संदर्भ:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी 2026 को गुजरात के साणंद में भारत के पहले बड़े पैमाने के सेमीकंडक्टर निर्माण-संबंधित संयंत्र का उद्घाटन किया। यह परियोजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत स्थापित की गई है। यह ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) सेमीकंडक्टर इकाई, माइक्रोन सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी इंडिया द्वारा विकसित की गई है, जिसमें ₹22,516 करोड़ का निवेश किया गया है। पूर्ण रूप से संचालन में आने पर इससे लगभग 5,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
सेमीकंडक्टर और उनके उपयोग:
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- सेमीकंडक्टर ऐसे पदार्थ होते हैं, आमतौर पर सिलिकॉन, जिनकी विद्युत चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है। यही विशेषता उन्हें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में विद्युत संकेतों को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त बनाती है।
- सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की आधारशिला हैं। इनका उपयोग माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी चिप (DRAM, NAND), सेंसर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तथा एकीकृत परिपथ (ICs) में होता है, जो स्मार्टफोन, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल, रक्षा प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा तंत्र, डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्लेटफॉर्म में प्रयुक्त होते हैं।
- सेमीकंडक्टर ऐसे पदार्थ होते हैं, आमतौर पर सिलिकॉन, जिनकी विद्युत चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है। यही विशेषता उन्हें इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में विद्युत संकेतों को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त बनाती है।
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इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM):
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन एक सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण का सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो, नवाचार को बढ़ावा मिले और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण एवं डिजाइन केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सके।
मिशन की प्रमुख विशेषताएँ:
चिप निर्माण इकाइयों (फैब), पैकेजिंग इकाइयों और डिजाइन केंद्रों के लिए वित्तीय एवं नीतिगत सहायता, जिसमें फैब परियोजनाओं के लिए परियोजना लागत का 50% तक (pari-passu आधार पर) समर्थन शामिल है।
वेफर निर्माण से लेकर उन्नत पैकेजिंग और परीक्षण तक पूरी मूल्य श्रृंखला में घरेलू और वैश्विक निवेश आकर्षित करने हेतु प्रोत्साहन।
देश में डिजाइन क्षमताओं, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों तथा कुशल मानव संसाधन का विकास।
वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत को एकीकृत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग।
लगभग ₹76,000 करोड़ के प्रावधान से समर्थित यह मिशन भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक सेमीकंडक्टर भागीदार के रूप में स्थापित करने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है।
साणंद संयंत्र का सामरिक महत्व:
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- साणंद स्थित माइक्रोन ATMP संयंत्र उन्नत DRAM और NAND वेफर्स को अंतिम उत्पादों, जैसे मेमोरी मॉड्यूल और सॉलिड-स्टेट ड्राइव (SSD) में परिवर्तित करेगा। ये कंप्यूटिंग, AI कार्यभार और डेटा भंडारण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं।
- यद्यपि यह इकाई मुख्यतः असेंबली और पैकेजिंग पर केंद्रित है, फिर भी यह भारत की व्यापक सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और ISM के अन्य परियोजनाओं का पूरक है।
- भारत की सेमीकंडक्टर पहल के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, गुजरात सहित अन्य राज्यों में भी निर्माण एवं चिप डिजाइन से जुड़ी परियोजनाएँ उभर रही हैं, जो रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती को प्रोत्साहित करेंगी।
- साणंद स्थित माइक्रोन ATMP संयंत्र उन्नत DRAM और NAND वेफर्स को अंतिम उत्पादों, जैसे मेमोरी मॉड्यूल और सॉलिड-स्टेट ड्राइव (SSD) में परिवर्तित करेगा। ये कंप्यूटिंग, AI कार्यभार और डेटा भंडारण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं।
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निष्कर्ष:
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के माध्यम से भारत का घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण पर जोर तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह पहल AI, 5G और रक्षा जैसे क्षेत्रों में विकास को गति देने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने और डिजाइन, निर्माण तथा पैकेजिंग में दीर्घकालिक स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करने में सहायक होगी।

