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Blog / 25 Feb 2026

भारत की पहली आतंकवाद-विरोधी नीति

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर देश की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति और रणनीति 'प्रहार' का अनावरण किया। यह ऐतिहासिक सिद्धांत आतंकवाद के प्रति भारत के दृष्टिकोण को अलग-अलग  दृष्टिकोणों से बदलकर एक एकीकृत, सक्रिय और खुफिया-आधारित राष्ट्रीय रणनीति में बदलने का प्रयास करता है। 

आतंकवाद के बारे में:

भारत में आतंकवाद को हिंसा के अवैध उपयोग के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें बमबारी,घातक हथियार और खतरनाक सामग्री शामिल है, जिसका उद्देश्य राष्ट्र की एकता, अखंडता या सुरक्षा को खतरे में डालना या जनता में भय व्यापत करना है।

आतंकवाद की परिभाषा:

      • 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' की धारा 113 के तहत, एक आतंकवादी कृत्य तब माना जाता है जब कोई विस्फोटक, घातक हथियार या अन्य घातक साधनों के उपयोग के माध्यम से राष्ट्र की एकता, अखंडता या सुरक्षा को खतरे में डालता है या भय पैदा करता है।
      • प्रमुख कानून: 'गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम' (UAPA) ऐसी गतिविधियों से निपटने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला प्राथमिक कानून है।

'प्रहार' की आवश्यकता क्यों पड़ी:

      • दशकों के आतंकवाद-विरोधी प्रयासों के बावजूद, भारत को सीमा पार आतंकवाद, विकसित होते आंतरिक चरमपंथी खतरों और तकनीक-आधारित रणनीति का सामना करना पड़ा है। आतंकवादी समूहों और शत्रु संस्थाओं ने भर्ती करने, योजना बनाने और हमलों को अंजाम देने के लिए ड्रोन, एन्क्रिप्टेड संचार, साइबर प्लेटफॉर्म, क्रिप्टो फंडिंग और डार्क वेब का तेजी से लाभ उठाया है। अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे वैश्विक संगठन भी भारत के भीतर संवेदनशील लोगों को प्रभावित करने और कट्टरपंथी बनाने का प्रयास करते हैं।
      • खतरों के परिवर्तित स्वरूप के मद्देनज़र पारंपरिक प्रतिक्रियात्मक उपाय अपर्याप्त साबित हुए हैं। ऐसे मेंप्रहारका उद्देश्य एक समग्र राष्ट्रीय कार्य-ढांचा प्रस्तुत करना है, जो खुफिया तंत्र, परिचालन प्रतिक्रियाओं, विधिक कार्रवाई, सामाजिक सहभागिता तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एकीकृत कर एक सुसंगत और प्रभावी रणनीति सुनिश्चित करता है।

'प्रहार' सिद्धांत की मुख्य विशेषताएं:

      • रोकथाम: आतंकी साजिशों को नाकाम करने के लिए MAC (मल्टी-एजेंसी सेंटर) और JTFI के माध्यम से खुफिया जानकारी पर आधारित सक्रिय उपाय।
      • प्रतिक्रिया: स्थिति की गंभीरता के अनुसार चरणबद्ध और संतुलित कार्रवाई की जाती है। सामान्य घटनाओं में स्थानीय पुलिस तथा बड़ी और जटिल घटनाओं में NSG (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) जैसे विशेष बलों को तैनात किया जाता है।
      • समन्वय: बेहतर अंतर-एजेंसी सहयोग के लिए 'संपूर्ण-सरकार' और 'संपूर्ण-समाज' का दृष्टिकोण। 
      • कानून का शासन: आतंकवाद-विरोधी कार्रवाइयां संवैधानिक अधिकारों और न्यायिक निरीक्षण का सम्मान करती हैं।
      • मूल कारणों का समाधान: सामुदायिक जुड़ाव, शिक्षा और पुनर्वास के माध्यम से कट्टरपंथ से निपटना।
      • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: खुफिया जानकारी साझा करना, प्रत्यर्पण, कानूनी सहायता और बहुपक्षीय समन्वय।
      • लचीलापन: घटना के बाद स्वास्थ्य देखभाल, आर्थिक और सामाजिक सहायता सहित तेजी से सुधार।

महत्व और निहितार्थ:

      • 'प्रहार' भारत के सुरक्षा ढांचे में एक बड़े बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है:
        • यह तदर्थ या प्रतिक्रियात्मक उपायों के बजाय एक औपचारिक राष्ट्रीय सिद्धांत स्थापित करता है।
        • यह राज्यों और केंद्र के बीच परिचालन बाधाओं को कम करते हुए अंतर-एजेंसी एकीकरण को प्रोत्साहित करता है।
        • यह आधुनिक आतंकवाद के डिजिटल आयाम को पहचानते हुए, तकनीक और मानवीय खुफिया जानकारी के बीच की दूरी को पाटता है।
        • यह लोकतांत्रिक मानदंडों को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण, सुरक्षा अनिवार्यताओं और अधिकारों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाता है।

निष्कर्ष:

प्रहारभारत की पहली एकीकृत आतंकवाद-विरोधी नीति है, जो शून्य-सहिष्णुता के सिद्धांत पर आधारित है और खुफिया जानकारी के आधार पर काम करती है। इसका उद्देश्य आतंकवाद को रोकना, घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई करना, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाना, कानूनी सुरक्षा मजबूत करना, समाज को सुरक्षित बनाना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना है। आतंकवाद के बदलते स्वरूप को देखते हुए, ‘प्रहारभारत को पारंपरिक और नए दोनों प्रकार के खतरों से निपटने के लिए अधिक संगठित और सक्रिय बनाता है।