संदर्भ:
हाल ही में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने लोकसभा को सूचित किया कि 30 जून 2026 तक भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट तक पहुँच गई है।
भारत में पवन ऊर्जा की स्थिति:
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- 30 जून 2026 तक भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट है, जिससे यह देश के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में से एक बन गई है।
- पिछले तीन वित्तीय वर्षों में पवन ऊर्जा उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 2023–24 और 2024–25 में 83 बिलियन यूनिट से बढ़कर वित्त वर्ष 2025–26 में 106 बिलियन यूनिट हो गया।
- वार्षिक क्षमता वृद्धि भी वित्त वर्ष 2023–24 में 3,253 मेगावाट से बढ़कर वित्त वर्ष 2024–25 में 4,151 मेगावाट तथा वित्त वर्ष 2025–26 में रिकॉर्ड 6,057 मेगावाट हो गई।
- ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक संचयी पवन ऊर्जा स्थापना के मामले में भारत विश्व में चौथे स्थान पर रहा।
- 30 जून 2026 तक भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट है, जिससे यह देश के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में से एक बन गई है।
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राज्यवार पवन ऊर्जा वितरण:
भारत में पवन ऊर्जा का विकास मुख्यतः उन राज्यों में केंद्रित है जहाँ अनुकूल पवन संसाधन तथा लंबी समुद्री तटरेखाएँ उपलब्ध हैं।
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राज्य |
स्थापित क्षमता (मेगावाट) |
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गुजरात |
16,086 |
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तमिलनाडु |
12,273 |
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कर्नाटक |
8,896 |
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महाराष्ट्र |
6,318 |
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राजस्थान |
5,516 |
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आंध्र प्रदेश |
4,461 |
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मध्य प्रदेश |
3,686 |
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तेलंगाना |
128 |
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केरल |
71 |
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अन्य |
4 |
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कुल |
57,443 |
भारत में पवन ऊर्जा की संभावनाएँ:
राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE) के अनुसार, भारत में अनुमानित पवन ऊर्जा क्षमता:
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- 120 मीटर हब ऊँचाई पर 695.5 गीगावाट।
- 150 मीटर हब ऊँचाई पर 1,164 गीगावाट से अधिक।
- वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य में पवन ऊर्जा से कम-से-कम 140 गीगावाट का योगदान अपेक्षित है।
- 120 मीटर हब ऊँचाई पर 695.5 गीगावाट।
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पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने हेतु सरकारी पहलें:
सरकार ने पवन ऊर्जा के विकास में तेजी लाने के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें शामिल हैं:
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- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत पारेषण अवसंरचना का विकास।
- पात्र पवन एवं सौर परियोजनाओं के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (ISTS) शुल्क में छूट।
- वर्ष 2030 तक के लिए पारेषण विस्तार योजना की तैयारी।
- स्वचालित मार्ग के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति।
- नवीकरणीय क्रय दायित्व (RPO) तथा नवीकरणीय उपभोग दायित्व (RCO) की रूपरेखा को 2029–30 तक अधिसूचित करना।
- पवन, सौर, हाइब्रिड तथा फर्म एवं डिस्पैचेबल नवीकरणीय ऊर्जा (FDRE) परियोजनाओं हेतु संशोधित प्रतिस्पर्धी बोली दिशानिर्देश जारी करना।
- अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना का शुभारंभ।
- राष्ट्रीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के पुनःशक्तिकरण एवं जीवन विस्तार नीति, 2023 की अधिसूचना।
- अपतटीय पवन ऊर्जा पट्टा नियम, 2023 की अधिसूचना।
- प्रोटोटाइप पवन टरबाइन मॉडल की स्थापना हेतु संशोधित दिशानिर्देश जारी करना।
- पवन टरबाइन एवं उनके घटकों के लिए स्वीकृत मॉडल एवं निर्माता सूची (ALMM) की शुरुआत।
- ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस नियम, 2022 की अधिसूचना।
- नवीकरणीय ऊर्जा व्यापार को बढ़ावा देने हेतु ग्रीन टर्म अहेड मार्केट (GTAM) का शुभारंभ।
- लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) अथवा अग्रिम भुगतान व्यवस्था के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के उपाय।
- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत पारेषण अवसंरचना का विकास।
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चुनौतियाँ:
तेजी से प्रगति के बावजूद भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
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- भूमि अधिग्रहण एवं परियोजना स्वीकृतियाँ।
- पारेषण अवसंरचना में बाधाएँ।
- प्रमुख पवन ऊर्जा क्षेत्रों, विशेषकर राजस्थान में पक्षियों की उच्च मृत्यु दर।
- पुराने एवं कम दक्षता वाले पवन टरबाइनों का पुनःशक्तिकरण।
- पवन संसाधनों की परिवर्तनशीलता, जिसके कारण ग्रिड संतुलन एवं ऊर्जा भंडारण समाधान की आवश्यकता।
- भूमि अधिग्रहण एवं परियोजना स्वीकृतियाँ।
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निष्कर्ष:
भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। स्थापित क्षमता 57.44 गीगावाट तक पहुँच गई है तथा वित्त वर्ष 2025–26 में वार्षिक क्षमता वृद्धि का नया रिकॉर्ड बना है। देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की प्राप्ति एवं ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन, पारेषण अवसंरचना का विस्तार, अपतटीय पवन ऊर्जा का विकास तथा मौजूदा पवन ऊर्जा परियोजनाओं का आधुनिकीकरण आवश्यक होगा।

