सन्दर्भ:
हाल ही में, स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन की नई दिल्ली की राजकीय यात्रा के दौरान भारत और स्विट्जरलैंड ने रक्षा उत्पादन, सैन्य आदान-प्रदान और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को व्यापक बनाने पर सहमति व्यक्त की। यह यात्रा भारत–EFTA व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौते (TEPA) की पहली वर्षगांठ के अवसर पर भी हुई।
हालिया बैठक के प्रमुख परिणाम:
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- रक्षा उत्पादन और सैन्य आदान-प्रदान में अधिक सहयोग।
- असैन्य परमाणु सहयोग का विस्तार।
- कानूनी प्रवासन और पेशेवर गतिशीलता को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रवासन और गतिशीलता भागीदारी।
- कुशल युवाओं के आदान-प्रदान के लिए युवा पेशेवर योजना।
- सुरंग निर्माण, रोपवे और विद्युत गतिशीलता के क्षेत्र में सहयोग।
- स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान।
- डीप-टेक स्टार्टअप और शिक्षा-जगत तथा उद्योग के बीच सहयोग को समर्थन।
- नैतिक AI शासन पर अधिक समन्वय।
- रक्षा उत्पादन और सैन्य आदान-प्रदान में अधिक सहयोग।
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भारत–स्विट्जरलैंड संबंधों के बारे में:
भारत–स्विट्जरलैंड संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और पारस्परिक आर्थिक हितों पर आधारित एक बहुआयामी साझेदारी हैं। स्विट्जरलैंड पूंजी, सटीक इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी में योगदान देता है, जबकि भारत एक बड़ा बाजार, विनिर्माण क्षमताएँ और कुशल मानव संसाधन प्रदान करता है।
ऐतिहासिक विकास:
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- 1948 मैत्री संधि: राजनयिक संबंध 14 अगस्त 1948 को स्थापित हुए।
- औद्योगिक सहयोग: स्विस प्रौद्योगिकी ने भारत के औद्योगिक आधुनिकीकरण में योगदान दिया, जिसमें प्रारंभिक रेलवे और इंजीनियरिंग परियोजनाएँ शामिल थीं।
- वित्तीय पारदर्शिता: बैंकिंग गोपनीयता को लेकर चिंताएँ धीरे-धीरे कर चोरी के विरुद्ध सहयोग की दिशा में परिवर्तित हुईं। स्वचालित सूचना आदान-प्रदान (AEOI) 2018 में लागू हुआ।
- नवाचार और व्यापार: Swissnex Bengaluru जैसे मंचों ने वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत किया। इसके बाद 2024 में भारत–EFTA TEPA पर हस्ताक्षर किए गए।
- 1948 मैत्री संधि: राजनयिक संबंध 14 अगस्त 1948 को स्थापित हुए।
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वर्तमान व्यापार और निवेश:
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- स्विट्जरलैंड एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है, जिसके साथ वित्त वर्ष 2024–25 में लगभग 19.55 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। हालाँकि, व्यापार का संतुलन स्विट्जरलैंड के पक्ष में काफी अधिक है, जिसका एक कारण भारत द्वारा सोने के बुलियन के बड़े पैमाने पर आयात करना है।
- भारत फार्मास्यूटिकल्स, कार्बनिक रसायन और इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात करता है, जबकि स्विट्जरलैंड से होने वाले प्रमुख निर्यात में सोना, मशीनरी, रसायन और फार्मास्यूटिकल्स शामिल हैं।
- स्विट्जरलैंड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का भी एक प्रमुख स्रोत है। 2000–2025 के दौरान लगभग 10.87 अरब डॉलर का निवेश किया गया है तथा भारत में एबीबी, शिंडलर और नेस्ले सहित 330 से अधिक स्विस कंपनियाँ कार्यरत हैं।
- स्विट्जरलैंड एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है, जिसके साथ वित्त वर्ष 2024–25 में लगभग 19.55 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ। हालाँकि, व्यापार का संतुलन स्विट्जरलैंड के पक्ष में काफी अधिक है, जिसका एक कारण भारत द्वारा सोने के बुलियन के बड़े पैमाने पर आयात करना है।
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प्रमुख चुनौतियाँ:
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- द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर गतिरोध: निवेशक-राज्य विवाद निपटान (ISDS) को लेकर मतभेद बने हुए हैं। स्विट्जरलैंड अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का समर्थन करता है, जबकि भारत का मॉडल BIT घरेलू कानूनी उपायों को पहले अपनाने को अधिक महत्व देता है।
- फार्मास्यूटिकल बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR): स्विस फार्मास्यूटिकल हितधारक अधिक मजबूत बौद्धिक संपदा संरक्षण की मांग करते हैं, जबकि भारत सस्ती जेनेरिक दवाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की रक्षा करना चाहता है।
- रक्षा निर्यात में तटस्थता: स्विट्जरलैंड की तटस्थता और युद्ध सामग्री से संबंधित नियम रक्षा निर्यात, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और पुनःनिर्यात को सीमित कर सकते हैं।
- प्रतिभा गतिशीलता: मौजूदा गतिशीलता के रास्तों को भारत के बड़े कुशल पेशेवरों के समूह के अनुरूप बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
- द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर गतिरोध: निवेशक-राज्य विवाद निपटान (ISDS) को लेकर मतभेद बने हुए हैं। स्विट्जरलैंड अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का समर्थन करता है, जबकि भारत का मॉडल BIT घरेलू कानूनी उपायों को पहले अपनाने को अधिक महत्व देता है।
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निष्कर्ष:
भारत–स्विट्जरलैंड संबंध पारंपरिक बैंकिंग और व्यापार सहयोग से आगे बढ़कर प्रौद्योगिकी, प्रतिभा, नवाचार और रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। इस संबंध को मजबूत करना भारत के तकनीकी विकास, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं, टिकाऊ अवसंरचना और गुणवत्तापूर्ण रोजगार के लक्ष्यों को समर्थन दे सकता है।

