संदर्भ:
हाल ही में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के स्थापना दिवस के अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने भारत की पहली स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर (African Swine Fever-ASF) वैक्सीन राष्ट्र को समर्पित की। यह वैक्सीन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (ICAR-NIHSAD), भोपाल द्वारा विकसित की गई है। यह भारत में पशुधन स्वास्थ्य, जैव-सुरक्षा तथा स्वदेशी वैक्सीन अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) क्या है?
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- अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक अत्यधिक संक्रामक एवं घातक वायरल रोग है, जो घरेलू तथा जंगली सूअरों को प्रभावित करता है। यह रोग अफ्रीकन स्वाइन फीवर वायरस (ASFV) के कारण होता है तथा इसकी मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत तक हो सकती है।
- यह रोग मनुष्यों में नहीं फैलता और न ही खाद्य सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष खतरा उत्पन्न करता है, किंतु सूअर पालन उद्योग को गंभीर आर्थिक क्षति पहुँचाता है। भारत में वर्ष 2020 से ASF के कई प्रकोप दर्ज किए गए हैं, जिनका सर्वाधिक प्रभाव पूर्वोत्तर राज्यों में देखा गया है।
- अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक अत्यधिक संक्रामक एवं घातक वायरल रोग है, जो घरेलू तथा जंगली सूअरों को प्रभावित करता है। यह रोग अफ्रीकन स्वाइन फीवर वायरस (ASFV) के कारण होता है तथा इसकी मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत तक हो सकती है।
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स्वदेशी वैक्सीन की प्रमुख विशेषताएँ:
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- यह भारत की पहली MA-104 सेल लाइन आधारित जीवित-क्षीणीकृत (Live-Attenuated) वैक्सीन है, जिसे ASFV जीनोटाइप-II के विरुद्ध विकसित किया गया है। इसमें लक्षित जीन विलोपन (Targeted Gene Deletions) तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे वायरस की रोग उत्पन्न करने की क्षमता कम हो जाती है, जबकि शरीर में प्रभावी प्रतिरक्षा विकसित होती है।
- यह वैक्सीन 8 सप्ताह से अधिक आयु के स्वस्थ सूअरों के लिए विकसित की गई है। इसे 1 मिलीलीटर इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है तथा 14 दिनों बाद एक बूस्टर डोज़ की अनुशंसा की गई है।
- इसका निर्माण गैर-स्वामित्व (Non-Proprietary) MA-104 सेल लाइन पर आधारित है, जिससे महंगे विदेशी उत्पादन प्लेटफॉर्म पर निर्भरता कम होगी और बड़े पैमाने पर कम लागत में उत्पादन संभव होगा।
- यह भारत की पहली MA-104 सेल लाइन आधारित जीवित-क्षीणीकृत (Live-Attenuated) वैक्सीन है, जिसे ASFV जीनोटाइप-II के विरुद्ध विकसित किया गया है। इसमें लक्षित जीन विलोपन (Targeted Gene Deletions) तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे वायरस की रोग उत्पन्न करने की क्षमता कम हो जाती है, जबकि शरीर में प्रभावी प्रतिरक्षा विकसित होती है।
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महत्व:
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- इस वैक्सीन का उद्देश्य अफ्रीकन स्वाइन फीवर के कारण होने वाली व्यापक पशु मृत्यु को कम करना, संक्रमित पशुओं के बड़े पैमाने पर वध (Mass Culling) की आवश्यकता को घटाना तथा सूअर पालकों की आजीविका की सुरक्षा करना है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत, जहाँ सूअर पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, वहाँ यह वैक्सीन अत्यधिक उपयोगी सिद्ध होगी।
- यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी वैक्सीन अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ करती है तथा पशुधन जैव-सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करती है। कम लागत पर बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता के कारण यह वैक्सीन देश में व्यापक टीकाकरण कार्यक्रमों को गति दे सकती है। साथ ही, भविष्य में भारत एशिया और अफ्रीका के देशों को किफायती ASF वैक्सीन उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
- इस वैक्सीन का उद्देश्य अफ्रीकन स्वाइन फीवर के कारण होने वाली व्यापक पशु मृत्यु को कम करना, संक्रमित पशुओं के बड़े पैमाने पर वध (Mass Culling) की आवश्यकता को घटाना तथा सूअर पालकों की आजीविका की सुरक्षा करना है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत, जहाँ सूअर पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, वहाँ यह वैक्सीन अत्यधिक उपयोगी सिद्ध होगी।
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निष्कर्ष:
स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर वैक्सीन का विकास भारत के पशु स्वास्थ्य एवं जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह न केवल ASF के प्रभावी नियंत्रण में सहायक होगी, बल्कि पशुपालन क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय की सुरक्षा करने तथा देश की जैव-सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

