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Blog / 03 Apr 2026

भारत का ऊर्जा संक्रमण

संदर्भ:

हाल ही में, पश्चिम एशिया में ऊर्जा संकट और वैश्विक आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण भारत सरकार ने घरेलू और औद्योगिक ईंधन के रूप में LPG के स्थान पर LNG और विशेष रूप से पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) को प्राथमिकता देना शुरू किया है। इसी संदर्भ में भारत सरकार ने प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण (पाइपलाइनों और अन्य सुविधाओं का बिछाना, निर्माण, संचालन और विस्तार) आदेश, 2026 अधिसूचित किया, जो PNG नेटवर्क के विस्तार और LPG पर निर्भरता कम करने के लिए एक पारदर्शी और मानकीकृत नियामक ढांचा प्रदान करता है।

Transition from LPG to LNG PNG

गैसीय ईंधनों के प्रकार:

भारत में घरेलू और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए विभिन्न प्रकार के गैसीय ईंधनों का उपयोग किया जाता है।

      • तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG): यह प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है, जो तेल शोधन और प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण के दौरान प्राप्त होता है। इसे मुख्य रूप से सिलेंडर के माध्यम से घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
      • तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG): इसे अत्यंत निम्न तापमान पर ठंडा करके द्रवीकृत किया जाता है ताकि इसे समुद्री या सड़क मार्ग से आसानी से परिवहन किया जा सके। इसका उपयोग आमतौर पर उद्योगों और पावर प्लांटों में होता है।
      • पाइपलाइन प्राकृतिक गैस (PNG): यह प्राकृतिक गैस सीधे पाइपलाइन के माध्यम से घरों, व्यवसायों और संस्थानों तक पहुँचाई जाती है। PNG निरंतर आपूर्ति प्रदान करती है और उपयोग में अधिक सुविधाजनक होती है।
      • संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG): यह प्राकृतिक गैस को उच्च दबाव पर संपीड़ित कर वाहन ईंधन के रूप में उपयोग के लिए तैयार की जाती है।

India’s Energy Transition

LPG से LNG/PNG संक्रमण के प्रमुख कारण:

      • ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक जोखिम: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी रूप से आयात पर निर्भर है। LPG आयात का लगभग 90% हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, जो अत्यधिक अस्थिर क्षेत्र है। किसी भी तनाव या युद्ध की स्थिति में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके विपरीत, LNG के स्रोत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों में फैले हैं, जिससे आपूर्ति में लचीलापन आता है।
      • आर्थिक कारक और राजकोषीय प्रबंधन: LPG पर सरकार का सब्सिडी बोझ बढ़ रहा है, खासकर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के बाद। PNG/LNG को बढ़ावा देकर सरकार शहरी क्षेत्रों में सब्सिडी को कम कर सकती है और संसाधनों को ग्रामीण क्षेत्रों में लगा सकती है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतें कच्चे तेल से जुड़ी होती हैं और अस्थिर रहती हैं, जबकि PNG की कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर हैं।
      • रसद और बुनियादी ढांचा: LPG, सिलेंडर आधारित है जिसमें रिफिलिंग, भंडारण और ट्रक परिवहन की जरूरत होती है, जो महंगा और कार्बन-सघन है।
      • PNG पाइपलाइन आधारित है, जो लगातार और उपयोग के अनुसार भुगतानप्रणाली के साथ सरल आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
      • पर्यावरणीय प्रतिबद्धता: प्राकृतिक गैस (CH4) अन्य जीवाश्म ईंधनों की तुलना में कम CO2, NOx और सल्फर उत्सर्जित करती है। भारत 2030 तक अपनी ऊर्जा टोकरी में गैस की हिस्सेदारी 6% से 15% तक बढ़ाना चाहता है। PNG बुनियादी ढांचा इसके बिना संभव नहीं है।
      • सुरक्षा और उपभोक्ता सुविधा: PNG अधिक सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि गैस हवा से हल्की होती है और रिसाव होने पर जल्दी फैल जाती है। LPG के विपरीत, जो भारी होने के कारण जमीन पर जमा होकर विस्फोट का कारण बन सकती है।

निष्कर्ष:

LPG से LNG/PNG संक्रमण भारत की सोची-समझी ऊर्जा रणनीति है। यह देश को वैश्विक आपूर्ति झटकों से बचाता है, स्वच्छ और कुशल ऊर्जा तंत्र स्थापित करता है, और आर्थिक स्थिरता बढ़ाता है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों तक पाइपलाइन पहुँचाना अभी भी चुनौतीपूर्ण है और निरंतर निवेश की आवश्यकता है।