशाला गुजरात राज्य जैव प्रौद्योगिकी मिशन (GSBTM) के तहत ₹362 करोड़ की लागत से 11,000 वर्ग मीटर में बनाई जाएगी। इसमें BSL-4, BSL-3, BSL-2 के साथ-साथ पशु अनुसंधान के लिए ABSL-4 और ABSL-3 जैसी कई मॉड्यूल सुविधाएं शामिल होंगी।
- ऐतिहासिक महत्व: पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के बाद यह भारत की दूसरी नागरिक BSL-4 प्रयोगशाला होगी, लेकिन किसी राज्य सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित और संचालित होने वाली यह पहली प्रयोगशाला है।
- BSL-4 जैव सुरक्षा नियंत्रण के उच्चतम स्तर का प्रतिनिधित्व करता है। इसे दुनिया के सबसे खतरनाक और अत्यधिक संक्रामक रोगजनकों (Pathogens) पर शोध के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनके लिए वर्तमान में प्रभावी उपचार या टीके उपलब्ध नहीं हो सकते हैं।
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रोगजनकों (Pathogens) के बारे में:
रोगजनक बीमारी फैलाने वाले ऐसे सूक्ष्मजीव होते हैं जिनमें वायरस, बैक्टीरिया, कवक , प्रोटोजोआ और कृमि शामिल हैं। ये किसी मेजबान (Host) के शरीर में प्रवेश कर अपनी संख्या बढ़ाते हैं और सामान्य शारीरिक कार्यों को बाधित करते हैं, जिससे संक्रामक रोग होते हैं।
संस्थानिक और रणनीतिक महत्व:
यह प्रयोगशाला गुजरात जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्र (GBRC) के तहत संचालित होगी, जिसके पास पहले से ही BSL-2+ सुविधा है। यह COVID-19 महामारी के दौरान SARS-CoV-2 जीनोम को अनुक्रमित करने वाले भारत के पहले संस्थानों में से एक था। नई सुविधा उच्च-नियंत्रण रोगजनक अनुसंधान के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगी, जो घातक मानव और पशु रोगों, विशेष रूप से ज़ूनोटिक संक्रमणों (जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियाँ) के प्रबंधन की क्षमता को मजबूत करेगी।
भारत में जैव सुरक्षा प्रयोगशाला परिदृश्य:
इस पहल से पहले, भारत में पुणे स्थित NIV में केवल एक नागरिक BSL-4 प्रयोगशाला थी। वायरस अनुसंधान और निदान प्रयोगशाला (VRDL) योजना के तहत, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश भर में महामारी की तैयारी बढ़ाने के लिए 154 BSL-2 और 11 BSL-3 प्रयोगशालाओं सहित कुल 165 जैव सुरक्षा प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी है।
भारत के लिए महत्व:
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- जैव सुरक्षा: यह देश की बायो-सिक्योरिटी, स्वास्थ्य तैयारियों और बीमारियों के प्रकोप को रोकने की शक्ति को बढ़ाता है।
- वन हेल्थ अप्रोच: वैक्सीन अनुसंधान एवं विकास और मानव व पशु स्वास्थ्य को एकीकृत करने वाले 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को समर्थन देता है।
- आत्मनिर्भरता: उच्च जोखिम वाले रोगजनकों के शोध के लिए विदेशी प्रयोगशालाओं पर निर्भरता कम होगी।
- वैश्विक नेतृत्व: वैश्विक जैविक अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
- जैव सुरक्षा: यह देश की बायो-सिक्योरिटी, स्वास्थ्य तैयारियों और बीमारियों के प्रकोप को रोकने की शक्ति को बढ़ाता है।
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निष्कर्ष:
गुजरात में राज्य-वित्तपोषित BSL-4 प्रयोगशाला की स्थापना भारत की सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। यह लैब वैज्ञानिकों को सबसे खतरनाक वायरस पर सुरक्षित रूप से रिसर्च करने की प्रेरणा देगी, जिससे बीमारियों का तुरंत पता लगाना और उनके टीके तेजी से बनाना आसान होगा। यह कदम न केवल भारत की स्वास्थ्य नीति को मजबूत करेगा, बल्कि देश को दुनिया भर में स्वास्थ्य सुरक्षा के मामले में एक अधिक सक्षम और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगा।

