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Blog / 20 Jan 2026

खुले समुद्र में भारत की पहली समुद्री मछली पालन परियोजना

सन्दर्भ:

हाल ही में केंद्र सरकार ने अंडमान सागर में नॉर्थ बे पर भारत की पहली खुले समुद्र में समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया। यह परियोजना भारत की ब्लू इकोनॉमी से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य देश के विशाल महासागरीय संसाधनों की आर्थिक क्षमता का उपयोग करना है।

पहल के विषय में:

      • यह पहल पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, उसके तकनीकी अंग राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है।
      • यह परियोजना भारत की पहली खुले समुद्र में केज-आधारित समुद्री मछली पालन पहल है, जिसे अंडमान सागर की प्राकृतिक महासागरीय परिस्थितियों में लागू किया गया है।
      • यह पहल दो प्रमुख घटकों पर केंद्रित है:
        • समुद्री वनस्पति (सीवीड/समुद्री शैवाल की खेती): गहरे समुद्र में समुद्री शैवाल की खेती को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय मछुआरों को सीवीड के बीज वितरित किए गए।
        • समुद्री जीव (फिनफिश/पंखदार मछली पालन): एनआईओटी द्वारा डिज़ाइन किए गए खुले समुद्र के केज का उपयोग करते हुए केज-आधारित मछली पालन के लिए फिनफिश के बीज उपलब्ध कराए गए, जो ऑफशोर परिस्थितियों को सहन करने में सक्षम हैं।

🚨India Launches first open-Sea marine fish farming project in Andaman's  North Bay.

पहल का रणनीतिक महत्व:

      • ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा-
        • यह पहल भारत की ब्लू इकोनॉमी रणनीति की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य समुद्री संसाधनों की आर्थिक क्षमता का उपयोग करना है, ठीक उसी प्रकार जैसे भारत अपनी स्थलीय संपत्तियों का उपयोग करता रहा है।
      • तटीय और द्वीपीय समुदायों को सशक्त बनाना-
        • यह पायलट परियोजना वैज्ञानिक नवाचार को आजीविका सृजन के साथ जोड़ती है, जिससे स्थानीय मछुआरा समुदायों को प्रौद्योगिकी, बीज और समुद्री एक्वाकल्चर के लिए प्रशिक्षण का लाभ मिलता है।
        • इन हस्तक्षेपों का उद्देश्य रोजगार के अवसरों को बढ़ाना और तटीय तथा द्वीपीय आबादी के लिए आय के स्रोतों में विविधता लाना है।

समुद्री पालन को सुदृढ़ करने वाली प्रौद्योगिकी:

      • यह परियोजना एनआईओटी द्वारा विकसित आधुनिक खुले समुद्र के केज का उपयोग करती है, जिन्हें वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में सुरक्षित और प्रभावी रूप से काम करने के लिए तैयार किया गया है। यह पारंपरिक तटीय मछली पालन प्रणालियों की तुलना में एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति को दर्शाती है।
      • यह पहल तटीय क्षेत्रों पर दबाव डालने के बजाय समुद्र की प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप सतत तरीके अपनाती है, जिससे तटवर्ती पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाला दबाव कम होता है।

ब्लू इकोनॉमी का महत्व:

      • व्यापक समुद्री क्षेत्र
        • भारत की तटरेखा लगभग 7,500–11,098 किलोमीटर तक फैली हुई है, जिसमें 9 तटीय राज्य, 4 केंद्र शासित प्रदेश और अनेक द्वीप शामिल हैं।
        • भारत का विशेष आर्थिक क्षेत्र 20 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक में फैला हुआ है, जो गहरे समुद्र की मत्स्यिकी, एक्वाकल्चर तथा खनिज और ऊर्जा संसाधनों के दोहन की विशाल संभावनाएं प्रदान करता है।
      • आर्थिक योगदान
        • समुद्री क्षेत्र का भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 4 प्रतिशत का योगदान है, किंतु समग्र पारिस्थितिकी तंत्र लेखांकन के अभाव के कारण यह योगदान वास्तविक क्षमता से कम आंका गया प्रतीत होता है।
        • भारत के कुल वस्तु व्यापार का लगभग 95 प्रतिशत (आयतन के आधार पर) समुद्री मार्गों के माध्यम से संपन्न होता है, जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य में महासागरों के अत्यंत रणनीतिक महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
      • आजीविका और खाद्य सुरक्षा
        • मत्स्यिकी और एक्वाकल्चर क्षेत्र लाखों लोगों की आजीविका का आधार हैं, जिनमें मछली पकड़ने, प्रसंस्करण और सहायक गतिविधियों से जुड़े लोग शामिल हैं।
        • भारत विश्व के शीर्ष मछली उत्पादक देशों में शामिल है, जो इसकी वर्तमान क्षमताओं और भविष्य की अपार संभावनाओं को दर्शाता है।

निष्कर्ष:

अंडमान सागर में भारत की पहली खुले समुद्र में समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ देश की समुद्री क्षमता के दोहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रौद्योगिकी, सतत विकास और सामुदायिक भागीदारी के समन्वय के माध्यम से यह पहल महासागर-आधारित आर्थिक विकास की एक विस्तार योग्य आधारशिला रखती है और ब्लू इकोनॉमी को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में सुदृढ़ करती है।