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Blog / 16 Feb 2026

भारत का रक्षा बजट : आधुनिकीकरण और क्षमता-निर्माण की दिशा में नीतिगत बदलाव

संदर्भ:

वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहाँ पारंपरिक युद्ध की अवधारणा अब बहु-आयामी (multi-domain) संघर्ष में परिवर्तित हो चुकी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित युद्ध प्रणालियाँ, ड्रोन स्वार्म तकनीक, साइबर हमले, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और अंतरिक्ष आधारित निगरानी तंत्र आज किसी भी देश की सैन्य क्षमता के निर्धारक बन चुके हैं। भारत के लिए यह परिवर्तन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि वह एक जटिल भू-राजनीतिक वातावरण में स्थित है जहाँ एक ओर उत्तरी सीमाओं पर चीन के साथ सैन्य तनाव है, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान की निरंतर रणनीतिक चुनौतियाँ मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की रक्षा जैसे नए आयाम भी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के केंद्र में आ गए हैं। अतः बदलती भूराजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियों के बीच तत्परता सुनिश्चित करने के लिए रक्षा क्षेत्र का आधुनिकीकरण आवश्यक है।

इन्हीं उभरती चुनौतियों के संदर्भ में केंद्रीय बजट-2026 में रक्षा क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व आवंटन किया गया है। यह बजट केवल वित्तीय वृद्धि का संकेत नहीं देता, बल्कि भारत की रक्षा नीति में एक संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है जहाँ ध्यान पारंपरिक बल-रखरखावसे हटकर क्षमता-निर्माण’ (capability creation) पर केंद्रित किया जा रहा है। यह विकास न केवल आंतरिक सुरक्षा बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता, औद्योगिक विकास और सामरिक स्वायत्तता के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

रक्षा बजट-2026 के प्रमुख प्रावधान:

    • केंद्रीय बजट 2026 में रक्षा क्षेत्र के लिए लगभग ₹7.85 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह राशि कुल केंद्रीय व्यय का लगभग 14–15 प्रतिशत है, जिससे स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शीर्ष स्थान पर है।
    • इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पूंजीगत व्यय (capital expenditure) में वृद्धि है, जिसके अंतर्गत लगभग ₹2.19 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। पूंजीगत अधिग्रहण के लिए ₹1.85 लाख करोड़ निर्धारित किए गए हैं, जो नए सैन्य उपकरणों, विमानों, नौसैनिक प्लेटफॉर्म और उन्नत निगरानी प्रणालियों की खरीद के लिए उपयोग किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, लगभग ₹1.39 लाख करोड़ की राशि घरेलू रक्षा उद्योगों से खरीद के लिए आरक्षित की गई है, जिसका उद्देश्य आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
    • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए भी बजट में वृद्धि की गई है, जिससे स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास, नवाचार और उन्नत रक्षा प्रणालियों के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। यह आवंटन भारत के रक्षा क्षेत्र को आयात-निर्भरता से मुक्त कर आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करने का प्रयास है।

रक्षा बजट के मुख्य बिंदु

    • केंद्रीय बजट 2026–27 में रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो सभी मंत्रालयों में सबसे बड़ा बजटीय प्रावधान है।
    • यह आवंटन वित्त वर्ष 2025–26 के बजट अनुमानों (बीई) की तुलना में 15.19% की वृद्धि को दर्शाता है और कुल केंद्रीय सरकारी व्यय का 14.67% है।
    • घरेलू रक्षा उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उनसे खरीद के लिए 1.39 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
    • वित्त वर्ष 2026–27 में पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना हेतु 12,100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो वित्त वर्ष 2025–26 की तुलना में प्रारंभिक चरण में 45.49% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।
    • वित्त वर्ष 2026–27 में डीआरडीओ का आवंटन 29,100.25 करोड़ रुपये रहा है, जो वित्त वर्ष 2025–26 के 26,816.82 करोड़ रुपये की तुलना में अधिक है।
    • भारत अभी दुनिया में चौथा सबसे ज़्यादा सेना पर खर्च करने वाला देश है, उसके पहले यूएस, चीन और रूस हैं।

रणनीतिक महत्व:

      • बजट-2026 में रक्षा व्यय में वृद्धि का वास्तविक महत्व उसके रणनीतिक प्रभाव में निहित है। पारंपरिक रूप से भारत की सैन्य संरचना मैनपावर-इंटेंसिवरही है, जहाँ बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती प्राथमिक रक्षा रणनीति का हिस्सा थी। किंतु आधुनिक युद्ध तकनीक-प्रधान हो चुका है, जिसमें नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध प्रणाली, सटीक-निर्देशित हथियार, रीयल-टाइम निगरानी और डेटा-आधारित निर्णय-प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
      • यह बजट भारत को टेक्नोलॉजी-इंटेंसिवसैन्य ढाँचे की ओर अग्रसर करने का प्रयास करता है। उन्नत वायुसेना प्लेटफॉर्म, नौसैनिक परिसंपत्तियों, ड्रोन प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता में निवेश से भारत की बहु-आयामी युद्ध क्षमता (multi-domain warfare capability) सुदृढ़ होगी। विशेष रूप से उत्तरी सीमाओं पर निगरानी क्षमता और समुद्री क्षेत्रों में नौसैनिक प्रभुत्व बढ़ाने के लिए यह निवेश अत्यंत महत्वपूर्ण है।
      • इसके अतिरिक्त, सूचना-आधारित युद्ध (information warfare) और साइबर सुरक्षा पर बढ़ता ध्यान भारत को भविष्य के हाइब्रिड युद्धों के लिए तैयार करेगा। इस प्रकार, बजट-2026 केवल सैन्य उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि एक समग्र रक्षा रणनीति के निर्माण की दिशा में कदम है।

