चर्चा में क्यों?
अगस्त 2026 में भारत के प्रधानमंत्री की ताशकंद (उज्बेकिस्तान) की आधिकारिक यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) में अपग्रेड किया है। इस शिखर सम्मेलन में ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए 11 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन 2026 के मुख्य बिंदु:
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- ऊर्जा सुरक्षा (दीर्घकालिक यूरेनियम समझौता): भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए दोनों देशों ने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह उज्बेकिस्तान से भारत को मिलने वाली यूरेनियम आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करेगा।
- कनेक्टिविटी और वित्तीय समावेशन (UPI और UZQR एकीकरण): डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के क्षेत्र में भारत की बड़ी सफलता के तहत, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और उज्बेकिस्तान के HUMO नेटवर्क के बीच समझौता हुआ। इसके तहत भारतीय UPI अब उज्बेकिस्तान के राष्ट्रीय UZQR कोड के साथ एकीकृत होगा, जिससे डिजिटल व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- व्यापार और निवेश: वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 33% बढ़कर 1.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देशों ने 2030 तक 5 बिलियन डॉलर का व्यापार लक्ष्य रखा है। इसके लिए एक अधिमान्य व्यापार समझौते (PTA) पर बातचीत तेज की जा रही है।
- पर्यटन और संस्कृति: उज्बेकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिनों तक वीज़ा-मुक्त यात्रा की घोषणा की है। साथ ही, भारत ने अरल सागर बेसिन के पारिस्थितिकी सुधार के लिए 1 मिलियन डॉलर की सहायता और तर्मेज़ (Termez) में बौद्ध पुरातात्विक स्थलों (फयाज तेपा और कारा तेपा) के संरक्षण के लिए तकनीकी सहायता की घोषणा की है।
- ऊर्जा सुरक्षा (दीर्घकालिक यूरेनियम समझौता): भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देने के लिए दोनों देशों ने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह उज्बेकिस्तान से भारत को मिलने वाली यूरेनियम आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करेगा।
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ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध:
भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध सदियों पुराने सिल्क रोड (Silk Road) संस्कृति से जुड़े हैं।
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- बौद्ध विरासत: उज्बेकिस्तान के टर्मेज़ (Termez) में स्थित 'फायाज़ तेपा' (Fayaz Tepa) और 'कारा तेपा' (Kara Tepa) जैसे प्राचीन बौद्ध स्थल दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाते हैं।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: हालिया शिखर सम्मेलन में भारत ने इन प्राचीन बौद्ध स्थलों के संरक्षण के लिए तकनीकी सहायता देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, सूफीवाद और मुग़ल इतिहास ने भी दोनों देशों के जन-दर-जन (People-to-People) संबंधों को मजबूत किया है।
- बौद्ध विरासत: उज्बेकिस्तान के टर्मेज़ (Termez) में स्थित 'फायाज़ तेपा' (Fayaz Tepa) और 'कारा तेपा' (Kara Tepa) जैसे प्राचीन बौद्ध स्थल दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाते हैं।
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भारत के लिए उज्बेकिस्तान का रणनीतिक महत्व:
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- मध्य एशिया का प्रवेश द्वार: उज्बेकिस्तान भू-राजनीतिक रूप से मध्य एशिया के केंद्र में स्थित है। यह एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सीमाएं अन्य सभी चार मध्य एशियाई देशों और अफगानिस्तान से मिलती हैं। भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया पॉलिसी' (Connect Central Asia Policy) की सफलता के लिए उज्बेकिस्तान सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
- सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग: अफगानिस्तान में स्थिरता और धार्मिक कट्टरपंथ का मुकाबला करने के लिए दोनों देश खुफिया जानकारी साझा करते हैं। दोनों सेनाओं के बीच 'डस्टलिक' (Exercise Dustlik) सैन्य अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किया जाता है (7वां संस्करण अप्रैल 2026 में संपन्न हुआ)।
- यूरेशियाई एकीकरण: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन जैसे बहुपक्षीय मंचों पर उज्बेकिस्तान, भारत का एक मजबूत सहयोगी है।
- मध्य एशिया का प्रवेश द्वार: उज्बेकिस्तान भू-राजनीतिक रूप से मध्य एशिया के केंद्र में स्थित है। यह एकमात्र ऐसा देश है जिसकी सीमाएं अन्य सभी चार मध्य एशियाई देशों और अफगानिस्तान से मिलती हैं। भारत की 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया पॉलिसी' (Connect Central Asia Policy) की सफलता के लिए उज्बेकिस्तान सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
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प्रमुख चुनौतियाँ:
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- भौगोलिक बाधा: पाकिस्तान द्वारा पारगमन (Transit) मार्ग की अनुमति न देने के कारण भारत की मध्य एशिया तक सीधी पहुंच नहीं है।
- चाबहार बंदरगाह और INSTC की धीमी गति: ईरान के चाबहार बंदरगाह और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के माध्यम से कनेक्टिविटी विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन भू-राजनीतिक तनावों के कारण इसकी गति धीमी रही है।
- चीन का बढ़ता प्रभाव: चीन के 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के माध्यम से मध्य एशिया में बीजिंग का आर्थिक और ढांचागत प्रभुत्व भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है।
- भौगोलिक बाधा: पाकिस्तान द्वारा पारगमन (Transit) मार्ग की अनुमति न देने के कारण भारत की मध्य एशिया तक सीधी पहुंच नहीं है।
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आगे की राह:
भारत को उज्बेकिस्तान के साथ अपने संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए चाबहार बंदरगाह के माध्यम से परिवहन संपर्क को जल्द से जल्द क्रियान्वित करना होगा। इसके अतिरिक्त, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रक्षा उत्पादन और डिजिटल अर्थव्यवस्था (FinTech) जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर भारत, चीन के आर्थिक प्रभाव को संतुलित कर सकता है। 2026 का यह शिखर सम्मेलन न केवल दोनों देशों के आर्थिक हितों को साधेगा, बल्कि यूरेशियाई क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को भी सुदृढ़ करेगा।

