संदर्भ:
हाल ही में, भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 8–10 सितंबर 2026 तक श्रीलंका के दौरे पर रहे, इस दौरान भारत और श्रीलंका ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए रक्षा से संबंधित तीन समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए।
तीन समझौता ज्ञापन (MoUs) क्या हैं?
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- L70 तोपों का उन्नयन
- भारत और श्रीलंका ने श्रीलंकाई वायु सेना की छह L70 विमान-रोधी तोपों के उन्नयन के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए।
- इस परियोजना को भारत सरकार के अनुदान के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी।
- इन तोपों की आपूर्ति मूल रूप से भारत द्वारा की गई थी।
- इनका आधुनिकीकरण श्रीलंका की वायु-रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, विशेष रूप से महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए।
- भारत और श्रीलंका ने श्रीलंकाई वायु सेना की छह L70 विमान-रोधी तोपों के उन्नयन के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए।
- राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय: भारत के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC) और श्रीलंका के NDC के बीच एक MoU निम्नलिखित को बढ़ावा देगा:
- शैक्षणिक सहयोग
- ज्ञान का आदान-प्रदान
- पेशेवर आदान-प्रदान
- अधिक संस्थागत संबंध
- यह रक्षा सहयोग को सैन्य हार्डवेयर से आगे बढ़ाकर क्षमता निर्माण और मानव-संसाधन विकास की दिशा में ले जाता है।
- शैक्षणिक सहयोग
- राष्ट्रीय कैडेट कोर सहयोग
- दोनों देशों के राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के बीच MoU युवा और कैडेट आदान-प्रदान को औपचारिक रूप देगा।
- यह दोनों देशों की जन-से-जन संबंधों, नेतृत्व विकास और भावी पीढ़ियों के बीच बेहतर समझ को बढ़ावा दे सकता है।
- दोनों देशों के राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के बीच MoU युवा और कैडेट आदान-प्रदान को औपचारिक रूप देगा।
- L70 तोपों का उन्नयन
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भारत–श्रीलंका संबंध:
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- भारत और श्रीलंका के बीच 2,500 से अधिक वर्षों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं। उनकी भौगोलिक निकटता और हिंद महासागर में श्रीलंका की रणनीतिक स्थिति भारत की पड़ोसी प्रथम नीति (Neighbourhood First Policy) और समुद्री-सुरक्षा हितों के लिए द्विपक्षीय संबंधों को महत्वपूर्ण बनाती है।
- भारत संकट के समय भी एक प्रमुख साझेदार रहा है। श्रीलंका के 2022 के आर्थिक संकट के दौरान, भारत ने ऋण सहायता, मुद्रा सहयोग और मानवीय सहायता के माध्यम से लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान की। जनवरी 2023 में, भारत IMF से पहले श्रीलंका के ऋण पुनर्गठन का औपचारिक रूप से समर्थन करने वाला पहला द्विपक्षीय ऋणदाता बना।
- भारत और श्रीलंका के बीच 2,500 से अधिक वर्षों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं। उनकी भौगोलिक निकटता और हिंद महासागर में श्रीलंका की रणनीतिक स्थिति भारत की पड़ोसी प्रथम नीति (Neighbourhood First Policy) और समुद्री-सुरक्षा हितों के लिए द्विपक्षीय संबंधों को महत्वपूर्ण बनाती है।
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आर्थिक और विकास सहयोग:
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- भारत–श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता (ISFTA), जिस पर 2000 में हस्ताक्षर किए गए थे, आर्थिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार है। द्विपक्षीय वस्तु व्यापार वित्त वर्ष 2025–26 में लगभग 7.18 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
- भारत की विकास साझेदारी 3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जिसमें प्रमुख आवास और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं। भारतीय आवास परियोजना (Indian Housing Project) ने युद्ध से प्रभावित और बागान समुदायों को 50,000 से अधिक घर उपलब्ध कराए हैं।
- भारत–श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता (ISFTA), जिस पर 2000 में हस्ताक्षर किए गए थे, आर्थिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार है। द्विपक्षीय वस्तु व्यापार वित्त वर्ष 2025–26 में लगभग 7.18 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
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रक्षा और समुद्री सहयोग:
भारत और श्रीलंका मित्र शक्ति (थल सेना) और SLINEX (नौसेना) अभ्यास आयोजित करते हैं। श्रीलंका कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन (CSC) का भी सदस्य है, जिसमें भारत, मालदीव और मॉरीशस शामिल हैं तथा यह समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी गतिविधियों और मानवीय सहायता पर केंद्रित है।
भारत के लिए महत्व:
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- समुद्री सुरक्षा: प्रमुख हिंद महासागर शिपिंग मार्गों के निकट श्रीलंका का स्थान भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
- रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का मुकाबला: बढ़ता हुआ रक्षा सहयोग भारत को द्वीप राष्ट्र में बढ़ती बाहरी भागीदारी के बीच श्रीलंका के साथ रणनीतिक विश्वास बनाए रखने में सहायता करता है।
- क्षमता निर्माण: उपकरणों के आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण, शैक्षणिक सहयोग और युवा आदान-प्रदान पर ध्यान भारत के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें वह केवल हथियार आपूर्तिकर्ता के बजाय एक सुरक्षा और क्षमता-निर्माण साझेदार है।
- पड़ोसी प्रथम और महासागर (MAHASAGAR) पहल: यह साझेदारी भारत की पड़ोसी प्रथम नीति (Neighbourhood First Policy) और महासागर पहल (MAHASAGAR) का समर्थन करती है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, विकास और सहयोग पर जोर देती है।
- समुद्री सुरक्षा: प्रमुख हिंद महासागर शिपिंग मार्गों के निकट श्रीलंका का स्थान भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए इसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
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चुनौतियां:
मजबूत संबंधों के बावजूद, कुछ मुद्दे अभी भी बने हुए हैं:
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- पाक जलडमरूमध्य में मछली पकड़ने का विवाद
- कच्चातिवु से संबंधित चिंताएं
- श्रीलंका में चीन की रणनीतिक और आर्थिक उपस्थिति
- मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री सुरक्षा
- श्रीलंका की रणनीतिक स्वायत्तता और भारत की सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन
- पाक जलडमरूमध्य में मछली पकड़ने का विवाद
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निष्कर्ष:
हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MoUs) भारत के क्षमता निर्माण, संस्थागत रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा की ओर बढ़ते दृष्टिकोण को प्रदर्शित करते हैं। ये पड़ोसी प्रथम और महासागर को मजबूत करते हैं तथा हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार सुरक्षा साझेदार के रूप में भारत की भूमिका को सुदृढ़ करते हैं।
