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Blog / 04 Feb 2026

भारत–अमेरिका व्यापार समझौता

संदर्भ:
हाल ही में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक प्रमुख व्यापार समझौते की घोषणा की, जिसके तहत भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क (टैरिफ) लगभग 50% से घटाकर 18% कर दिए गए हैं। इस व्यवस्था के हिस्से के रूप में भारत ने रूसी तेल की खरीद रोकने और अमेरिकी आयात पर व्यापार बाधाओं को कम करने पर सहमति जताई है, जो द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में नए सिरे से संतुलन (रीसेट) का संकेत देता है।

पृष्ठभूमि:

        • अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर दंडात्मक शुल्क लगाते हुए टैरिफ को 50% तक बढ़ा दिया था। इसमें 25% प्रतिकारात्मक (रिसिप्रोकल) शुल्क और भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की निरंतर खरीद से जुड़े अतिरिक्त 25% दंडात्मक शुल्क शामिल थे। इन ऊंचे शुल्कों से वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन और कृषि उत्पाद जैसे प्रमुख क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों के लिए अनिश्चितता बढ़ गई थी।
        • नए समझौते के तहत दंडात्मक शुल्क वापस ले लिया गया है और केवल संशोधित प्रतिकारात्मक शुल्क लागू रहेगा, जिसे 18% निर्धारित किया गया है।

India–U.S. Trade Deal

भारतअमेरिका व्यापार का संक्षिप्त अवलोकन:

        • सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 131.84 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
        • वस्तुओं और सेवाओं में व्यापार: भारत ने अच्छा व्यापार सरप्लस दर्ज किया, जिसमें वित्त वर्ष 2024-25 में अमेरिका को 86.51 बिलियन अमेरिकी डॉलर का एक्सपोर्ट और 45.33 बिलियन अमेरिकी डॉलर का इंपोर्ट शामिल है।
        • क्षेत्रीय संरचना: भारत के प्रमुख निर्यातों में औषधियां, दूरसंचार उपकरण, बहुमूल्य रत्न, पेट्रोलियम उत्पाद और रेडीमेड वस्त्र शामिल हैं।

लाभान्वित होने वाले प्रमुख निर्यात क्षेत्र:

        • टैरिफ में कमी से अमेरिकी बाजार में कई भारतीय क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की उम्मीद है:
          • वस्त्र एवं परिधान: पहले ऊंचे शुल्कों से प्रभावित यह क्षेत्र अब मांग में पुनरुत्थान के लिए तैयार है।
          • रत्न एवं आभूषण: कम शुल्क से बेहतर मूल्यांकन और निर्यात वृद्धि संभव।
          • सौर विनिर्माण:मेक इन इंडियासोलर सेल और मॉड्यूल को लागत लाभ मिलेगा।
          • इंजीनियरिंग वस्तुएं: पंप, कंप्रेसर और ऑटो कंपोनेंट जैसे उत्पाद अधिक मूल्य-प्रतिस्पर्धी बनेंगे।

समझौते का आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव:

        • बाजार प्रतिक्रिया: घोषणा के बाद भारतीय शेयर बाजारों और रुपये में तेजी देखी गई, जो निवेशकों के बढ़े भरोसे को दर्शाती है।
        • निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता: कम टैरिफ से भारतीय निर्यातकों को चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिलेगी।
        • व्यापक सहयोग: व्यापक वाणिज्यिक ढांचे के तहत भारत ने ऊर्जा, रक्षा उपकरण और विमान सहित अमेरिकी आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

चुनौतियां:

सकारात्मक घोषणा के बावजूद, विस्तृत कानूनी पाठ और क्षेत्रवार टैरिफ अनुसूचियों के अभाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। साथ ही, टैरिफ कटौती और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच से जुड़े भारत के दायित्वों पर भी स्पष्टता आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, कुछ वस्तुओं, विशेषकर इस्पात और एल्युमिनियम पर शुल्क औसत 18% से अधिक बने रह सकते हैं।

निष्कर्ष:

टैरिफ को 18% तक घटाने वाला भारतअमेरिका व्यापार समझौता द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह हालिया व्यापार तनावों को कम करता है और भारत की निर्यात संभावनाओं को मजबूत बनाता है। हालांकि विस्तृत क्रियान्वयन समय-सीमा और क्षेत्र-विशेष अनुसूचियों का इंतजार है, फिर भी यह समझौता व्यापार, प्रौद्योगिकी और निवेश के क्षेत्रों में गहराते रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है और भारत के लिए अमेरिका की भूमिका को एक प्रमुख आर्थिक साझेदार के रूप में सुदृढ़ करता है।