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Blog / 15 Jul 2026

भारत–यूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता

संदर्भ:

हाल ही में 15 जुलाई 2026 से भारतयूनाइटेड किंगडम व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) प्रभावी हो गया है। यह समझौता 25 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित किया गया था। यह समझौता हाल के वर्षों में भारत के सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों में से एक है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना है। 

CETA की प्रमुख विशेषताएँ:

      • CETA में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार, डिजिटल व्यापार, निवेश, श्रम गतिशीलता, नवाचार, सरकारी खरीद, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), लैंगिक समावेशन तथा पर्यावरणीय सहयोग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
      • यह समझौता यूनाइटेड किंगडम में भारत के लगभग 99% निर्यात पर शुल्क समाप्त करता है, जिससे कृषि, वस्त्र, औषधि, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग वस्तुएँ, रसायन और चमड़ा जैसे क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
      • यूनाइटेड किंगडम तुरंत 96.8% शुल्क मदों पर सीमा शुल्क समाप्त करेगा, जो कुल व्यापार मूल्य के 97.7% हिस्से को कवर करेगा। वहीं, भारत अपने आयातों के एक बड़े हिस्से पर धीरे-धीरे शुल्क में कमी करेगा। यह समझौता स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) उपायों तथा व्यापार में तकनीकी बाधाओं (TBT) के क्षेत्र में सहयोग के माध्यम से गैर-शुल्क बाधाओं को भी संबोधित करता है।

India–U.K. Comprehensive Economic and Trade Agreement

क्षेत्रवार लाभ:

      • कृषि और समुद्री क्षेत्र: भारतीय किसान और मछुआरे फलों, सब्जियों, मसालों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, झींगा, टूना और अन्य समुद्री उत्पादों के लिए शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच से लाभान्वित होने की उम्मीद है। बेहतर स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता (SPS) सहयोग से उत्पादों की अस्वीकृति का जोखिम कम होगा और निर्यात के अवसर बढ़ेंगे।
      • वस्त्र, इंजीनियरिंग और विनिर्माण: वस्त्रों, परिधानों, इंजीनियरिंग वस्तुओं, ऑटोमोबाइल पुर्जों और हस्तशिल्प पर शुल्क समाप्त होने से ब्रिटेन के बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। चमड़ा और जूता उद्योग जैसे श्रम-प्रधान MSME समूहों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
      • औषधि, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी: यह समझौता जेनेरिक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, स्मार्टफोन और डिजिटल सेवाओं के लिए बाजार पहुंच को बेहतर बनाता है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और पेशेवर सेवा प्रदाताओं को बेहतर बाजार अवसर तथा कुशल श्रमिकों की आसान आवाजाही से लाभ मिलेगा।

दोहरे सामाजिक सुरक्षा योगदान समझौते (DCC) के बारे में:

      • DCC का उद्देश्य उन भारतीय पेशेवरों की समस्या का समाधान करना है जिन्हें दोनों देशों में सामाजिक सुरक्षा योगदान देना पड़ता है।
      • इस समझौते के अंतर्गत भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में योगदान करने वाले भारतीय श्रमिकों को एक निश्चित अवधि तक यूनाइटेड किंगडम की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में भुगतान करने से छूट मिलेगी। इससे 75,000 से अधिक भारतीय श्रमिकों और लगभग 900 नियोक्ताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है, विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और पेशेवर सेवाओं जैसे क्षेत्रों में।

सरकारी खरीद और लैंगिक समावेशन:

      • CETA पात्र यूनाइटेड किंगडम की कंपनियों को भारत के सरकारी खरीद बाजार में सीमित पहुंच प्रदान करता है, जिससे प्रतिस्पर्धा, कार्यकुशलता और तकनीकी मानकों में सुधार हो सकता है। हालांकि, मेक इन इंडिया पहल को समर्थन देने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा आवश्यक होगी।
      • इस समझौते में भारत का पहला समर्पित लैंगिक अध्याय भी शामिल है, जिसका उद्देश्य महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन देना और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।

चुनौतियाँ:

इन लाभों के बावजूद कुछ चुनौतियाँ बनी रहेंगी, जिनमें मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के कम उपयोग, अंतरराष्ट्रीय मानकों का अनुपालन, घरेलू प्रतिस्पर्धा और कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) जैसे कार्बन-आधारित व्यापार उपायों के संभावित प्रभाव शामिल हैं।

निष्कर्ष:

भारतयूनाइटेड किंगडम CETA और DCC समावेशी तथा भविष्य-केंद्रित व्यापार समझौतों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। निर्यात, निवेश, कुशल श्रमिकों की आवाजाही और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में एकीकरण को बढ़ावा देकर ये समझौते भारत की आर्थिक वृद्धि को मजबूत कर सकते हैं। हालांकि, घरेलू हितों की सुरक्षा के लिए इनका सावधानीपूर्वक और प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक होगा।

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