आत्मनिर्भरता और रक्षा-औद्योगिक आधार:

      • रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) भारत की दीर्घकालिक सामरिक नीति का प्रमुख स्तंभ बन चुकी है। बजट-2026 में घरेलू रक्षा उद्योगों से खरीद के लिए आरक्षित राशि इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य न केवल आयात-निर्भरता को कम करना है, बल्कि घरेलू विनिर्माण क्षमता को विकसित कर रक्षा निर्यात को भी बढ़ावा देना है।
      • निजी क्षेत्र की भागीदारी, रक्षा स्टार्ट-अप्स और सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से भारत एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार विकसित कर सकता है। इसके अतिरिक्त, नागरिक और सैन्य प्रौद्योगिकी के समन्वय (civil-military fusion) से द्वैध-उपयोग (dual-use) तकनीकों का विकास संभव होगा, जो आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
      • यदि इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो भारत न केवल अपनी रक्षा आवश्यकताओं को घरेलू स्तर पर पूरा कर सकेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।

चुनौतियाँ:

      • वेतन एवं पेंशन व्यय का उच्च भार: यद्यपि बजट-2026 में रक्षा क्षेत्र के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं, फिर भी रक्षा व्यय का एक बड़ा हिस्सा अभी भी वेतन और पेंशन पर खर्च होता है। इससे सैन्य आधुनिकीकरण एवं नए उपकरणों की खरीद के लिए उपलब्ध संसाधन सीमित हो जाते हैं।
      • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया की जटिलता: रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया की जटिलता और लंबी समय-सीमा अक्सर आधुनिक सैन्य उपकरणों की समय पर उपलब्धता में बाधा उत्पन्न करती है, जिससे क्षमता-निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
      • घरेलू उद्योग की सीमित तकनीकी क्षमता: घरेलू रक्षा उद्योग की तकनीकी क्षमता, विशेष रूप से उन्नत एयरोस्पेस एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में, अभी भी वैश्विक मानकों के अनुरूप नहीं है, जो आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्रभावित करती है।
      • अनुसंधान एवं विकास (R&D) में सीमित निवेश: रक्षा अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में अपेक्षित स्तर पर निवेश का अभाव स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास में बाधा उत्पन्न करता है।
      • प्रौद्योगिकीय निर्भरता: उन्नत सैन्य तकनीकों के लिए विदेशी देशों पर निर्भरता आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है।
      • संस्थागत एवं नीतिगत सुधारों की आवश्यकता: इन चुनौतियों का समाधान केवल वित्तीय आवंटन से संभव नहीं है, बल्कि संस्थागत सुधार एवं प्रभावी नीति-निर्माण के माध्यम से ही रक्षा आधुनिकीकरण को गति प्रदान की जा सकती है।

आगे की राह:

      • भारत को रक्षा आधुनिकीकरण की दिशा में दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी। त्वरित और पारदर्शी अधिग्रहण प्रक्रिया, निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी और अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नीति-सुधार आवश्यक हैं।
      • सार्वजनिक-निजी साझेदारी के माध्यम से रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, थिएटर कमांड जैसी सैन्य संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है।
      • रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए गुणवत्ता मानकों और वैश्विक सहयोग पर भी ध्यान देना आवश्यक है। यह न केवल आर्थिक लाभ देगा, बल्कि भारत की सामरिक स्वायत्तता को भी सुदृढ़ करेगा।

निष्कर्ष:

केन्द्रीय बजट-2026 भारत की रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतिनिधित्व करता है, जहाँ ध्यान केवल सैन्य व्यय बढ़ाने पर नहीं बल्कि दीर्घकालिक क्षमता-निर्माण पर केंद्रित है। यदि वित्तीय संसाधनों के साथ-साथ संस्थागत सुधार और तकनीकी नवाचार को भी समान महत्व दिया जाए, तो भारत भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकेगा। इस प्रकार, रक्षा पर बजट न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने का माध्यम है, बल्कि भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता और वैश्विक शक्ति-स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

 

UPSC/PCS अभ्यास प्रश्न: केंद्रीय बजट-2026 में रक्षा आधुनिकीकरण पर बढ़ा हुआ व्यय भारत की सैन्य क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके रणनीतिक महत्व का विश्लेषण करते हुए रक्षा आधुनिकीकरण के समक्ष उपस्थित संरचनात्मक चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।