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Blog / 21 Jan 2026

भारत–यूएई संबंध

संदर्भ:

हाल ही में 19 जनवरी को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान भारत के अति संक्षिप्त दौरे में रहे। भारत के प्रधानमंत्री  के साथ नई दिल्ली में उनकी बैठक हुई। इस बैठक में परमाणु ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग तथा आर्थिक संबंधों को विस्तार देने पर चर्चा हुई, जो दोनों देशों के बीच गहराते रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है।

बैठक में सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:

      • ऊर्जा सुरक्षा: दोनों देश ने 10-वर्षीय एलएनजी आपूर्ति समझौता किया, जिसके अंतर्गत ADNOC गैस वर्ष 2028 से भारत की हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को प्रतिवर्ष 0.5 मिलियन टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करेगी। यह भारत के लिए यूएई की एक प्रमुख ऊर्जा भागीदार के रूप में भूमिका को और सुदृढ़ करता है।
      • परमाणु सहयोग: दोनों देशों ने उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों, जिनमें बड़े परमाणु रिएक्टर और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) शामिल हैं, में सहयोग की संभावनाओं पर सहमति व्यक्त की। यह सहयोग भारत के शांति (SHANTI) कानून द्वारा संभव हुआ है, जो असैन्य परमाणु क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सक्षम बनाता है।
      • एआई और डिजिटल अवसंरचना: एआई, डेटा और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोग को प्राथमिकता दी गई। चर्चाओं में भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर की स्थापना, डेटा सेंटरों में यूएई निवेश, तथा डिजिटल दूतावासों की अवधारणा शामिल रही, जिससे डिजिटल संप्रभु अवसंरचना सुनिश्चित की जा सके। यूएई ने AI इम्पैक्ट समिट 2026 के लिए भारत को समर्थन देने की भी घोषणा की।
      • रक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग: बैठक के परिणामस्वरूप रणनीतिक रक्षा साझेदारी पर आशय-पत्र (Letter of Intent) जारी किया गया। दोनों नेताओं ने आतंकवाद की unequivocal निंदा की और आतंकवादी वित्तपोषण तथा धन शोधन से निपटने के लिए वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) जैसे अंतरराष्ट्रीय तंत्रों के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
      • व्यापार, निवेश और एमएसएमई: 200 अरब अमेरिकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य के अतिरिक्त, दोनों पक्षों ने धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र में यूएई की भागीदारी सहित रणनीतिक निवेशों की समीक्षा की। भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर और भारत-अफ्रीका सेतु जैसी पहलों को क्षेत्रों के बीच एमएसएमई संपर्क मजबूत करने हेतु रेखांकित किया गया।
      • अंतरिक्ष, खाद्य सुरक्षा और सांस्कृतिक संबंध: भारत और यूएई ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग गहरा करने, सुदृढ़ खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकास तथा जन-जन के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई। इसमें अबू धाबी में हाउस ऑफ इंडियाकी स्थापना की योजना भी शामिल है।

India–UAE Relations

भारत-यूएई संबंधों के बारे में:

      • ऐतिहासिक और कूटनीतिक आधार: भारत और यूएई के बीच 1972 से राजनयिक संबंध हैं, जिन्हें नियमित उच्च-स्तरीय संवाद और बढ़ती रणनीतिक समानता का समर्थन प्राप्त है। समय के साथ यह संबंध पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर ऊर्जा, निवेश, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और प्रवासी भारतीय संपर्कों तक विस्तारित हो गए हैं।
      • व्यापक रणनीतिक सहभागिता: इस साझेदारी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया है, जो क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और वैश्विक शासन में सहयोग जैसे साझा हितों को प्रतिबिंबित करता है। खाड़ी क्षेत्र में भारत की भूमिका तथा मध्य पूर्व और अफ्रीका के लिए यूएई का प्रवेश-द्वार के रूप में महत्व इस साझेदारी को और मजबूती प्रदान करता है।
      • आर्थिक और व्यापारिक एकीकरण: 2022 में भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद आर्थिक संबंधों में तेज़ी आई है, जिससे शुल्कों में कमी और बाजार पहुँच का विस्तार हुआ। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन चुका है। हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है और दोनों देशों ने इसे 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।

निष्कर्ष:

भारत-यूएई के बीच हुई संक्षिप्त किंतु सारगर्भित बैठक अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और संस्कृति में फैली भारतयूएई की बहुआयामी साझेदारी को रेखांकित करती है। परमाणु सहयोग, एआई और आतंकवाद-रोधी प्रयासों पर दिया गया जोर एक परिपक्व रणनीतिक गठबंधन को दर्शाता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और साझा समृद्धि को समर्थन देता है। भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के दौरान इस साझेदारी के और सुदृढ़ होने की संभावना है, जिससे भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका और मजबूत होगी।