भारत-त्रिनिदाद और टोबैगो संबंध
सन्दर्भ:
हाल ही में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर त्रिनिदाद और टोबैगो (T&T) की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा (8-9 मई, 2026) पर थे। यह यात्रा भारत की 'सागर' (SAGAR) पहल और 'ग्लोबल साउथ' के देशों के साथ सक्रिय जुड़ाव की नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को सांस्कृतिक स्तर से तकनीकी और आर्थिक सहयोग के नए धरातल पर ले जाना है।
यात्रा के मुख्य बिंदु:
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- भारत ने स्थानीय स्कूली बच्चों को 2,000 लैपटॉप का पहला जत्था सौंपा, जो भारत द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में दी जा रही तकनीकी सहायता का हिस्सा है।
- पेनल (Penal) में 'नेशनल प्रोस्थेटिक्स सेंटर' का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र भारत की प्रसिद्ध 'जयपुर फुट' तकनीक का उपयोग कर शारीरिक रूप से अक्षम लोगों की सहायता करेगा।
- कुवा (Couva) में एक अत्याधुनिक एग्रो-प्रोसेसिंग सुविधा का उद्घाटन किया गया। इसके लिए भारत ने मशीनरी और तकनीकी सहायता प्रदान की है।
- डॉ. जयशंकर ने भारतीय गिरमिटिया मजदूरों के आगमन स्थल का दौरा कर दोनों देशों के बीच सभ्यतागत संबंधों को पुनर्जीवित किया।
- द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, पिछले पांच वर्षों में यह लगभग दोगुना होकर अब 35 करोड़ डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य एवं औषधियां, ऑटोमोबाइल एवं मशीनरी, लोहा एवं इस्पात, वस्त्र एवं परिधान जैसे क्षेत्रों में व्यापार में लगातार वृद्धि हो रही है।
- त्रिनिदाद और टोबैगो कैरेबियन क्षेत्र का पहला देश है जिसने सुगम भुगतान के लिए भारत के यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस प्लेटफॉर्म को अपनाने पर सहमति जताई है।
- भारत ने स्थानीय स्कूली बच्चों को 2,000 लैपटॉप का पहला जत्था सौंपा, जो भारत द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में दी जा रही तकनीकी सहायता का हिस्सा है।
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8 प्रमुख समझौते हस्ताक्षरित (MoUs):
यात्रा के दौरान दोनों देशों ने सहयोग के दायरे को विस्तृत करते हुए 8 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए:
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- नवीकरणीय ऊर्जा (सौरकरण): त्रिनिदाद और टोबैगो के विदेश और कैरिकॉम (CARICOM) मामलों के मंत्रालय के भवन को सौर ऊर्जा से सुसज्जित करने के लिए समझौता। यह सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण (नेल्सन द्वीप): ऐतिहासिक नेल्सन द्वीप पर बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए समझौता। यह स्थल भारतीय प्रवासियों के इतिहास से गहराई से जुड़ा है।
- आयुर्वेद की वैश्विक पहुंच: 'वेस्टइंडीज विश्वविद्यालय' में आयुर्वेद पर एक 'भारतीय पीठ' (Indian Chair) स्थापित करने का निर्णय, जो पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ाएगा।
- लोक स्वास्थ्य (वेक्टर नियंत्रण): मच्छर जनित और अन्य संक्रामक रोगों के नियंत्रण के लिए तकनीकी साझाकरण हेतु स्वास्थ्य समझौता।
- पर्यटन सहयोग: दोनों देशों के बीच पर्यटन के बुनियादी ढांचे और यात्री प्रवाह को बढ़ाने के लिए एक रूपरेखा तैयार करना।
- शिक्षा का डिजिटलीकरण: डिजिटल माध्यमों से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और तकनीकी सहयोग सुनिश्चित करना।
- स्वास्थ्य अवसंरचना: सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग और दवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने के लिए समझौता।
- क्षमता निर्माण और कौशल विकास: विभिन्न क्षेत्रों में त्रिनिदाद और टोबैगो के पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए भारत के 'ITEC' कार्यक्रम के तहत सहयोग का विस्तार।
- नवीकरणीय ऊर्जा (सौरकरण): त्रिनिदाद और टोबैगो के विदेश और कैरिकॉम (CARICOM) मामलों के मंत्रालय के भवन को सौर ऊर्जा से सुसज्जित करने के लिए समझौता। यह सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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निष्कर्ष:
त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या (लगभग 35%) भारत के लिए एक महत्वपूर्ण 'सांस्कृतिक संपत्ति' है, जो द्विपक्षीय संबंधों को भावनात्मक मजबूती प्रदान करती है। भारतीय विदेश मंत्री की यह यात्रा भारत-कैरिबियन संबंधों में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। त्रिनिदाद और टोबैगो के पास प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार हैं जो भविष्य में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है। भारत स्वयं को विकासशील देशों की आवाज के रूप में पेश कर रहा है। त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करना भारत की इस छवि को मजबूत करता है।

